मजहब से ऊपर उठी इंसानियत ! डूबते 15 वर्षीय आदम के लिए देवदूत बने हिन्दू युवक, अपनी जान जोखिम में डाल बचाई जान
आष्टा के खेड़ापति कमल तालाब में डूब रहे 15 वर्षीय आदम को हिन्दू युवकों ने तालाब में कूदकर बचाया। रोज़ा होने के कारण साथी नहीं कूद पाए थे, युवकों ने CPR देकर अस्पताल पहुंचाया।
एसीएन टाइम्स @ इंदौर । किसी ने सही कहा है कि- खून का रंग एक है, और दर्द की कोई ज़ुबान नहीं होती और न ही उसका कोई धर्म होता है और न ही मजहब। आष्टा के हिन्दू युवाओं ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। नवरात्रि की तैयारी कर रहे युवाओं ने ईद से पहले एक मां की गोद सूनी होने से बचा ली।
जब जाति, धर्म, संप्रदाय, ऊंच, नीच, अमीर और गरीब जैसे भेद रूपी दीवारें ऊंची होती जा रही हों तब कुछ घटनाएं सोती मानवीय संवेदनाओं को जगाने का प्रयास कर जाती हैं। मप्र के आष्टा में हुई एक घटना इसकी बानगी है। मामला नवरात्रि के पहले दिन और ईद से दो दिन पूर्व का है। इस दिन आष्टा के खेड़ापति कमल तालाब के पास स्थित मंदिर में कुछ लोग नवरात्रि पर माताकी स्थापना के लिए सफाई कर रहे थे। दोपहर के करीब 12.00 बजे तालाब के घाट पर बच्चों के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर सफाई कर रहे युवक घाट की ओर दौड़े। घाट पर मुस्लिम समाज के 6-7 किशोर चिल्ला रहे थे, उन्होंने बताया कि उनका एक साथी 15 वर्षीय आदम पानी में डूब रहा है। यह भी बताया कि उनका रोज़ा है, इसलिए वे पानी में नहीं कूद सके।
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गहरे पानी में मिला किशोर
यह देख मंदिर से वहां पहुंचे हिन्दू युवकों में शामिल फूल बेचने वाले विशाल, लालू और एक अन्य युवक तालाब में कूद पड़े। लालू ने दो बार डुबकी लगाई लेकिन उसे आदम कहीं नहीं मिला। तालाब ज्यादा गहरा होने से वह खाली हाथ ही बाहर आ गया। हालांकि, युवकों ने हिम्मत नहीं हारी और और गहराई में जाने का प्रयास किया तो सफलता मिल गई। वहां आदम मिल गया जिसके शरीर में युवकों ने रस्सी डाली और एक हाथ लालू के हाथ में पकड़ा कर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लाए।
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नाक से खून और मुंह से निकल रहा था झाग
युवक आदम को तालाब से बाहर निकला कर लाए तो उसकी नाक से खून निकल रहा था और मुंह से झाग। उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। इससे युवक उसे सीपीआर (मुंह से श्वास) नहीं दे पा रहे थे। उन्होंने बिना देर लगाए आदम को अस्पताल ले जाना उचित समझा और दोपहिया वाहन से टीएमसी अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने बताया कि किशोर को भर्ती करना पड़ेगा। अतः हिन्दू युवकों ने ही उसके भर्ती कराने के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए।
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इंदौर रैफर करना पड़ा
दो पहिया वाहन से अस्पताल पहुंचाने के दौरान पूरे समय युवक आदम की पंपिंग भी करते रहे थे। चूंकि उसके फेफड़ों में बहुत पानी भर चुका था, शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह भी बाधित हो रहा था, इसलिए चिकित्सकों ने पहले अस्पताल में ही प्रारंभिक उपचार किया। इसके बाद उसे इंदौर रैफर कर दिया। आदम को तालाब से निकाल कर अस्पताल पहुंचने वाले सभी युवकों ने आद्य शक्ति माता से शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है।





