गुरु संत या शिक्षक नहीं, एक अलौकिक शक्ति है, वह शाश्वत ब्रह्म है, उसमें सद और असद का कोई भेद नहीं- पारस सकलेचा

रतलाम के युवाम सभागृह में गुरु पूर्णिमा समारोह आयोजित हुआ। पूर्व विधायक एवं युवाम के संस्थापक संचालक पारस सकलेचा ने कहा कि गुरु संत या शिक्षक नहीं, बल्कि व्यक्ति का पुनर्निर्माण करने वाली अलौकिक शक्ति है।

गुरु संत या शिक्षक नहीं, एक अलौकिक शक्ति है, वह शाश्वत ब्रह्म है, उसमें सद और असद का कोई भेद नहीं- पारस सकलेचा
गुरु की महिमा बताते युवाम के संस्थापक एवं पूर्व विधायक पारस सकलेचा।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर युवाम सभागृह में आयोजित समारोह में पूर्व विधायक एवं युवाम के संस्थापक संचालक पारस सकलेचा ने गुरु की महत्ता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु कोई संत या शिक्षक मात्र नहीं, बल्कि एक अलौकिक शक्ति है, जो व्यक्ति को उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराकर उसके व्यक्तित्व का पुनर्निर्माण करती है।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर युवाम सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व विधायक एवं युवाम के संस्थापक संचालक पारस सकलेचा ने कहा कि "गुरु जहां आप खड़े हैं, वहीं से आपको आपकी स्वयं की दूरी बता देता है और उस तक पहुंचने का मार्ग भी दिखाता है।" उन्होंने कहा कि गुरु किसी एक स्वरूप तक सीमित नहीं होता। वह चींटी, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, बहती नदी, चलती हवा या प्रकृति के किसी भी रूप में जीवन को दिशा देने वाली अलौकिक शक्ति हो सकता है।

'सद्गुरु और असद्गुरु जैसे शब्द गढ़कर गुरु शब्द की गरिमा कम करने का किया प्रयास'

पारस सकलेचा ने कहा कि आज की मायावी दुनिया ने 'सद्गुरु' और 'असद्गुरु' जैसे शब्द गढ़कर गुरु शब्द की गरिमा को कम करने का प्रयास किया है। उनके अनुसार, "गुरु शाश्वत ब्रह्म है, उसमें सद और असद का कोई भेद नहीं होता।" उन्होंने कहा कि गुरु मीठी बातें करने वाला व्यक्ति नहीं होता। गुरु ऐसी छड़ी है जिसकी चोट दिखाई नहीं देती, लेकिन उसका प्रभाव जीवनभर बना रहता है। गुरु सबसे पहले व्यक्ति के अहंकार और उसके वर्तमान स्वरूप को समाप्त करता है, फिर उसे उस रूप में गढ़ता है जैसा उसे वास्तव में होना चाहिए।

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पारस सकलेचा ऊर्जावान और प्रेरणादायी गुरु

कार्यक्रम की शुरुआत गुरु संत हिरदाराम जी के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद युवाम के विद्यार्थियों ने पारस सकलेचा का शॉल, श्रीफल एवं माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। विद्यार्थियों की ओर से शिवम राठौड़ ने कहा कि उन्हें पारस सकलेचा के रूप में एक ऊर्जावान और प्रेरणादायी गुरु मिले हैं। उन्होंने कहा कि पारस दादा गणित और तर्कशक्ति का ऐसा समन्वय प्रस्तुत करते हैं, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को बेहतर इंसान बनने की दिशा देता है।

इस अवसर पर सुमित पोरवाल और हर्ष उपाध्याय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अविष्का तिवारी एवं गुंजन सोनी ने गुरुवंदना प्रस्तुत की, जबकि हर्षित और अंश ने गुरु महिमा का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया। संचालन सागर से आए विनम्र तिवारी ने किया। महिदपुर से आए सैय्यद फ़ैज़ ने आभार व्यक्त किया।

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