जिला अभिभाषक संघ के उपाध्यक्ष सुनील जैन का हृदयाघात से निधन, अंतिम संस्कार आज, अभिभाषक संघ अध्यक्ष शर्मा ने अपूर्णनीय क्षति बताया
वरिष्ठ अभिभाषक एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुनील जैन का हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया। अंतिम यात्रा सोमवार शाम 4 बजे राजीव नगर से निकलेगी।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर के वरिष्ठ अभिभाषक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जिला अभिभाषक संघ के उपाध्यक्ष सुनील जैन का सोमवार देर रात हृदयाघात से निधन हो गया। उनके निधन की खबर से जिला अभिभाषक संघ सहित सामाजिक क्षेत्र, विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों, मित्रों और परिजन में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा सोमवार अपराह्न 4 बजे उनके निवास स्थान राजीव नगर, कस्तूरबा नगर से निकालेगी। अंतिम संस्कार जवाहर नगर मुक्तिधाम पर होगा।
60 वर्षीय सुनील जैन, स्व. ईश्वरचंद जैन के सुपुत्र, दिलीप कुमार (दूरदर्शन) के भाई, श्रेयांश एडवोकेट), सुरभि के काका, पद्मेश, पुलकित (तहसीलदार) के पिता, सुमित कुमार (दुबई) के काका ससुर एवं राहुल कुमार भोपाल) के ससुर थे। परिजन ने बताया रात करीब 1.00 बजे पत्नी लघुशंका जाने के लिए उठीं तब जैन को बेसुध पाया। उनके दोनों हाथ उनके सीने से चिपके हुए थे। उन्होंने जैन को सीधा किया लेकिन अचेत देख वे घबरा गईं। उन्होंने तत्काल डॉक्टर को कॉल किया। डॉक्टर ने घर पहुंच कर परीक्षण किया लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
अभिभाषकों और संगठनों ने जताया शोक
सुनील जैन लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे और विभिन्न संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। वे जिला बॉडीबिल्डिंग एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भी रहे। वर्तमान में वे जिला अभिभाषक संघ के उपाध्यक्ष थे। लायंस क्लब से जुड़े होकर वे वे करीब 15 साल तक ब्लाइंड हेल्पिंग स्कूल के चेयरमैन रहे। उन्होंने लायंस क्लब के अनेक पदों पर रहते हुए सामाजिक एवं संस्थागत गतिविधियों में सक्रिय रहे। यही वजह रही कि विभिन्न क्षेत्रों में उनका व्यापक परिचय और सम्मान था। उनके आकस्मिक निधन पर साथी अभिभाषकों के साथ ही सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।
जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने जैन से निधन को अपूर्णनीय क्षति बताया है। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता के रतलाम आगमन पर आयोजित सम्मान समारोह में जैन ने शामिल हुए थे। तब किसी ने नहीं सोचा था कि जैन इस तरह हमें छोड़कर चले जाएंगे। शर्मा ने बताया कि जैन जाते-जाते भी अपने नेत्र दान कर दो लोगों के लिए आंखों की रोशनी दे गए। जैन अपने व्यवहार, कार्यों के चलते हमेशा याद स्मृतियों में रहेंगे।





