गीता जयंती विशेष : श्रीकृष्ण की वाणी ही, है गीता का ग्रंथ- अज़हर हाशमी

गीता जयंती के अवसर पर गीता की संक्षिप्त व्याख्या यह पद्य रचना आपके लिए है। आप भी पढ़िए और दूसरों को भी पढ़ाइए।

Dec 11, 2024 - 17:47
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गीता जयंती विशेष : श्रीकृष्ण की वाणी ही, है गीता का ग्रंथ- अज़हर हाशमी
गीता जयंती विशेष।

अगहन-शुक्ल-एकादश, तिथि मोक्षदा जान।

कुरुक्षेत्र में उदित हुआ, गीता का दिनमान।।

 

भगवद् गीता दरअसल, कर्म-ज्ञान का गीत।

इसी ग्रंथ में भक्ति का, है पावन संगीत।।

 

बिन फल की चिंता किये, करें सदा सत्कर्म।

आशय यह, सत्कर्म ही, है गीता का मर्म।।

 

श्रीकृष्ण की वाणी ही, है गीता का ग्रंथ।

अठारह अध्यायों में, निहित सत्य का पंथ।।

 

मोह, काम, क्रोध, लालच, दुर्गुण की है खान।

श्रीकृष्ण यह अर्जुन को, देते हैं सज्ञान।।

 

भगवद् गीता ग्रंथ में, निहित सात सौ श्लोक।

पढ़ें, दूर अवसाद हो, मिटे फ़िक्र-दुःख-शोक।।

अज़हर हाशमी

 

(दैनिक हिंदी समाचार पत्र ‘पत्रिका’ से साभार)

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।