स्कूल में ऑनलाइन हाजिरी का खेल पड़ा भारी, एक शिक्षिका की वेतनवृद्धि रोकी, दूसरी निलंबित
रतलाम जिले में शिक्षा विभाग ने दो शिक्षिकाओं पर कार्रवाई की है। पिपलौदा की वर्षा राठौर की एक वेतनवृद्धि रोकी गई, जबकि आलोट की समीना मुलतानी को कर्तव्य में लापरवाही पर निलंबित किया गया।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी और कर्तव्य के प्रति लापरवाही को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। रतलाम जिले में सामने आए दो अलग-अलग मामलों में विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक शिक्षिका की आगामी वेतनवृद्धि रोक दी, जबकि दूसरी प्राथमिक शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
पिपलौदा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक विद्यालय बोरतलाई की प्राथमिक शिक्षक एवं प्रभारी प्रधान अध्यापक वर्षा राठौर के खिलाफ जनविश्वास अभियान के तहत शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की जांच के दौरान उनके विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होने की बात सामने आई। इसके बावजूद हमारे शिक्षक एप के माध्यम से उनकी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही थी।
मामले में विभाग ने संबंधित शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा। प्रस्तुत जवाब को जांच के बाद संतोषजनक नहीं माना गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत लघुशास्ति की कार्रवाई करते हुए वर्षा राठौर की आगामी एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने के आदेश दिए हैं।
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आलोट में लापरवाही पर सीधे निलंबन
दूसरी कार्रवाई आलोट विकासखंड में की गई है। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आलोट संकुल के शासकीय प्राथमिक विद्यालय (ईजीएस) भोईखेड़ा की प्राथमिक शिक्षक समीना मुलतानी को कर्तव्य के निर्वहन में उदासीनता एवं लापरवाही बरतने के मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई में म.प्र. आचरण संहिता 1965 के नियम 3 (क), (स) तथा म.प्र. सिविल सेवा वर्गीकरण नियम 1966 के नियम 9 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में समीना मुलतानी को नियमानुसार निलंबन भत्ता मिलेगा। उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय आलोट निर्धारित किया गया है।
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शिकायत से कार्रवाई तक पहुंचा मामला
दोनों मामलों में कार्रवाई का संदेश साफ है कि स्कूलों में उपस्थिति, कर्तव्य निर्वहन और शासकीय जिम्मेदारियों में लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। खासतौर पर वर्षा राठौर के मामले में शिकायत के बाद जांच में ऑनलाइन उपस्थिति और वास्तविक उपस्थिति के बीच अंतर सामने आना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। जनविश्वास अभियान के तहत मिली शिकायत के बाद हुई कार्रवाई से यह भी संकेत मिला है कि शिकायतों की जांच के बाद जिम्मेदार पाए जाने वाले कर्मचारियों पर विभाग कार्रवाई करने के मूड में है।
एक मामले में वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई हुई है, तो दूसरे में सीधे निलंबन। ऐसे में शिक्षा विभाग की इन कार्रवाइयों को जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्त कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
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