मंगल वाले घर में अमंगल ! सब घर में ढूंढते रहे… नन्हीं काव्या पानी की टंकी में बेसुध मिली, अस्पतालों के चक्कर भी नहीं लौटा सके जान
रतलाम में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। घर में खेल रही 2 साल की काव्या पानी की टंकी में मिली। परिजन अस्पताल-दर-अस्पताल दौड़े, लेकिन उसे नहीं बचाया जा सका। घर में दो दिन पूर्व ही शादी हुई थी।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । तीन दिन पहले जिस घर में शादी की रौनक थी और मंगल गीत गूंज रहे थे, वहीं गुरुवार को सन्नाटा था। 2 साल की नन्हीं काव्या, जो कुछ देर पहले तक खेलते-खेलते घर में दौड़ रही थी, चिड़िया सी चहक रही थी, सब की नजरों से ओझल हो चुकी थी। परिजन ‘काव्या... काव्या...’ कह कर आवाज लगाते रहे, पूरे घर में ढूंढते रले लेकिन वह पानी की टंकी में बेसुध मिली। इसके बाद शुरू हुई एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल की दौड़ लेकिन हर जगह से मायूसी ही मिली, क्योंकि मासूम की आवाज हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी।
यह ‘अमंगल’ हुआ मप्र में रतलाम शहर की मिड टाउन कॉलोनी निवासी रोहन सबरवाल के घर में। यहां 28 अप्रैल को ही तो रोहन के भाई जुगल की शादी का रिसेप्शन हुआ था...
घर में मेहमानों के हंसी-ठहाके गूंज रहे थे, नाच-गाना, रोशनी… सब कुछ खुशी का इज़हार कर रहा था...,
...लेकिन, गुरुवार की सुबह हुआ एक अमंगल इस परिवार की सारी खुशियां छीन ले गया।
सुबह के करीब 11:30 बज रहे थे, सबरवाल की 2 वर्षीय इकलौती बेटी ‘काव्या’ घर में खेल रही थी। छोटी-सी, चंचल- जैसे हर रोज रहती थी। वह अचानक कहीं खो गई, कहीं नजर नहीं आई..., उसकी आवाज भी नहीं सुनाई दी...
पहले लगा कि- यहीं कहीं किसी कमरे में, किसी कोने में होगी... लेकिन जब आवाज लगाने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो घर वालों की बेचैन हो उठे।
दो मंजिले घर में ऊपर-नीचे हर जगह तलाश हुई। हर दरवाजा खोला गया, हर कोना देखा गया।
“काव्या… काव्या…” की आवाजें पहले से ज्यादा तेज हो गईं, लेकिन इस बार भी कोई जवाब नहीं मिला।
फिर एक पल ऐसा आया, जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया।
चाचा जुगल सबरवाल की नजर पोर्च में बनी पानी की टंकी पर पड़ी। उन्होंने जैसे ही अंदर झांका तो होश फाख़्ता हो गए, काव्या वहीं थी… बेसुध।
सब बदहवास हो चुके थे और वक्त भागने लगा।
परिजन नन्हीं परी को गोद में उठाकर दौड़ पड़े..
पहले नेहरू स्टेडियम के सामने निजी अस्पताल पहुंचे, उसके बाद जिला अस्पताल, और फिर एमसीएच…
डॉ. प्रतीक आर्य ने बिटिया की नब्ज़ टटोली, धड़कन जांची लेकिन वे सिर्फ इतना ही कह सके- अब ये नहीं रही।
परिवार को डॉक्टर की बात पर यकीन नहीं हुआ...
इसलिए, ने उसे दूसरे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन... हर जगह एक ही जवाब मिला, कि- बहुत देर हो गई।
करीब 1:30 बजे, परिजन घर लौटे, काव्या उनकी गोद में ही थी लेकिन बेजान, और हमेशा के लिए चुप।
सूचना मिली तो स्टेशन रोड थाने से पुलिस भी घटनास्थल पहुंची, मुआयना भी किया और परिजन से घटना की जानकारी भी ली।
प्राथमिक तौर पर यही सामने आया कि बच्ची खेलते-खेलते टंकी में गिर गई, परिजन ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया, उन्होंने यह पुलिस को भी लिखकर दे दिया।







