ये ‘ड्रीम' नहीं 'डेंजर' वर्ल्ड मेला’ है ! यहां जाने से पहले अपना बीमा जरूर करवा लें; क्योंकि प्रशासन अपने हाल में व्यस्त है, यकीन न हो तो पार्षद से ही जान लें स्थिति
रतलाम के 80 फीट रोड पर लग रहे ‘ड्रीम वर्ल्ड मेले’ को लेकर विवाद गहरा गया है। पार्षद निशा पवन सोमानी ने अनुमति, सुरक्षा, ट्रैफिक और फायर सेफ्टी पर प्रशासन को घेरा है। आशंका है कि कहीं यह 'डेंजर वर्ल्ड मेला' न बन जाए।
80 फीट रोड पर हर दिन हजारों की भीड़, बड़े झूले और बेतरतीब ट्रैफिक… लेकिन सुरक्षा इंतजामों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अगर आप मनोरंजन की उम्मीद में रतलाम के 80 फीट रोड पर लगे ‘ड्रीम वर्ल्ड मेले’ में जा रहे हैं, तो पहले अपना बीमा जरूर करवा लीजिए। ईश्वर न करे कि- यहां अनदेखी, लापरवाही और अव्यवस्थाएं हादसे का कारण न बन जाए और खुशियां चीखों में न बदल जाएं। अगर आपको हमारी बात पर भरोसा न हो तो क्षेत्रीय पार्षद से ही जान लें इस ‘डेंजर वर्ल्ड मेला’ की हकीकत।
80 फीट रोड पर लगा ‘ड्रीम वर्ल्ड मेला’ अब मनोरंजन से ज्यादा संभावित खतरे और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर चर्चा में है। मेले में हर दिन बच्चों से लेकर परिवारों तक की भारी भीड़ उमड़ रही हो, हवा में झूलते बड़े-बड़े झूले, सड़क पर रेंगता ट्रैफिक, फुटपाथों पर कब्जा और बेतरतीब पार्किंग का बोल-बाला है। नजारा ऐसा है मानो यह अव्यवस्थाओं का मेला लगा हो। रविवार को तो स्थिति बेकाबू ही नजर आई। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े आयोजन के बीच जिम्मेदार विभागों की भूमिका कहीं नजर नहीं आ रही।
सुरक्षा इंतजामों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने को भी कोई तैयार नहीं है। लगता है कि प्रशासन ने हमेशा की तरह “कुछ नहीं होगा” वाली मानसिकता के भरोसे हजारों लोगों की जान दांव पर लगा दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कहीं यह ‘ड्रीम वर्ल्ड’ किसी बड़े हादसे का ‘नाइटमेयर’ तो नहीं बनने जा रहा? इससे नगर निगम के कारिंदों की आयोजकों से सांठ-गांठ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसके चलते ही वार्ड क्रमांक 9 की पार्षद निशा पवन सोमानी ने नगर पालिक निगम आयुक्त को पत्र लिखाकर सवालों की झड़ी लगा दी है।
‘ड्रीम वर्ल्ड’ को अनुमति मिली भी है या नहीं?
पार्षद सोमानी ने अपने पत्र में आयुक्त से पूछा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर आयोजित हो रहे ‘ड्रीम वर्ल्ड मेले’ और वहां संचालित व्यवसायिक दुकानों के लिए क्या नगर निगम से विधिवत अनुमति ली गई है? यदि अनुमति दी गई है तो उसकी शर्तें क्या हैं और सुरक्षा जांच किस आधार पर की गई? मेले में बड़े झूले और चकरी संचालित हो रहे हैं, जिन पर हर दिन बड़ी संख्या में बच्चे और युवा सवार हो रहे हैं। लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन झूलों की तकनीकी जांच किस एजेंसी ने की? क्या इनके पास फिटनेस प्रमाणपत्र है? दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव के क्या इंतजाम हैं?
ये भी पढ़ें
कहीं ‘हॉरर शो’ न बन जाए मेला
सबसे गंभीर चिंता आपात स्थिति को लेकर जताई जा रही है। इतनी भारी भीड़ और बिजली से चलने वाले उपकरणों के बीच क्या फायर ब्रिगेड की तैनाती है? क्या मौके पर फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद हैं? क्या पुलिस बल पर्याप्त संख्या में लगाया गया है? यदि इन सवालों के जवाब का भी इंतजार है।
“कुछ हुआ तो जिम्मेदार प्रशासन होगा”
पार्षद निशा पवन सोमानी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मेले में कोई दुर्घटना होती है या यातायात बाधित होने से कोई जनहानि होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन की होगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 23 अप्रैल 2025 को भी इसी मुद्दे को लेकर पत्र लिखा गया था, लेकिन तब भी प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई।
ये भी पढ़ें
सवाल अब मेले पर नहीं, प्रशासनिक संवेदनहीनता पर
80 फीट रोड नगर निगम द्वारा विकसित प्रमुख क्षेत्र माना जाता है, जहां पेवर ब्लॉक और सुव्यवस्थित निर्माण कार्य किए गए हैं। लेकिन अब यही क्षेत्र अव्यवस्था, ट्रैफिक दबाव और संभावित खतरे का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा, या उससे पहले जिम्मेदारी निभाएगा?









