जो कहा, सो किया ! अब रतलाम के ‘eOffice’ में ‘eFile’ ही दौड़ेंगी, e-mail पर जारी होंगे आदेश-निर्देश

कलेक्टर अजय कटेसरिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई तेज और पेपरलेस प्रशासन की बात पर अमल शुरू कर दिया है। अब कलेक्टर कार्यालय में भौतिक डाक और फाइलों का आवागमन बंद कर eOffice को अनिवार्य कर दिया है। जानिए इस बदलाव का किस पर क्या असर होगा।

जो कहा, सो किया ! अब रतलाम के ‘eOffice’ में ‘eFile’ ही दौड़ेंगी, e-mail पर जारी होंगे आदेश-निर्देश
रतलाम के सरकारी विभागों में eOffice व्यवस्था लागू।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव सिर्फ आदेश जारी करने से नहीं आता, बल्कि उसके लिए काम करने का तरीका बदलना पड़ता है। रतलाम में कलेक्टर अजय कटेसरिया ने इसी दिशा में कदम बढ़ाया है। अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने प्रशासन को अधिक तेज, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की बात कही थी। उसको अमल में लाते हुए कलेक्टर कार्यालय तक आने वाली भौतिक डाक और फाइलों का आवागमन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। अब ‘eOffice’ में ‘eFile’ ही दौड़ेंगी और आदेश-निर्देश e-mail पर ही दिए और लिए जाएंगे।

कलेक्टर बदलते ही सरकारी महकमे में बदलाव की बयार भी बहने लगी है। सरकारी कार्यों के त्वरित, पारदर्शी एवं पेपरलेस निष्पादन तथा ‘eOffice’ प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं तहसीलदारों को जरूरी निर्देश जारी किए हैं। यानी अब किसी प्रकरण को कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचने के लिए डाक, डिस्पैच और भौतिक फाइल के रास्ते से नहीं गुजरना होगा। यह महज कागज बचाने का फैसला नहीं है। इसके पीछे प्रशासनिक कामकाज में उस समय को कम करने की कोशिश है, जो फाइल के निर्णय तक पहुंचने से पहले ही उसके आवागमन में खर्च हो जाता है।

सामान्य पत्र के लिए अब फाइल नहीं जाएगी

कलेक्टर ने व्यवस्था का दायरा केवल निर्णय वाले प्रकरणों तक सीमित नहीं रखा है। यदि किसी जिला स्तरीय कार्यालय या कलेक्टर कार्यालय को केवल जानकारी, प्रतिवेदन, तथ्यात्मक विवरण अथवा अभिमत चाहिए, तो संबंधित शाखा या अधिकारी की अधिकृत ई-मेल आईडी से ही जवाब भेजा जाएगा। अर्थात केवल सूचना देने के लिए पत्र बनाना, उसे डिस्पैच करना, भौतिक रूप से भेजना और फिर संबंधित शाखा तक पहुंचाना आवश्यक नहीं होगा। इससे काम कम नहीं होगा, लेकिन काम को करने की गैर-जरूरी औपचारिकताएं कम होंगी।

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फाइल दफ्तरों के बीच रेंगेगी नहीं, अब दौड़ेगी !

किसी सरकारी प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण चीज फाइल का भौतिक रूप से पहुंचना नहीं, बल्कि उस पर समय रहते निर्णय होना है। इसके बावजूद अब तक व्यवस्था में फाइल को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक पहुंचाना भी प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा रहा है। अब यही हिस्सा हटाया जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो जिस फाइल को पहले कर्मचारी के हाथों या वाहन के जरिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक पहुंचाना पड़ता था, वही प्रकरण अब डिजिटल रूप से eOffice की eFile प्रणाली के जरिए पहुंचेगी।

आदेश, अनुमोदन, स्वीकृति, निर्णय अथवा अन्य कार्रवाई वाले सभी प्रकरण eOffice की eFile प्रणाली से भेजे जाएंगे। अब तहसील या अनुविभाग स्तर पर तैयार प्रकरण का कलेक्टर कार्यालय तक आवागमन ऐसे ही होगा। खासबात यह है कि फाइल की गति अब उसके पहियों से नहीं, सिस्टम की गति से तय होगी। यही इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

अनावश्यक अंतराल कम करना उद्देश्य

किसी सरकारी फाइल में लगने वाला हर दिन केवल सरकारी समय नहीं होता। इसमें किसी व्यक्ति की जमीन का मामला हो सकता है, किसी की स्वीकृति की प्रतीक्षा हो सकती है, किसी प्रशासनिक निर्णय की जरूरत हो सकती है या किसी शिकायत के निराकरण का अगला चरण हो सकता है। eOffice व्यवस्था का उद्देश्य इसी अनावश्यक अंतराल को कम करना है। यदि प्रकरण डिजिटल रूप से तत्काल संबंधित स्तर तक उपलब्ध होगा, तो अधिकारी के सामने निर्णय के लिए फाइल आने में लगने वाला समय भी घटेगा। फाइल जल्दी पहुंचना निर्णय जल्दी होने की गारंटी भले ही न हो, लेकिन निर्णय के रास्ते से एक अनावश्यक पड़ाव जरूर हटेगा।

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सीएम हेल्पलाइन में भी बदलेगी प्रक्रिया

सीएम हेल्पलाइन की स्पेशल क्लोजर से संबंधित प्रकरणों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिकायत के लिए अलग TOC तैयार होगी। उससे संबंधित आदेश-पत्रिका, प्रतिवेदन और अन्य आवश्यक दस्तावेज उसी TOC में क्रमबद्ध रूप से रखे जाएंगे। हर शिकायत के लिए अलग eFile बनाना जरूरी नहीं होगा, लेकिन प्रत्येक शिकायत की TOC अलग और स्पष्ट पहचान वाली होगी। इस व्यवस्था को अपनाने के लिए 30 सितंबर 2026 तक संक्रमणकालीन छूट दी गई है।

नई व्यवस्था से ये होंगे फायदे होंगे

फाइल रुकी, देखना होगा आसान

कागजी फाइल की व्यवस्था में किसी प्रकरण की स्थिति जानने के लिए कई बार यह पता लगाना पड़ता है कि फाइल किस शाखा में है, किस अधिकारी के पास है या किस स्तर पर आगे बढ़ना बाकी है। डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से यह तस्वीर बदलेगी। eFile के माध्यम से प्रकरण की प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड में रहेगी। इससे फाइल की स्थिति जानना, उसके स्तर को ट्रैक करना और लंबित रहने की स्थिति पर नजर रखना आसान होगा। इस पेपरलेस व्यवस्था से पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना भी आसान होगा।

अधिकारियों-कर्मचारियों को फायदा

सबसे पहला फायदा समय का है। कर्मचारियों को बार-बार फाइल लेकर कलेक्टर कार्यालय तक भेजने की जरूरत नहीं होगी। डाक, डिस्पैच, फाइल प्राप्ति और संबंधित शाखा तक पहुंचाने में लगने वाला श्रम भी बचेगा। फाइलों के भौतिक रखरखाव, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और पुराने प्रकरण तलाशने की प्रक्रिया भी धीरे-धीरे सरल हो सकती है। इसके अलावा अधिकारी किसी प्रकरण को अपने डिजिटल कार्यक्षेत्र से देख सकेंगे। इससे कार्यालयीन कामकाज में स्थान की बाध्यता भी कम होगी।

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आम आदमी को फायदा

इस बदलाव का वास्तविक मूल्यांकन यहीं से होगा। आम नागरिक के लिए eOffice शब्द अपने आप में महत्वपूर्ण नहीं है। उसके लिए महत्वपूर्ण यह है कि उसका काम कितनी जल्दी होता है। यदि डिजिटल फाइल के कारण प्रकरण जल्दी संबंधित अधिकारी तक पहुंचता है, लंबित फाइल की स्थिति स्पष्ट रहती है और निर्णय प्रक्रिया में अनावश्यक समय कम होता है, तो इस बदलाव का वास्तविक लाभ नागरिक तक पहुंचेगा। इसलिए eOffice को केवल सरकारी दफ्तरों को ‘डिजिटल’ बनाने की कवायद के रूप में देखना अधूरा होगा। इसका लक्ष्य तभी पूरा माना जाएगा जब कागज कम होने के साथ-साथ काम के इंतजार का समय भी कम हो।

घोषणा से आगे बढ़कर कार्यसंस्कृति बदलने की कोशिश

सरकारी व्यवस्था में तकनीक लाने की घोषणाएं पहले भी होती रही हैं। फर्क तब पड़ता है, जब तकनीक किसी ऐप या पोर्टल तक सीमित न रहकर दफ्तर के रोजमर्रा के काम करने के तरीके को बदल दे। कलेक्टर कटेसरिया के मामले में फिलहाल पहला कदम इसी दिशा में दिखाई दे रहा है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेज, पारदर्शी और पेपरलेस प्रशासन की जरूरत की बात कही थी तब शायद किसी को यकीन नहीं हुआ हो। परंतु अब कलेक्टर कार्यालय में भौतिक फाइलों के प्रवेश पर रोक और ई-ऑफिस को अनिवार्य करने के उनके फैसले ने रतलाम जिले के लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

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