बड़ा मुद्दा ! DJ की तेज आवाज से पार्षद नासिर कुरैशी की मौत के बाद उठे सवाल, पर्यावरणविद् डॉ. खुशालसिंह पुरोहित ने कलेक्टर से की सख्त कार्रवाई की मांग
पार्षद नासिर कुरैशी की मौत के बाद डीजे की तेज आवाज पर सवाल, पर्यावरणविद् डॉ. खुशालसिंह पुरोहित ने कलेक्टर से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की।
26 अगस्त की घटना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय अभिलेखों की जांच से जिम्मेदारी तय करने की मांग; डीजे, लाउडस्पीकर और ध्वनि-वर्धक यंत्रों के लिए अनुमति, समय-सीमा व ध्वनि-सीमा का कड़ाई से पालन कराने का आग्रह
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में धार्मिक जुलूस के दौरान डीजे की अत्यधिक तेज आवाज के चलते कांग्रेस पार्षद नासिर कुरैशी की मौत की घटना के बाद ध्वनि प्रदूषण और इसके नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस मामले में पर्यावरणविद् एवं मासिक पर्यावरण डायजेस्ट के संपादक डॉ. खुशालसिंह पुरोहित ने कलेक्टर अजय कटेसरिया को पत्र लिखकर घटना की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उन्होंने ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों के प्रभावी पालन के लिए आवश्यक कार्रवाई की भी आवश्यकता जताई है।
डॉ. पुरोहित ने अपने पत्र में कहा है कि 26 अगस्त 2026 को रतलाम जिले में डीजे की अत्यधिक तेज आवाज के दौरान पार्षद नासिर कुरैशी की मृत्यु की घटना अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक है। उनके अनुसार यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है। अत्यधिक ध्वनि केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, विशेषकर हृदय एवं अन्य संवेदनशील रोगों से प्रभावित व्यक्तियों, बुजुर्गों, बच्चों तथा अस्पतालों में उपचाररत मरीजों के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकती है। ऐसे में डीजे और अन्य ध्वनि-वर्धक उपकरणों के संबंध में निर्धारित नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।
मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच की मांग
डॉ. पुरोहित ने कलेक्टर से मांग की है कि 26 अगस्त की घटना में संबंधित व्यक्ति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय अभिलेख एवं मृत्यु के परिस्थितिजन्य तथ्यों की विस्तृत जांच कराई जाए। इसके माध्यम से यह निर्धारित किया जाए कि अत्यधिक ध्वनि से उत्पन्न तनाव एवं अन्य संबंधित परिस्थितियों की घटना में क्या भूमिका रही तथा इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित डीजे कार्यक्रम के आयोजक द्वारा लिखित अनुमति प्राप्त की गई थी या नहीं, इसकी जांच होना चाहिए। यदि अनुमति ली गई थी तो उसमें निर्धारित सभी शर्तों एवं समय-सीमा का पालन हुआ अथवा नहीं, इसका भी परीक्षण किया जाना चाहिए।
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डीजे सिस्टम की क्षमता और स्पीकर की दिशा की भी हो जांच
पर्यावरणविद् डॉ. पुरोहित ने पत्र में कार्यक्रम स्थल पर उस समय के ध्वनि-स्तर (dB(A)), डीजे सिस्टम की क्षमता, स्पीकरों की संख्या तथा उनकी दिशा से संबंधित उपलब्ध जानकारी और रिकॉर्ड की जांच करने की मांग की है। इसके साथ ही घटना से संबंधित मोबाइल वीडियो, CCTV फुटेज एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता भी बताई गई है, ताकि जांच के दौरान वास्तविक परिस्थितियों का आकलन किया जा सके।
उन्होंने संबंधित थाना पुलिस, जिला प्रशासन तथा मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के अधिकारियों से संयुक्त जांच कराने और घटना से संबंधित उपलब्ध ध्वनि प्रदूषण संबंधी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि MPPCB के पास ध्वनि प्रदूषण की निगरानी और Noise Rules के क्रियान्वयन के लिए संबंधित व्यवस्था मौजूद है।
रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध
डॉ. पुरोहित ने Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि Rule 5 के अनुसार लाउडस्पीकर अथवा Public Address System के उपयोग के लिए सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति आवश्यक है। सामान्य परिस्थितियों में रात्रि 10 से प्रातः 6 बजे तक लाउडस्पीकर, ध्वनि-वर्धक यंत्र अथवा अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों के उपयोग पर प्रतिबंध है।
नियमों की अनुसूची में विभिन्न क्षेत्रों के लिए अधिकतम अनुमेय ध्वनि-स्तर भी निर्धारित किए गए हैं। आवासीय क्षेत्र में दिन के समय 55 dB(A) Leq और रात के समय 45 dB(A) Leq की सीमा निर्धारित है। Noise Pollution Rules के Rule 7 के तहत निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि अथवा रात्रिकालीन प्रतिबंधों के उल्लंघन की शिकायत मिलने पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई की जानी अपेक्षित है।
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अस्पताल, स्कूल और शांत क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की मांग
डॉ. पुरोहित ने विशेष रूप से अस्पताल, विद्यालय, न्यायालय तथा अन्य संवेदनशील एवं शांत क्षेत्रों के आसपास ध्वनि प्रदूषण की निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि Noise Rules में ऐसे क्षेत्रों को Silence Zone के रूप में निर्धारित करने का प्रावधान है। उनका कहना है कि इन स्थानों के आसपास डीजे, लाउडस्पीकर एवं अन्य ध्वनि-वर्धक उपकरणों के उपयोग पर विशेष निगरानी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
नियम तोड़ने पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग
डॉ. पुरोहित ने मांग की है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि डीजे संचालक अथवा आयोजक ने निर्धारित ध्वनि-सीमा, समय-सीमा अथवा अनुमति की शर्तों का उल्लंघन किया है, तो Noise Pollution Rules, Environment (Protection) Act तथा अन्य लागू कानूनों के तहत नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि केवल मौजूदा घटना में कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी स्थायी एवं प्रभावी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है।
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जिले में 24x7 शिकायत और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था बनाने का सुझाव
पत्र में डॉ. पुरोहित ने भविष्य में रतलाम जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में डीजे, लाउडस्पीकर एवं ध्वनि-वर्धक यंत्रों के उपयोग के लिए पूर्व अनुमति, निर्धारित ध्वनि-सीमा और समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। इसके लिए आवश्यक नियामक व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया गया है।
उन्होंने जिले में 24x7 शिकायत एवं त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था स्थापित करने का भी सुझाव दिया है। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाने की मांग की गई है, ताकि अत्यधिक तेज डीजे अथवा लाउडस्पीकर की शिकायत तत्काल दर्ज हो सके।
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तत्काल संज्ञान लेकर भविष्य की घटनाएं रोकने की अपील
डॉ. पुरोहित ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि 26 अगस्त की घटना का तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक पहल शीघ्र की जाए। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि अत्यधिक तेज ध्वनि से जुड़ी घटनाओं को केवल असुविधा या मनोरंजन से जुड़े विषय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इनके स्वास्थ्य संबंधी संभावित गंभीर प्रभावों को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक एवं नियामक स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
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