ब्रेकिंग न्यूज ! धोखेबाज कॉलोनाइजर मनीष सुराना को न्यायालय ने भेजा जेल, नगर निगम में बंधक प्लॉट बेचने का मामला
नगर निगम में बंधक भूखंड बेचने के मामले में धोखेबाज कॉलोनाइजर मनीष सुराना की जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर उसे जेल भेज दिया है।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । धोखाधड़ी के लिए कुख्यात कॉलोनाइजर मनीष सुराना को न्यायालय ने एक मामले में जेल भेज दिया है। नगर निगम में बंधक प्लॉट बेचने से जुड़े एक प्रकरण में मुल्जिम बयान के लिए पेश नहीं होने पर न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। जेल जाने से बचने के लिए आरोपी ने जमानत आवेदन पेश किया था जो न्यायालय ने खारिज कर दिया।
जानकारी के अनुसार फरियादी भगवतीलाल पिता श्यामलाल सोनी द्वारा गत 19 जून, 2009 को औद्योगिक क्षेत्र थाने में एक रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसमें बताया था कि कॉलोनाइजर मनीष पिता पिता पूनमचंद्र सुराना निवासी बिचलावास ने शहर के गोपालनगर राजगढ़ कॉलोनी के नगर निगम में बंधक करीब 17 भूखंडों को बिना मुक्त करवाए नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों से सांठगांठ कर बेचकर धोखाधड़ी की है। मामले में पुलिस द्वारा आरोपी मनीष सुराना के विरुद्ध अपराध क्रमांक 308/10 धारा 420 आईपीसी का प्रकरण दर्ज किया था। मामले में करीब 8 साल तक जांच चली जिसके बाद 06 मई 2018 को पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश किया था। मामले की सुनवाई प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में चल रही थी।
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न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट
न्यायालय द्वारा प्रकरण में आरोपी मनीष सुराना के मुल्जिम बयाने के लिए गत 3 मार्च 2026 की तारीख नियत की थी लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। इसे न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए आरोपी सुराना की गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इससे घबराये आरोपी ने सोमवार (16 मार्च, 2026) को न्यायालय में पेश होकर जमानत हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी प्रगति असाटे ने आरोपी मनीष सुराना का जमानत आवेदन खारिज कर उसे न्यायालय भेज दिया।
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ये भी हैं प्रकरण में आरोपी
बता दें कि, उक्त प्रकरण में आरोपी मनीष सुराना के साथ ही नगर निगम के अधिकारी संदेश पिता एस. एस. शर्मा, इंजीनियर जी. के. (गिरिराज कुमार) पिता भंवरलाल जायसवाल, ओमप्रकाश पिता कृष्णकांत शर्मा को भी आरोपी बनाया गया था। आरोप है कि इन्होंने नगर निगम में बंधक भूखंडों पर न सिर्फ भवन निर्माण की अनुमति जारी करवा दी अपितु नामांतरण भी कर दिया। यह कृत्य कॉलोनी का निर्माण पूरा हुए और बंधक भूखंड मुक्त करवाए बिना ही कर दिया गया था। इसके चलते मनीष सुराना के विरुद्ध दर्ज प्रकरण में उक्त आरोपियों को भी शामिल करते हुए उनके विरुद्ध धारा 120बी आईपीसी, धारा 293 मप्र नगर निगम अधिनियम, धारा 36घ मप्र नगर एवं निवेश अधिनियम 1973 तथा धारा 292सी मप्र कॉलोनाइजर एक्ट भी बढ़ाई गई थी।




