जमीन के लिए बहाया खून ! पहली पत्नी के रिश्तेदारों ने दूसरी पत्नी के परिवार पर तलवार से किया हमला, सिर फूटा, हड्डियां टूटी, पांच दोषी करार
रतलाम में 14 बीघा जमीन के विवाद में पहली पत्नी के रिश्तेदारों द्वारा दूसरी पत्नी के परिवार पर किए गए जानलेवा हमले के मामले में पांच आरोपी दोषसिद्ध हुए। नरसींग के सिर में तलवार से वार कर गंभीर चोट पहुंचाई गई थी।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जमीन विवाद में एक व्यक्ति की पहली पत्नी के रिश्तेदारों ने दूसरी पत्नी के परिवार पर तलवार, लोहे के सरियों और लाठियों से जानलेवा हमला करने के मामले में न्यायालय ने 5 लोगों को दोषी ठहराया है। करीब सात साल पुराने इस मामले में सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने अभियुक्तों को सजा सुनाई।
प्रकरण में शासन की ओर से पैरवीकर्ता अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि घटना 23 अक्टूबर 2019 को सुबह करीब 5:00 से 5:30 बजे ग्राम कुड़ीपाड़ा, थाना बिलपांक में हुई थी। भूमि विवाद को लेकर पांचों आरोपी एकत्र होकर धूलीबाई के घर के बाहर पहुंचे और उसकी बेटी सुभद्रा तथा दामाद नरसिंग के साथ तलवार, लोहे के सरिये और लाठियों से मारपीट की।
आरोपी बाबू भाभर ने तलवार से नरसिंग के सिर पर वार किया, जबकि अन्य आरोपियों ने लोहे के सरियों और लाठियों से दोनों घायलों के शरीर के विभिन्न हिस्सों पर चोटें पहुंचाईं। धूलीबाई जब उन्हें बचाने के लिए आई तो आरोपियों ने उसके साथ भी मारपीट की। घटना के दौरान आरोपियों ने जमीन नहीं देने की बात को लेकर जान से मारने की धमकी भी दी।
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डायल 100 वाहन से अस्पताल पहुंचाया
हमले में घायल सुभद्रा और नरसिंग को डायल 100 नंबर की गाड़ी से उपचार के लिए जिला अस्पताल रतलाम ले जाया गया। घटना की सूचना बिलपांक थाने को दी गई। पुलिस अस्पताल पहुंची और धूलीबाई की सूचना पर रिपोर्ट दर्ज की। नरसिंग के सिर में गंभीर चोट होने के कारण उसे सिविल हॉस्पिटल अहमदाबाद रैफर किया गया। वहां उसके सिर का ऑपरेशन किया गया और सिर से ट्यूमर निकाला गया।
पुलिस ने घटनास्थल से खून लगा हुआ टॉवेल और गोदड़ी जब्त की। आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उनके कब्जे से तलवार और लोहे के सरिये सहित घटना में प्रयुक्त हथियार जब्त किए गए। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
14 बीघा जमीन को लेकर था विवाद
अभियोजन के अनुसार घटना की वजह सोना के नाम की 14 बीघा जमीन को लेकर चल रहा विवाद था। फरियादी धूलीबाई के पति सोना ने दो विवाह किए थे। धूलीबाई उनकी दूसरी पत्नी थी, जबकि पांचों आरोपी पहली पत्नी लीलाबाई के रिश्तेदार थे। जमीन को हांकने और बोने को लेकर दोनों पक्षों में विवाद चल रहा था। इसी विवाद को लेकर आरोपियों द्वारा जमीन नहीं देने की बात पर जान से मारने की धमकी दी गई और हमला किया गया।
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चिकित्सकीय साक्ष्य से गंभीर चोटें प्रमाणित
मामले में प्रस्तुत चिकित्सकीय साक्ष्यों के माध्यम से नरसिंग के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें प्रमाणित हुईं। उसके पैर की हड्डियों में फ्रैक्चर भी पाया गया। चिकित्सकीय विशेषज्ञ के अनुसार नरसिंग के सिर में लगी गंभीर चोट के कारण उसके मस्तिष्क में बड़ा हेमरेज हुआ था। इसके लिए उसका उपचार और ऑपरेशन किया गया। वहीं सुभद्रा के हाथ में भी फ्रैक्चर पाया गया।
न्यायालय ने फरियादी धूलीबाई, घायल नरसिंग, घायल सुभद्रा तथा प्रत्यक्षदर्शी संध्या डोडियार के साक्ष्य को विश्वसनीय माना। न्यायालय के अनुसार आरोपियों द्वारा घायलों के साथ मारपीट करने तथा नरसिंग को पहुंचाई गई चोटों के संबंध में प्रस्तुत साक्ष्य विश्वसनीय हैं और चिकित्सकीय साक्ष्य से भी समर्थित हैं।
एफएसएल रिपोर्ट ने भी अभियोजन के मामले को मजबूती दी
मामले में जब्त हथियारों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी अभियोजन के पक्ष में महत्वपूर्ण माना गया। आरोपियों के कब्जे से लाठियां, लोहे का सरिया और तलवार जब्त की गई थी। आरोपी बाबू भाभर से जब्त टी-शर्ट, घायल नरसींग से जब्त बनियान तथा घटनास्थल से जब्त कपड़ों और टॉवेल को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए एफएसएल भेजा गया था। एफएसएल रिपोर्ट में बाबू भाभर से जब्त टी-शर्ट, घायल नरसिंग से जब्त बनियान तथा घटनास्थल से जब्त कपड़ों और टॉवेल पर मानव रक्त पाया गया।
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तलवार और सरिया घातक हथियार की श्रेणी में
न्यायालय ने पाया कि पांचों आरोपियों ने एक साथ मिलकर घायलों के साथ मारपीट की तथा घातक हथियारों का प्रयोग किया। न्यायालय के अनुसार घटना में प्रयुक्त तलवार और लोहे का सरिया घातक हथियारों की श्रेणी में आते हैं। आरोपी बाबू भाभर के कब्जे से जब्त तलवार जांच में प्रतिबंधित आकार-प्रकार की पाई गई। उसके संबंध में कोई वैध लाइसेंस भी प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय ने इस आधार पर बाबू भाभर के विरुद्ध आयुध अधिनियम के तहत अपराध भी सिद्ध माना।
इन पांच आरोपियों को किया दोषसिद्ध
- बाबू पिता गिरधारी भाभर, उम्र 55 वर्ष, निवासी लोचीतारा, जिला रतलाम।
- नानालाल उर्फ नानजी पिता वागुजी देवदा, उम्र 45 वर्ष, निवासी झरखेड़ी।
- चम्पालाल पिता नानुराम भूरिया, उम्र 45 वर्ष, निवासी कुड़ीपाड़ा, जिला रतलाम।
- राधेश्याम पिता नानुराम भूरिया, उम्र 36 वर्ष, निवासी कुड़ीपाड़ा।
- देवराम पिता नगजी मईड़ा, उम्र 63 वर्ष, निवासी झरखेड़ी।
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