दुष्कर्मी को सजा ! लड़की का मोटरसाइकिल से किया अपहरण और किया रेप, न्यायालय ने सुनाई 10 साल की सजा, 9 गवाह व DNA रिपोर्ट सहित 37 दस्तावेज बने फैसले का आधार
रतलाम के एक न्यायालय ने एक युवक को ज्यादती के मामले में 10 साल की सजा सुनाई है। न्यायालय ने यह अहम् फैसला 45 कार्य दिवस में सुना दिया।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । तृतीय सत्र न्यायाधीश बरखा दिनकर ने ज्यादती के एक मामले में अभियुक्त को 10 साल की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अर्थदंड भी सुनाया है। मामले में 9 गवाहों की गवाही, 37 दस्तावेज तथा डीएनए रिपोर्ट सजा का आधार बनी।
अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी ने बताया कि घटना 28 फरवरी 2024 की है। आरोपी दिलीप पिता पीरचंद (19) निवासी ग्राम बाली थाना सरवन अपने दो दोस्तों बहादुर पिता कैलाश (23) निवासी ग्राम अमरपुरा एवं प्रकाश पिता मोहन (20) निवासी ग्राम जंबूरिया के साथ शाम 6:00 बजे दो अलग-अलग मोटरसाइकिल से शहर के स्टेशन रोड क्षेत्र में शर्मा रेस्टोरेंट के सामने पहुंचे थे। यहां एक लड़की अपनी बहन के बेटे से बात कर रही था। दिलीप ने उस लड़की का हाथ पकड़ लिया और धमकी दी कि चुपचाप मेरे साथ चल वरना जान से खत्म कर दूंगा। दिलीप ने लड़की को जबरदस्ती अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा लिया जबकि उसके दोनों साथियों ने लड़की की बहन के बेटे को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा लिया।
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पीड़िता के भाई को देख भाग निकले आरोपी
इसके बाद आरोपी पीड़िता और उसके भतीजे को पीएनटी कॉलोनी स्थिति एक कमरे में ले गए और दोनों को रातभर रखा। इस दौरान आरोपी ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया जबकि उसके भतीजे को आरोपी के दोस्तों ने दूसरे कमरे में बंद कर के रखा। उधर, लड़की घर नहीं पहुंची तो उसके भाई ने तलाश शुरू की। उसे सुबह पता चला कि उसे कोई जबरदस्ती पीएनटी कॉलोनी उठा ले गया है। इससे वह सुबह करीब 7.00 बजे पीएनटी कॉलोनी जा धमका। लड़की के भाई को वहां पाकर तीनों आरोपी वहां से भाग खड़े हुए।
डीएनए रिपोर्ट थी पॉजिटिव
भाई पीड़िता और भांजे को साथ लेकर स्टेशन रोड पुलिस थाना पहुंचा जहां पीड़िता ने आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवाई। मामले की विवेचना पूरी कर पुलिस ने अप्रैल 2024 में चालान प्रस्तुत किया। इस पर 7 नवंबर 2024 को साक्षी कथन की प्रक्रिया शुरू हुई। कार्रवाई के दौरान 9 गवाहों के बयान हुए। अभियोजन की ओर से डीएनए रिपोर्ट सहित 37 प्रकार के दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। डीएनए की रिपोर्ट धनात्मक होने से आरोपी दिलीप द्वारा पीड़िता के ज्यादती किए जाने की पुष्टि हो गई थी।
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पीड़िता के बयान बने सजा का आधार
प्रकरण तृतीय सत्र न्यायाधीश बरखा दिनकर के न्यायालय में विचाराधीन था। पीड़िता ने आरोपी दिलीप द्वारा जबरदस्ती दुष्कर्म करने की बात कही। इसके चलते न्यायालय ने आरोपी दिलीप को भारतीय दंड संहिता की धारा 366, 376 (2)n, 506 में दोषसिद्ध होने पर 10 वर्ष, 7 वर्ष एवं 3 वर्ष की सजा सुनाई एवं साढ़े तीन हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। सभी सजा साथ-साथ चलेगी। अन्य दो आरोपी बहादुर तथा प्रकाश के विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं होने पर उन्हें दोष मुक्त किया गया। खास बात यह है कि न्यायालय यह फैसला 45 कार्य दिवस में ही सुना दिया। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी ने की।
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