परिवार संस्कारों की पहली पाठशाला ! गणेश पंडालों में दिलाया कुटुंब प्रबोधन का संकल्प, परिवार में संवाद और संस्कार पर दिया जोर
रतलाम के गणेश उत्सव पंडालों में कुटुंब प्रबोधन अभियान के तहत परिवार में संवाद, संस्कार, अनुशासन और साथ समय बिताने का संदेश दिया गया। सप्ताह में एक दिन कुटुंब सभा और मोबाइल-टीवी से दूरी का आह्वान किया गया।
सप्ताह में एक दिन कुटुंब सभा, साथ बैठकर भोजन और मोबाइल-टीवी से दूरी का आह्वान
एसीएन टाइम्स @ रतलाम। सकल हिंदू समाज गणेश उत्सव समिति की 11 दिवसीय कार्ययोजना के तहत रतलाम नगर के विभिन्न गणेश उत्सव पंडालों में कुटुंब प्रबोधन अभियान चलाया गया। गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं और नागरिकों के बीच परिवार के महत्व, आपसी संवाद, संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया। इस दौरान परिवार को सुदृढ़ बनाने के लिए नागरिकों को सामूहिक रूप से संकल्प भी दिलाया गया।
अभियान में भारतीय पारिवारिक व्यवस्था और संस्कारों को केंद्र में रखते हुए कहा गया कि परिवार केवल एक साथ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि संस्कार और मानवीय मूल्यों की पहली पाठशाला है। पर्यावरण संरक्षण, नागरिक अनुशासन, स्वदेशी, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभावना जैसे मूल्यों की नींव भी परिवार में ही पड़ती है।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में परिवार के सदस्यों के बीच आपसी संवाद और साथ बिताया जाने वाला समय लगातार कम हो रहा है। इसका असर पारिवारिक संबंधों और बच्चों के संस्कारों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में परिवार के सदस्य नियमित रूप से साथ बैठें, आपस में संवाद करें, भोजन साथ करें और बच्चों के साथ समय बिताएं, तो पारिवारिक वातावरण को अधिक सकारात्मक और संस्कारित बनाया जा सकता है।
ये भी पढ़ें
सप्ताह में एक दिन हो कुटुंब सभा
कुटुंब प्रबोधन अभियान के तहत परिवारों से सप्ताह में कम से कम एक दिन कुटुंब सभा आयोजित करने का आह्वान किया गया। इस दौरान सभी सदस्य साथ बैठकर सकारात्मक संवाद करें और सहभोज करें। परिवार के साथ समय बिताते समय मोबाइल और टीवी से दूरी रखने तथा आमने-सामने बातचीत को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।
बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए दादा-दादी एवं नाना-नानी से कथा-कहानियां सुनने की परंपरा को बढ़ावा देने की बात कही गई। साथ ही बच्चों में बड़ों के सम्मान, समय-पालन और पारिवारिक अनुशासन की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
संस्कारों के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
अभियान में परिवारों को जीव-दया, दान, नियमित व्यायाम और प्राणायाम, ईश्वर स्मरण तथा राष्ट्रीय पर्वों में सहभागिता के लिए भी प्रेरित किया गया। घर में सकारात्मक और संस्कारित वातावरण बनाने के साथ ही परिवार के सदस्यों को भोजन के समय मोबाइल फोन और टीवी का उपयोग नहीं करने तथा एक-दूसरे से संवाद को प्राथमिकता देने का संदेश दिया गया।
कुटुंब प्रबोधन अभियान में “अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्” के भाव को भी सामने रखा गया। इसके माध्यम से परिवार से लेकर समाज तक आपसी सद्भाव और व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
समिति के अनुसार, सुदृढ़ परिवार ही सुदृढ़ समाज की आधारशिला है। गणेश उत्सव के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ परिवार, संस्कार, सामाजिक समरसता, अनुशासन और राष्ट्रभावना से जुड़े विषयों को लोगों तक पहुंचाने का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
ये भी पढ़ें





