प्रेम विवाह का खौफनाक अंत ! पहले नाराज पत्नी को ढाबे में खाना खिलाया, फिर घोंट दिया गला, 'लास्ट सीन' के आधार पर हुई उम्र कैद
रतलाम में पत्नी शिरीन की हत्या के मामले में कोर्ट ने आरोपी पति उस्मान अब्बासी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 70 कार्य दिवस में आए फैसले में कोर्ट ने ‘लास्ट सीन’ और टेंपो से मिली टूटी चूड़ियों को अहम साक्ष्य माना।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जिला न्यायालय ने पत्नी की हत्या के पति को आजीवन कारावास एवं 5000 के जमाने से दंडित किया है। आरोपी ने युवती से प्रेम विवाह किया था। न्यायालय द्वारा 70 कार्य दिवस में फैसला सुनाया गया। अभियोजन द्वारा 11 गवाहों के कथन एवं 37 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।
अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी ने बताया कि घटना दिनांक 9 फरवरी 2023 की मध्य रात्रि की है। आरोपी उस्मान पिता सुलेमान अब्बासी (25) निवासी मस्जिद के पास बजरंग नगर रतलाम का निकाह वर्ष 2022 में शिरीन पिता यूनुस के साथ हुआ था। शिरीन एवं आरोपी के घर आमने-सामने थे। शादी के बाद शिरीन एवं आरोपी का झगड़ा होता था।
9 फरवरी 2023 को शिरीन का किसी बात को लेकर अपनी सास से झगड़ा हो था। इसकी रिपोर्ट करने शिरीन घर से निकली थी लेकिन व अपनी सहेली के घर चली गई। पति उस्मान उसे ढूंढ रहा था। ढूंढते-ढूंढते उस्मान शिरीन के घर पहुंचा, साथ में शिरीन का भाई भी था। उस्मान लोडिंग टैम्पो चलाता है, वह शिरीन को टैम्पो में लेकर आया। उसने रास्ते में शिरीन के भाई को उतार दिया और पति-पत्नी ढाबे पर भोजन करने चले गए।
भोजन के बाद हुआ विवाद
भोजन के बाद आरोपी एवं शिरीन का सालाखेड़ी के पीछे रोड पर विवाद हो गया। विवाद के दौरान आरोपी उस्मान ने गला दबाकर शिरीन की हत्या कर दी। इसके बाद घर वालों को बताया। शिरीन के शव परीक्षण के दौरान चिकित्सक ने उसकी मौत की वजह दम घुटना बताया। स्टेशन रोड थाने पर आरोपी के विरुद्ध केस दर्ज कर अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
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अंतिम बार साथ में जाना बाना सजा का आधार
न्यायालय तृतीय सत्र न्यायाधीश बरखा दिनकर द्वारा आरोपी उस्मान को भादंवि की धारा 302 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने अपने फैसले में लिखा की अंतिम बार शिरीन आरोपी उस्मान के साथ टैम्पो में गई थी जो कि आरोपी का ही था। टैम्पो से टूटी हुई चूड़ियां भी बरामद की गईं थी। इसे प्रमाणित होता है कि आरोपी ने ही शिरीन की हत्या की। मृतका के माता-पिता को नियमानुसार प्रतिकर प्रदान करने की भी न्यायालय ने अनुशंसा की है। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी द्वारा की गई।
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