स्कूल में यह कैस दर्द ! 11 साल की कोमल को शिक्षिका ने दी ऐसी सजा कि 6 महीनों से उठ नहीं पाई, बचपन थम गया, जिंदगी बिस्तर से बंध गई
रतलाम के जावरा में 11 साल की कोमल कथित पिटाई के बाद 6 महीने से बिस्तर पर। रीढ़ को गंभीर नुकसान, परिवार इलाज और न्याय के लिए संघर्ष कर रहा।
जिस उम्र में बच्चे स्कूल से लौटकर खेलते हैं, उसी उम्र में कोमल बीते छह महीनों से बिस्तर पर है। एक दिन स्कूल गई थी… फिर लौटी तो अपने पैरों पर खड़ी तक नहीं हो सकी। इसके बाद शुरू हुआ अस्पतालों का लंबा सिलसिला- पहले जावरा से इंदौर, फिर इंदौर से भोपाल… और अब भी जिंदगी मानो थम ही गई है...।
यह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, जावरा के इस्लामपुरा के सरकारी स्कूल की 11 वर्षीय एक छात्रा पर गुजरी ऐसी घटना है जिसने न सिर्फ इंसानियत को झकझोर दिया है, वरन् एक 'क्रूर शिक्षक' के चेहरे को भी उजागर कर दिया है। पूरा मामला आप भी पढ़ें...
10 सितंबर 2025 हर दिन जैसा ही दिन था। 11 वर्षीय कोमल अपनी छोटी बहन ज्वाला के साथ स्कूल गई थी। घर में सब सामान्य था।
दोपहर करीब 3.30 तीन बजे दरवाजा खुला… लेकिन इस बार कोमल नहीं, सिर्फ ज्वाला अंदर आई।
वह कांपती आवाज में बोली-
“दीदी को टीचर ने मारा… वो उठ भी नहीं पा रही है…”
ज्वाला की आवाज में एक अजीब सा दर्द था...
एक पल में घर की रफ्तार बदल गई। पिता अमरसिंह और दादी बिना कुछ सोचे स्कूल की ओर दौड़ पड़े।
वहां स्कूल में कक्षा के अंदर का नजारा किसी भी पिता को तोड़ देने के लिए काफी था।
कोमल जमीन पर पड़ी थी। दर्द से कराह रही थी। उठने की कोशिश कर रही थी… लेकिन उसका शरीर साथ नहीं दे रहा था।
साहस जुटाकर कोमल ने परिजन को बताया कि उस पर चप्पल चुराने का आरोप लगाया गया और इसी बात पर शिक्षिका ने बड़ी ही बेरहमी से डंडों से उसकी कमर पर मारा है।
मार ऐसी कि उसके शरीर ने जवाब ही दे दिया।
वक्त रुका नहीं… भागने लगा।
कोमल को उठाकर तुरंत जावरा के अस्पताल ले जाया गया।
वहां से इंदौर… एमवाय अस्पताल…
दिन गुजरते गए, लेकिन हालत में तनिक भी सुधार नहीं हुआ।
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तीन महीने बाद जब उम्मीदें कमजोर पड़ने लगीं, तब डॉक्टरों ने भोपाल एम्स का रास्ता दिखा दिया।
वहां जांच हुई… और जो सामने आया, उसने सब कुछ बदल दिया-
कोमल की नाजुक रीढ़ की हड्डी और स्पाइनल कॉर्ड को गंभीर नुकसान हुआ है। डॉक्टर बोले- ऑपरेशन करना पड़ेगा।
23 जनवरी 2026 को ऑपरेशन हुआ।
डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की… लेकिन एक सच्चाई भी सामने रख दी, कि-
अब चल पाना… बेहद मुश्किल है।
घर लौटने के बाद से अब तक कोमल का हर दिन बिस्तर पर ही गुजर रहा है।
वह उठ नहीं पाती… बैठ भी नहीं पाती…
बस छत को देखते हुए दिन बिता रही है... और परिजन दैवीय चमत्कार की आस में...
इलाज, कर्ज और टूटता परिवार
कोमल के पिता अमरसिंह- दिहाड़ी मजदूर हैं।
हर दिन की कमाई से घर चलता था। यानी रोज कुआं खोदो तब पानी नसीब होता है...
लेकिन इन महीनों में-
अस्पताल, दवाइयां, सफर…
इन सब पर करीब 3 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं।
कर्ज बढ़ता ही जा रहा है… लेकिन बेटी की तकलीफ कम होने का नाम नहीं ले रही।
परिवार वाले कह रहे हैं कि शुरुआत में शिक्षिका ने इलाज का खर्च देने की बात कही थी, लेकिन बाद में उसने साफ मना कर दिया।
परिजन का आरोप है कि- उन्हें जान से खत्म करने की धमकी भी दी गई है।
कार्रवाई की राह अब भी अधूरी
महीनों बाद पुलिस तक बात पहुंची।
जावरा के औद्योगिक क्षेत्र थाने में मामला दर्ज हुआ। कार्रवाई भी चल ही रही है...
लेकिन परिवार को अब तक ऐसा नहीं लगा कि-
इतनी बड़ी घटना के बाद भी कार्रवाई उतनी सख्त नहीं हुई, जितनी होनी चाहिए थी।
इधर, मामला बाल कल्याण समिति से होते हुए बाल अधिकार आयोग तक भी पहुंचा।
26 मार्च 2026 को कलेक्टर को सहायता और कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
फिर भी, जमीन पर बदलाव का इंतजार अब भी बाकी है।
एक घर… जहां अब सन्नाटा रहता है
इस घर में अब सन्नाटा सा है, पहले जैसी आवाजें नहीं आतीं।
कोमल की हंसी… उसकी दौड़… उसकी स्कूल की बातें… सब थम गई हैं।
छोटी बहन ज्वाला भी अब स्कूल जाने से डरती है।
एक घटना ने सिर्फ एक बच्ची नहीं…
पूरे परिवार की जिंदगी रोक दी है।
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घटनाक्रम (एक नजर में)
- 10 सितंबर 2025 : स्कूल में कथित पिटाई, कोमल घायल
- उसी दिन: जावरा अस्पताल में भर्ती
- अगले महीने: इंदौर एमवाय अस्पताल में इलाज
- लगभग 3 महीने बाद: भोपाल एम्स रेफर
- 23 जनवरी 2026: ऑपरेशन
- फरवरी–मार्च: पुलिस में शिकायत
- 26 मार्च 2026: बाल आयोग का पत्र
- वर्तमान: कोमल अब भी बिस्तर पर, इलाज जारी
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