रोंगटे खड़े करने वाली खबर ! 19 वर्षीय युवती ने खुद किया खेत में प्रसव का किया प्रयास, नवजात का सिर-धड़ से हुआ अलग, पॉलीथिन में लेकर अस्पताल पहुंचे परिजन
हरदा में 19 साल की गर्भवती ने खेत में खुद डिलीवरी की कोशिश की, जिससे नवजात का सिर-धड़ अलग हो गया। जानिए पूरी दर्दनाक घटना और डॉक्टरों की चेतावनी।
24 हफ्ते के प्री-मैच्योर शिशु की दर्दनाक मौत; सिर पेट में फंसा रहा, अस्पताल में ऑपरेशन कर निकाला
एसीएन टाइम्स @ हरदा । मध्यप्रदेश के हरदा जिले से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवती द्वारा खेत में खुद ही प्रसव की कोशिश ने एक नवजात की भयावह मौत में बदलकर पूरे इलाके को झकझोर दिया।
घटना हरदा जिले के मांगरूल गांव के पास विष्णु के खेत की है। यहां 19 वर्षीय गर्भवती अंजू पति जितेंद्र के साथ मजदूरी का काम कर रही थी। उसे अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। हालत लगातार बिगड़ती चली गई। युवती ने अस्पताल जाने के बजाय खेत में ही खुद प्रसव करने की कोशिश की तो जो हुआ उसने पूरी इंसानियत को ही हिलाकर रख दिया। प्रसव के दौरान अंजू ने जोर लगाया तो पहले बच्चे के पैर बाहर आए, फिर पूरा धड़, कंतु सिर अंदर ही फंसा रह गया। स्थिति इतनी भयावह थी कि नवजात का सिर और धड़ अलग हो गया। मौके पर मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही स्थिति हाथों से निकल चुकी थी।
पॉलीथिन में रखकर अस्पताल पहुंचे परिजन
चीख-पुकार सुनकर परिजन भी मौके पर पहुंच गए लेकिन नजारा देखकर सभी के होश उड़ गए। घबराहट में उन्होंने नवजात के धड़ को पॉलीथिन की थैली में रखा और अंजू को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में भी सभी हैरान थे। जिला अस्पताल में महिला डॉक्टरों की टीम ने तुरंत ऑपरेशन कर अंजू के पेट में फंसे बच्चे के सिर को बाहर निकाला गया। बच्चा 24 सप्ताह का प्री-मैच्योर था। फिलहाल अंजू की हालत स्थिर है, वह इस घटना से गहरे सदमे में है।
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पहले भी झेल चुकी ऐसी त्रासदी
बता दें कि अंजू और जितेंद्र की शादी को महज 3 साल ही हुए हैं। इस दौरान यह अंजू की दूसरी प्री-मैच्योर डिलीवरी थी। जुलाई 2025 में भी उसने 7 महीने में बच्ची को जन्म दिया था, जिसे डेढ़ महीने तक NICU में रखना पड़ा था। घर लाने के कुछ समय बाद ही बच्ची की मौत हो गई थी।
लापरवाही पड़ी भारी
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन चौधरी का कहना है कि युवती ने खुद बताया कि बच्चे के पैर बाहर आने पर उसने खींचने की कोशिश की, जिससे यह स्थिति बनी। डॉ. गंभीर पटेल के अनुसार पहली प्री-मैच्योर डिलीवरी के बाद नियमित जांच और संस्थागत प्रसव बेहद जरूरी होता है। इसकी अनदेखी जानलेवा साबित हुई।
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