TET के विरोध में शिक्षकों ने किया उपवास, फॉर्म नहीं भरने की शपथ भी ली, अनिवार्यता खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

TET की अनिवार्यता सहित विभिन्न मांगों को लेकर आजाद अध्यापक शिक्षक संघ ने रतलाम में जिला बैठक आयोजित कर सामूहिक उपवास किया। मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।

TET के विरोध में शिक्षकों ने किया उपवास, फॉर्म नहीं भरने की शपथ भी ली, अनिवार्यता खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार आशीष उपाध्याय को सौंपते आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के पदाधिकारी एवं उपस्थित शिक्षक।

अव्यवहारिक ई-अटेंडेंस का विरोध, क्रमोन्नत व समयमान वेतनमान, पुरानी पेंशन और पदोन्नति-क्रमोन्नति सहित विभिन्न मांगों को लेकर आजाद अध्यापक शिक्षक संघ ने उठाई आवाज

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । आजाद अध्यापक शिक्षक संघ रतलाम द्वारा शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर रविवार को जिला स्तरीय बैठक आयोजित कर सामूहिक उपवास किया गया। इस दौरान शिक्षकों ने TET के आवेदन नहीं भरने की शपथ भी ली। TET की अनिवार्यता खत्म करने के लिए संघ द्वारा मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार आशीष उपाध्याय को सौंपा गया। ज्ञापन का वाचन वीणा जोशी ने किया।

संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग के साथ ही हड़ताल अवधि (सितंबर 2022) का वेतन भुगतान करने, अध्यापक शिक्षक संवर्ग को उनकी प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना करते हुए पेंशन, ग्रेज्युटी और अवकाशों के नगदीकरण का लाभ प्रदान करने की भी मांग की गई। ज्ञापन देने से पूर्व गुलाब चक्कर में हुई बैठक को संबोधित करते हुए संभागाध्यक्ष प्रकाश शुक्ला ने बताया कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को लेकर विरोध है। कई शिक्षक तत्कालीन नियुक्ति प्रक्रिया के तहत निर्धारित मापदंड पूरे करने के बाद नियुक्त हुए हैं। इनमें कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने वर्ष 2005 और 2008 में व्यापमं द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET उत्तीर्ण की थी। जब एक बार शिक्षक ने TET परीक्षा उत्तीर्ण कर ली तो उससे दूसरी बार TET परीक्षा देने की क्या आवश्यकता है।

जिलाध्यक्ष सुनील कुमार गौंड ने कहा कि जब तमिलनाडु की सरकार विधायकसभा में TET परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में प्रस्ताव पास कर के केंद्र सरकार के पास भेज सकती है तो इसी प्रकार मध्यप्रदेश की सरकार को भी अपने 1.5 लाख शिक्षकों के हित में मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्ताव पास कर के केंद्र सरकार के पास भेजना चाहिए।

फांसी पर चढ़ने के लिए खुद रस्सी और जल्लाद लाओ

आनंद चावला व राजेश जोशी ने संबोधित करते हुए कहा कि यदि हम TET के लिए फार्म ही नहीं भरेंगे तो सरकार परीक्षा किसकी लेगी। इसलिए हमें किसी भी स्थिति में TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के लिए आवेदन नहीं भरना है। हरनीस सिंह सोलंकी ने कहा कि यह अजीब बात है कि जिस व्यक्ति को फांसी दी जानी है, उसी से कहा जा रहा है कि आप ही फाँसी के फंदे के लिए रस्सी खरीदकर लाओ, आप ही जल्लाद की व्यवस्था करो। परीक्षा भी शिक्षक दे, उसकी फीस भी शिक्षक भरे जबकि परीक्षा शिक्षक की इच्छा के विरुद्ध सरकार ले।

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TET की अनिवार्यता का विरोध करने वाले संघ को मिलेगा सहयोग

कार्यकारी जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह भाटी ने कहा कि आप सभी आगामी समय में भोपाल में आयोजित होने वाले जंगी प्रदर्शन में तन-मन-धन से सहयोग करना पड़ेगा। सभा में यह भी निर्णय लिया गया है कि भविष्य में TET की अनिवार्यता के विरोध में जो भी संघ संगठन ईमानदारी से भोपाल में संघर्ष करेगा उसको पूरी ताकत के साथ सहयोग किया जाएगा। बैठक में उपस्थित शिक्षकों ने सामूहिक उपवास किया। इस दौरान शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों के निराकरण की मांग को लेकर अपनी बात रखी।

इन विषयों पर भी हुई बात

बैठक में TET की अनिवार्यता खत्म करने के अलावा समयमान-वेतनमान का लाभ देने, वेतन का भुगतान समय पर करने, परिवीक्षा अवधि पूरी कर चुके सभी शिक्षकों का अविलंब नियमितीकरण कर उन्हें 100 प्रतिशत वेतन का लाभ देने, पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने, नियमानुसार समयावधि पूरी करने वाले सभी शिक्षकों को पदोन्नति-क्रमोन्नति का लाभ देने सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

पदाधिकारियों ने कहा कि लंबित मांगों पर चर्चा करते हुए उनके निराकरण के लिए संगठन स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने सभी शिक्षकों से एकजुट रहकर संघर्ष के लिए सदैव तैयार रहने का आह्वान किया। संचालन संघ के जिला सचिव राजेश स्वर्णकार ने किया।

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ये उपस्थित रहे

सभा और ज्ञापन देने के दौरान लगभग 250 शिक्षक साथी उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख अशोक दड़िंग, सादिक खान, दिनेश सोनी, दिनेश परमार, प्रकाश वर्मा, जितेन्द्र शर्मा, अर्जुन राठौर, तेजू डोडियार, रामकरण कनेरिया, विजय डोडियार, युगलकिशोर पाल, अल्पना यादव, रेबेका मैसी, कन्हैयालाल पाटीदार, परमानंद मकवाना, हरिराम जाटवा, मुकेश परमार, जावेद अब्बासी, रमेश उपाध्याय, धर्मेंद्र शर्मा, मनीष द्विवेदी आदि शिक्षक शामिल रहे।

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