गीता से लेकर गुड गवर्नेंस तक... जानिए रतलाम के नए कलेक्टर अजय कटेसरिया की सोच और कार्यशैली के बार में
रतलाम के नए कलेक्टर आईएएस अजय कटेसरिया की सोच, कार्यशैली, प्रशासनिक सफर, शिक्षा, पसंद-नापसंद और युवाओं के लिए उनके सफलता के मंत्र जानिए। गीता, अनुशासन, सही संगत और जनसेवा को वे प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत मानते हैं।
बिजनेस छोड़कर बने IAS, मोबाइल से दूरी, अनुशासन, सही संगत और ज्ञान को मानते हैं सफलता का आधार; खाना बनाने और आम लोगों के बीच रहने का भी है शौक
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम जिले में नए कलेक्टर के रूप में ऐसे आईएएस अधिकारी की पदस्थापना हुई है, जिनकी पहचान केवल एक प्रशासक के रूप में नहीं, बल्कि अनुशासित जीवनशैली, सरल स्वभाव और स्पष्ट सोच वाले अधिकारी के रूप में भी रही है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अजय कटेसरिया के लिए प्रशासन में सबसे महत्वपूर्ण है ईमानदारी से काम करना है, तो जीवन में सफलता का आधार सही ज्ञान, अनुशासन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति है। श्रीमद्भगवद्गीता को आदर्श मानने वाले कटेसरिया युवाओं को भी इसे पढ़ने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि यदि पूरी गीता पढ़ना संभव न हो तो बी.आर. चोपड़ा की 'महाभारत' के 72 से 74वें एपिसोड भी जीवन की दिशा तय करने में मददगार हो सकते हैं।
झारखंड के धनबाद के झरिया के मूलनिवासी कटेसरिया का जीवन संघर्षों से होकर गुजरा है। एक व्यवसायिक परिवार में जन्मे अजय कटेसरिया की प्रारंभिक शिक्षा झरिया के ही लिटिल फ्लावर स्कूल में हुई। हायर सेकंडरी भी धनबाद से ही की जबकि स्नातक की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय में हुई। पिता के असमय निधन के बाद उन्हें पारिवारिक कारोबार संभालना पड़ा। आईएएस बनने की कोई पूर्व योजना नहीं थी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क, विशेषकर बोकारो के तत्कालीन डीआईजी अनुराग गुप्ता से मिली प्रेरणा ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। बाद में उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और पहले ही प्रयास में सफल भी हो गए।
काम से समझौता नहीं, सार्वजनिक जवाबदेही सबसे बड़ी जिम्मेदारी
कटेसरिया का मानना है कि काम हर क्षेत्र में करना पड़ता है, लेकिन आईएएस अधिकारी बनने के बाद हर निर्णय सार्वजनिक निगरानी में होता है। मीडिया, कानून और आम जनता की अपेक्षाओं के बीच पारदर्शी तरीके से काम करना ही प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए वे काम को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात करते हैं।
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युवाओं के लिए विजन : गीता पढ़ो, मोबाइल कम चलाओ, सही लोगों के साथ रहो
एक साक्षात्कार के मुताबिक युवाओं के लिए उनका संदेश स्पष्ट है। उनका मानना है कि आज की सबसे बड़ी चुनौती स्मार्टफोन नहीं, बल्कि उससे घटता ध्यान (अटेंशन स्पैन) है। वे स्वयं भी प्रतिदिन कुछ समय मोबाइल से दूर रहने का प्रयास करते हैं। उनका कहना है कि इंटरनेट पर ज्ञान बहुत है, लेकिन सही और गलत जानकारी की पहचान करना सबसे जरूरी है। यही कारण है कि वे युवाओं को फालतू जानकारी से बचने, गंभीर लोगों की संगत चुनने और गीता जैसे ग्रंथों से जीवन की दिशा लेने की सलाह देते हैं।
UPSC ही सब कुछ नहीं
कटेसरिया प्रतियोगी परीक्षाओं को जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं मानते। उनका कहना है कि उनके कई साथी यूपीएससी में सफल नहीं हुए, लेकिन बाद में न्यायपालिका, व्यवसाय, राजनीति और पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उनके अनुसार ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता और मेहनत का लाभ किसी न किसी रूप में अवश्य मिलता है।
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नई शिक्षा नीति और बच्चों की शिक्षा में विशेष रुचि
कटेसरिया की रुचि केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं है। महिला एवं बाल विकास विभाग में पदस्थ रहते हुए उनकी रुचि का क्षेत्र नई शिक्षा नीति के तहत प्रारंभिक बाल शिक्षा (अर्ली चाइल्ड एजुकेशन) के लिए अध्ययन सामग्री और मॉडल विकसित करना रहा। यानी उनकी इस रुचि और प्राथमिकता का लाभ रतलाम में भी शिक्षा और बाल विकास के क्षेत्र में मिले।
कटेसरिया यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनी समिति में भी शामिल रहे। वे समिति में सेक्रेटरी के तौर में शामिल रहे।
सादगी उनकी पहचान
राजधानी सूत्रों की मानें तो कटेसरिया कम प्रोटोकॉल पसंद करने वाला अधिकारी हैं। उन्हें परिवार के साथ सामान्य लोगों की तरह बाइक से घूमना, स्थानीय बाजारों में जाना और स्ट्रीट फूड का आनंद लेना पसंद हैं। उन्हें खाना बनाने का भी शौक है। बताया जाता है कि सतना में जिला कलेक्टर रहने के दौरान भी वे सप्ताह में एक दिन स्वयं भोजन बनाने का प्रयास करते थे।
संगीत में उनकी पसंद भी काफी व्यापक है। शास्त्रीय संगीत से लेकर रॉक, जैज़, हिंदी, अंग्रेजी और भोजपुरी गीत तक उनकी पसंद में शामिल हैं। हालांकि व्यस्त प्रशासनिक जीवन के कारण अब इसके लिए पहले जैसा समय नहीं मिल पाता।
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छोटे शहरों के युवाओं पर भरोसा
कटेसरिया स्वयं छोटे शहर से निकलकर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा तक पहुंचे हैं। उनका मानना है कि छोटे शहरों के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल आत्मविश्वास, मेहनत और बड़े सपने देखने की है। वे युवाओं से अपने शहर की सीमाओं से बाहर निकलकर दुनिया को देखने और नए अवसरों का लाभ उठाने के पैरोकार हैं। उनका विश्वास है कि कठिन परिस्थितियां ही व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और छोटे शहरों के युवाओं में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की पूरी क्षमता होती है।
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IAS अजय कटेसरिया : एक नजर में
- पूरा नाम : अजय कटेसरिया
- मूल निवास : झरिया, धनबाद (झारखंड)
- पारिवारिक पृष्ठभूमि : व्यवसायिक (बिजनेस फैमिली)।
- स्कूली शिक्षा : धनबाद।
- उच्च शिक्षा : दिल्ली यूनिवर्सिटी।
- IAS बनने की प्रेरणा : तत्कालीन बोकारो डीआईजी अनुराग गुप्ता से।
- UPSC में सफलता : पहले ही प्रयास में चयन।
- वैवाहिक स्थिति : अंतर्जातीय प्रेम विवाह।
- परिवार : पत्नी और एक बेटी।
- जीवन दर्शन : काम को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता देने में विश्वास।
- युवाओं को सलाह : श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ें या बी.आर. चोपड़ा की महाभारत के 72-74वें एपिसोड देखें।
- मोबाइल को लेकर सोच : रोज कुछ समय मोबाइल से दूर रहने की कोशिश करते हैं।
- सफलता का मंत्र : सही संगत चुनें और भ्रामक ज्ञान से बचें।
- UPSC पर राय : यह जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं, सफलता के कई रास्ते हैं।
- टीवी देखने की आदत : बहुत कम टीवी देखते हैं।
- पसंदीदा टीवी धारावाहिक : महाभारत और चंद्रकांता।
- देखी हुई वेब सीरीज : द रिंग्स ऑफ पावर और कोटा फैक्ट्री।
- संगीत में पसंद : शास्त्रीय, रॉक, जैज़, हिंदी, अंग्रेजी और भोजपुरी संगीत।
- क्या मिस करते हैं : संगीत को
- पसंदीदा अभिनेता : रणवीर सिंह।
- पसंदीदा अभिनेत्री : कोई नहीं।
- पसंदीदा खानपान : धनबाद का स्ट्रीट फूड, चाट और गुपचुप।
- धनबाद की पसंदीदा चाट : बैंक मोड़ की राजेंद्र चाट।
- पसंदीदा रेस्टोरेंट : खालसा और अपना ढाबा।
- पसंदीदा डिश : पनीर बटर मसाला और तड़का दाल।
- खास शौक : सप्ताह में एक दिन डिनर बनाना, परिवार के साथ बाइक पर घूमना और स्ट्रीट फूड का आनंद लेना।
कहां-कहां पदस्थ रहे
- असिस्टेंट कलेक्टर, होशंगाबाद।
- एसडीओ (राजस्व), मुरैना।
- मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, टीकमगढ़।
- सचिवालय, भोपाल में राजस्व विभाग।
- मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, अशोकनगर।
- कलेक्टर, सतना।
- सचिवालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, भोपाल।
- नई पोस्टिंग- कलेक्टर, रतलाम।





