सपना, संघर्ष और सफलता ! पिता गांव-गांव फेरी लगाते रहे, बेटी पूजा ने रतलाम के मेडिकल कॉलेज में हासिल कर ली MBBS सीट
खाचरौद की पूजा चौहान ने NEET में सफलता के बाद रतलाम के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में MBBS सीट हासिल की। पिता राजू चौहान गांव-गांव फेरी लगाकर परिवार और बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाते रहे।
अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट एक वर्ष की NEET की तैयारी ने खोल दिया सपनों की उड़ान के लिए पूरा आकाश
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । कुछ सपने सुविधाओं के बीच पूरे होते हैं और कुछ सपनों को पूरा करने के लिए परिवार वर्षों तक संघर्ष करता है। ऐसे ही संघर्ष और संकल्प की कहानी है उज्जैन जिले के खाचरौद की पूजा चौहान की, जिसने NEET में सफलता हासिल कर रतलाम के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (Government Medical College-GMC) में MBBS की सीट प्राप्त की है। पूजा की इस उपलब्धि के पीछे जहां उसकी कड़ी मेहनत है, वहीं उसके पिता राजू चौहान का वह संघर्ष भी है, जो वर्षों से परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों की पढ़ाई का सहारा बना हुआ है।
राजू चौहान मोटरसाइकिल पर सामान लादकर गांव-गांव फेरी लगाते हैं। परिवार की जरूरतें पूरी करने और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए उनकी दिनचर्या वर्षों से इसी मेहनत के इर्द-गिर्द घूमती रही है। सुबह के 5 बजे, जब अधिकतर लोग अपने घरों में नींद में होते हैं, राजू चौहान अपनी मोटरसाइकिल पर सामान लादकर फेरी के लिए निकल पड़ते हैं। गांवों की गलियों में घूमकर सामान बेचते हैं और उससे होने वाली कमाई से परिवार का खर्च चलाने के साथ बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी निभाते हैं। उनकी मेहनत के पीछे एक सपना हमेशा रहा- बच्चे पढ़ें और जीवन में उनसे बेहतर मुकाम हासिल करें।
पिता की सुबह गांवों की गलियों से शुरू होती रही, तो बेटी की सुबह किताबों के साथ। पूजा ने खाचरौद के मॉडल स्कूल से 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उसने डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए Abhyas Career Institute, Ratlam में एक वर्ष NEET की तैयारी की।
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आसान नहीं थी परिस्थितियां
परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन पूजा ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। सीमित संसाधनों के बीच उसने नियमित अध्ययन, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयास को अपनी तैयारी का आधार बनाया। पिता जिस तरह रोज अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए घर से निकलते थे, उसी तरह पूजा भी अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ती रही। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई। पूजा ने NEET में सफलता हासिल की और अब GMC Ratlam में MBBS में प्रवेश प्राप्त कर लिया है। डॉक्टर बनने का उसका सपना अब मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई के साथ एक नई मंजिल की ओर बढ़ चुका है।
मेहनत ने पहुंचा दिया सफेद कोट के सपने के करीब
पूजा की यह उपलब्धि उसके लिए जितनी बड़ी है, उतनी ही यह उसके पिता राजू चौहान के वर्षों के संघर्ष की भी जीत है। जिस पिता ने मोटरसाइकिल पर सामान लादकर गांव-गांव फेरी लगाई, उसी पिता की बेटी अब मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बनने की पढ़ाई करेगी। जिस मेहनत की कमाई से कभी उसकी किताबें खरीदी गईं, फीस भरी गई और पढ़ाई का खर्च उठाया गया, उसी मेहनत ने आज पूजा को सफेद कोट के सपने के करीब पहुंचा दिया है। पूजा ने अपने पिता के संघर्ष को केवल देखा नहीं, बल्कि उसे अपनी प्रेरणा बनाया। राजू चौहान ने अपनी मेहनत से बेटी की पढ़ाई के लिए रास्ता तैयार किया और पूजा ने उस मेहनत को अपनी लगन और सफलता से सम्मान दिया।
यह कहानी उन विद्यार्थियों के लिए भी संदेश है, जो सुविधाओं और संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मान लेते हैं। संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सपनों की उड़ान सीमित नहीं होती। लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और परिवार का विश्वास साथ हो, तो कठिन परिस्थितियां भी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता रोक नहीं सकतीं।
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इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर ने घर पहुंच कर किया सम्मान
एक तरफ पिता की मोटरसाइकिल गांव-गांव घूमती रही और दूसरी तरफ बेटी की किताबें उसे डॉक्टर बनने की मंजिल की ओर ले जाती रहीं। आज दोनों की मेहनत एक मुकाम पर आकर मिल गई है। राजू चौहान के संघर्ष ने पूजा के सपनों को सहारा दिया और पूजा की मेहनत ने उस संघर्ष को एक नई पहचान दी। अब खाचरौद की यही बेटी GMC Ratlam में MBBS की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने की राह पर है। अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमार कुमावत ने घर पहुंच कर पूजा और उनके परिजन का सम्मान किया।
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