बड़ी खबर ! मप्र हाईकोर्ट ने जावरा नगर पालिका अध्यक्ष अनम कड़पा पर लगाया आर्थिक प्रतिबंध, वित्तीय अधिकार का नहीं कर सकेंगी उपयोग
मप्र हाईकोर्ट (MP High Court) ने जावरा नगर पालिका अध्यक्ष पर वित्तीय अधिकारों के उपयोग पर रोक लगा दी है। अन्य नगर परिषद अध्यक्षों पर भी ऐसा ही खतरा मंडरा रहा है।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) कि इंदौर पीठ ने जिले की जावरा नगर पालिका की अध्यक्ष (Jaora Municipal Council President) अनम यूसुफ कड़पा (Anam Yusuf Kadpa) पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया है। न्यायालय ने उनका वित्तीय अधिकार (Financial Powers) शून्य घोषित कर दिया है। इससे पहले प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों के प्रमुखों पर भी रोक लग चुकी है।
जानकारी के अनुसार जावरा की पार्षद रुकमण धाकड़ की ओर से एडवोकेट अमित राज द्वारा मप्र उच्च न्यायालय में एक याचिका क्रमांक WP-9863-2026 दायर की गई थी। इसमें मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य को पार्टी बनाया गया है। इस पर शुक्रवार को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रणय वर्मा ने सुनवाई करते हुए स्वीकार कर लिया है। राज्य शासन की ओर एडवोकेट दृष्टि रावल उपस्थित रहीं। न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद जावरा नगर पालिका अध्यक्ष अनम यूसुफ कड़पा पर वित्तीय अधिकारों का उपयोग करने पर रोक लगा दी है।
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याचिकाकर्ता के अभिभाषक ने यह दिया तर्क
न्यायालय में याचिकाकर्ता के अभिभाषक ने बताया W.P. No.10957/2024 वैसी ही याचिका है जिस पर पूर्व में न्यायालय द्वारा विचार किया जा चुका है और अंतरिम राहत दी गई है। उक्त याचिका में न्यायालय द्वारा संबंधित निकायों के अध्यक्षों पर वित्तीय अधिकारों का उपयोग करने पर रोक लगाई गई है। इसके चलते न्यायालय द्वारा स्पष्ट किया कि RAD द्वारा प्रोसेस फीस के पेमेंट पर रेस्पोंडेंट्स को सात वर्किंग डेज़ के अंदर नोटिस जारी करें। ऐसा न करने पर पिटीशन बेंच को आगे रैफर किए बिना अपने आप खारिज हो जाएगी।
पूर्व से विचाराधीन याचिकाओं के साथ की लिस्ट
न्यायालय ने धाकड़ की याचिका को भी W.P. No.10957 / 2024 के साथ लिस्ट करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने अपने आदेश में बताया कि पूर्व से विचाराधीन याचिका के अनुसार बराबरी बनाए रखने के लिए अंतरिम उपाय के तौर पर यह निर्देश दिया जाता है कि सुनवाई की अगली तारीख तक याचिका में पक्ष क्रमांक नंबर-5 (जावरा नगर पालिका अध्यक्ष अनम यूसुफ कड़पा) अध्यक्ष के पद के लिए अपने वित्तीय अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी। वे वित्तीय अधिकारों का तब तक उपयोग नहीं कर सकेंगी जब तक कि उन्हें नगर पालिका जावरा, जिला रतलाम का चुना हुआ अध्यक्ष घोषित करने वाला नोटिफिकेशन जारी न हो जाए।
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इसलिए शून्य हुए वित्तीय अधिकार
बता दें कि, प्रदेश की कुल 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद हैं। मप्र में वर्ष 2022 और उसके बाद चुनाव हुए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में निकाय चुनाव में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने आनन-फानन में नगर निकाय और पंचायत चुनाव कराए थे। नगर निगमों के चुनाव तो सीधे जनता से कराए गए, किंतु नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष निरवाचित पार्षदों में से चुने गए। निर्वाचन तो हो गए किंतु इसे लेकर नोटिफिकेशन नहीं हुआ। नतीजतन सभी अध्यक्षों की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा। अब जैसे-जैसे शिकायतें हो रही हैं, वैसे-वैसे इनके अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य होते जा रहे हैं। जावरा नगर परिषद अध्यक्ष से पहले पूर्व श्योपुर और पानसेमल नगर परिषद पर वित्तीय अधिकार का उपयोग करने पर रोक लग चुकी है।






