रतलाम पुलिस की कार्रवाई ! टेलीग्राम पर ऑनलाइन घड़ियां बेचने का दिया झांसा और ठग लिए ₹6.43 लाख; हरिद्वार और कोटा से दो आरोपी गिरफ्तार

टेलीग्राम पर ऑनलाइन घड़ियां बेचकर मुनाफे का झांसा देकर ₹6.43 लाख की साइबर ठगी के मामले में रतलाम पुलिस ने हरिद्वार और कोटा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने ₹28 हजार नकद और मोबाइल जब्त किए। जिले में साइबर अपराध के खिलाफ ₹1.03 करोड़ से अधिक की राशि पर कार्रवाई की जा चुकी है।

रतलाम पुलिस की कार्रवाई ! टेलीग्राम पर ऑनलाइन घड़ियां बेचने का दिया झांसा और ठग लिए ₹6.43 लाख; हरिद्वार और कोटा से दो आरोपी गिरफ्तार
ऑनलाइन घड़ी बेचने के नाम पर हुई ठगी के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

₹28 हजार नकद और मोबाइल जब्त; ठगी की रकम की रिकवरी और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । टेलीग्राम पर ऑनलाइन घड़ियां बेचकर मुनाफा कमाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से ₹6.43 लाख की साइबर ठगी के मामले में रतलाम पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर सेल और जावरा औद्योगिक क्षेत्र पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपियों को उत्तराखंड के हरिद्वार और राजस्थान के कोटा से पकड़ा। आरोपियों के कब्जे से ₹28 हजार नकद और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, लेन-देन, अन्य सहयोगियों और संभावित पीड़ितों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

पुलिस के अनुसार फरियादी मजदूरी का काम करता है और मोबाइल फोन पर टेलीग्राम का इस्तेमाल करता है। 29 दिसंबर 2025 को मजदूरी के दौरान उसे टेलीग्राम पर एक अज्ञात आईडी से संदेश मिला। इसमें ऑनलाइन घड़ियां सेल करने और इससे मुनाफा कमाने का झांसा दिया गया। आरोपियों ने ऑनलाइन काम शुरू करने के लिए फरियादी को एक वेबसाइट का लिंक, आईडी और पासवर्ड दिया। शुरुआत में रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर एक बैंक खाता उपलब्ध कराया गया, जिसमें फरियादी ने ₹10,000 जमा किए। इसके बाद आरोपियों ने ऑनलाइन घड़ियां बेचने के नाम पर उसके खाते में कुछ राशि मुनाफे के रूप में आने की जानकारी दी। इससे फरियादी को आरोपियों पर भरोसा हो गया।

डबल मुनाफे का झांसा देकर ₹6.43 लाख जमा करवाए

विश्वास बनने के बाद आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में राशि जमा करने पर डबल मुनाफा मिलने का लालच दिया। फरियादी ने आरोपियों के बताए विभिन्न बैंक खातों में अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल ₹6,43,285 जमा कर दिए।

बाद में न तो फरियादी को वादा किया गया मुनाफा दिया गया और न ही उसकी मूल राशि लौटाई गई। इस तरह टेलीग्राम के जरिए संपर्क कर अलग-अलग व्यक्तियों और बैंक खातों का इस्तेमाल करते हुए फरियादी के साथ कुल ₹6,43,285 की धोखाधड़ी की गई। शिकायत मिलने के बाद थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।

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बैंकिंग और डिजिटल साक्ष्यों से आरोपियों तक पहुंची पुलिस

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसपी अमित कुमार (भा.पु.से.) के निर्देशन में साइबर सेल रतलाम तथा जावरा औद्योगिक क्षेत्र पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। पुलिस ने साइबर तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों में हुए लेन-देन और उपलब्ध डिजिटल जानकारी का विश्लेषण किया। इसी आधार पर आरोपियों की पहचान और उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई गई और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों के कब्जे से ₹28,000 नकद और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस पूछताछ में साइबर ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, अन्य सहयोगियों, ठगी की रकम के लेन-देन और संभावित पीड़ितों से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार

  1. अश्वनी पिता रोशनलाल अरोरा, निवासी HN 08, राजा गार्डन, जगजीतपुर, हरिद्वार, उत्तराखंड को हरिद्वार से गिरफ्तार।
  2. अनिमेष पिता वीरेंद्र कुमार जैन, निवासी VTC, हाथीदिलोद, जिला बारां, राजस्थान को कोटा से गिरफ्तार।

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89 कोर्ट ऑर्डर पर ₹1.03 करोड़ से ज्यादा की राशि पर कार्रवाई

रतलाम पुलिस के अनुसार साइबर अपराध के खिलाफ जिले में लगातार कार्रवाई की जा रही है। अगस्त 2026 तक साइबर अपराध से संबंधित कुल 89 कोर्ट ऑर्डर के तहत ₹1,03,21,402.46 की राशि के संबंध में कार्रवाई की गई है। इनमें से 49 साइबर शिकायतों में ₹37,06,285.63 की राशि पीड़ितों को सफलतापूर्वक रिफंड करवाई जा चुकी है।

साइबर शिकायतों में बैंकिंग और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर ठगी की रकम को सुरक्षित कराने, संबंधित बैंक खातों पर आवश्यक कार्रवाई करने और न्यायालयीन प्रक्रिया के जरिए पीड़ितों को राशि वापस दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सभी थानों पर साइबर डेस्क, शुरुआती स्तर पर जांच पर जोर

साइबर फ्रॉड की शिकायतों पर शुरुआती स्तर पर ही कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए रतलाम जिले के सभी थानों पर साइबर डेस्क संचालित की जा रही हैं। साइबर डेस्क और जिला साइबर सेल को मिलने वाली शिकायतों में बैंक खाते, लेन-देन, मोबाइल नंबर और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही NCRP पोर्टल से प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम को सुरक्षित कराने और पीड़ितों को राहत दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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म्यूल बैंक खातों पर ‘ऑपरेशन मेट्रिक्स 2.0’

साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम के लेन-देन और ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले म्यूल बैंक खातों को चिन्हित कर उनके खाताधारकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

रतलाम पुलिस ने म्यूल खातों की पहचान और कार्रवाई के लिए ऑपरेशन मेट्रिक्स 2.0’ चलाया है। संदिग्ध बैंक खातों और उनसे जुड़े लेन-देन का तकनीकी विश्लेषण कर संबंधित खाताधारकों और पूरे नेटवर्क को चिन्हित किया जा रहा है।

फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क पर ‘ऑपरेशन फास्ट 2.0’

साइबर अपराधों में फर्जी अथवा गलत तरीके से प्राप्त सिम कार्ड के इस्तेमाल को रोकने के लिए ऑपरेशन फास्ट 2.0’ के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। इस अभियान में फर्जी सिम धारकों के साथ ऐसे सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले विक्रेताओं को भी चिन्हित किया जा रहा है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम उपलब्ध कराने या खरीदने-बेचने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

थाना स्तर पर बढ़ेंगे ‘साइबर योद्धा’

साइबर अपराधों की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई को मजबूत करने के लिए प्रत्येक थाना स्तर पर संचालित साइबर डेस्क को और प्रभावी बनाया जा रहा है। इसके लिए साइबर अपराधों में प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों यानी साइबर योद्धाओं’ की संख्या बढ़ाई जा रही है। इसका उद्देश्य थाना स्तर पर मिलने वाली साइबर शिकायतों की प्रारंभिक तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और जरूरी कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।

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पुलिस की अपील- ऑनलाइन कमाई के लालच में न फंसें

रतलाम पुलिस ने आमजन से अपील की है कि ऑनलाइन कमाई, निवेश, पार्ट टाइम जॉब, ऑनलाइन सेलिंग या अधिक मुनाफे के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे जमा न करें। किसी अनजान व्यक्ति से OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध वेबसाइट पर लॉगिन करने और किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में संदिग्ध एप्लीकेशन इंस्टॉल करने से भी बचें।

यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो बिना देरी किए 1930 साइबर हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं और संबंधित बैंक को तत्काल सूचना दें। पुलिस के अनुसार समय पर सूचना मिलने से ठगी की रकम को सुरक्षित कराने की संभावना बढ़ जाती है। रतलाम पुलिस ने कहा है कि साइबर अपराध के खिलाफ जिले में कार्रवाई लगातार जारी है और अपराधियों के नेटवर्क को चिन्हित कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

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