इंदौर में असफल – रतलाम में मिली सही दिशा ! छोटे से गांव मखला का बेटा रचेगा इतिहास, NEET में 531 अंक लाने वाला गांव का पहला MBBS डॉक्टर बनेगा

नागदा के समीप मखला गांव के जयवर्धन सिंह राठौड़ ने री-NEET 2026 में 531 अंक हासिल कर गांव का पहला MBBS डॉक्टर बनने का गौरव प्राप्त किया। एक बार असफल होने के बाद सही मार्गदर्शन और मेहनत से उन्होंने सफलता की नई कहानी लिखी।

इंदौर में असफल – रतलाम में मिली सही दिशा ! छोटे से गांव मखला का बेटा रचेगा इतिहास, NEET में 531 अंक लाने वाला गांव का पहला MBBS डॉक्टर बनेगा
नीट में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले जयवर्धन सिंह राटौड़ और उनका परिवार अभ्यास करियर इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत के साथ।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सफलता केवल बड़े शहरों की सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही मार्गदर्शन, अनुशासित मेहनत और अटूट आत्मविश्वास से हासिल की जाती है। इस बात को नागदा के समीप स्थित छोटे से गांव मखला के निवासी जयवर्धन सिंह राठौड़ ने साबित कर दिखाया है। करीब 500 की आबादी वाले इस गांव के जयवर्धन ने री-NEET 2026 में 531 अंक प्राप्त कर न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वह अपने गांव के पहले विद्यार्थी हैं, जो अब MBBS की पढ़ाई करेंगे।

जयवर्धन के पिता जीवन सिंह राठौड़ ने बताया कि बेटे का सपना डॉक्टर बनने का था। 12वीं के बाद बेहतर तैयारी के लिए उन्हें इंदौर के एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान में भेजा गया, लेकिन वहां अपेक्षित मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण NEET-2025 में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इस असफलता से उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित हुआ।

परिवार ने इसके बाद बड़े शहरों के बजाय ऐसे संस्थान की तलाश शुरू की, जहां परिणाम के साथ गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन भी मिले। इसी दौरान जयवर्धन ने रतलाम की विभिन्न कोचिंग संस्थाओं का भ्रमण किया। डेमो कक्षाओं के बाद उन्होंने रतलाम के ही अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट में प्रवेश लिया। यहां उन्होंने पूरे एक वर्ष तक अनुशासित वातावरण में नियमित अध्ययन किया। शिक्षकों के मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी, जिसका परिणाम री-NEET परीक्षा में देखने को मिला।

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पहली परीक्षा निरस्त होने से टूटा मनोबल, फिर भी नहीं छोड़ा सपना

3 मई को आयोजित पहली NEET परीक्षा में उनका प्रदर्शन संतोषजनक रहा था, लेकिन परीक्षा निरस्त होने की घटना ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया। उन्हें लगा कि कहीं डॉक्टर बनने का सपना अधूरा न रह जाए।

इसी दौरान अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने जयवर्धन को निराश न होने और पूरे आत्मविश्वास के साथ री-NEET की तैयारी जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

री-NEET में शानदार प्रदर्शन, 531 अंक हासिल

21 जून को आयोजित री-NEET परीक्षा के बाद ही जयवर्धन को अपने प्रदर्शन पर भरोसा था। परिणाम घोषित होने पर उन्होंने 531 अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और लगातार मेहनत किसी भी असफलता को सफलता में बदल सकती है।

परिणाम घोषित होने के बाद मखला गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। जयवर्धन के बड़े पिताजी ने बताया कि वह गांव के पहले विद्यार्थी हैं, जो MBBS की पढ़ाई करने जा रहे हैं। उनकी उपलब्धि पूरे गांव के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है।

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मंजिल मेहनत और मार्गदर्शन से मिलती है- डॉ. कुमावत

अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने कहा कि विद्यार्थी की सफलता उसके शहर से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से तय होती है। जयवर्धन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि छोटे गांवों के विद्यार्थी भी बड़े सपनों को साकार कर सकते हैं।

जयवर्धन सिंह राठौड़ की सफलता आज उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो एक असफलता के बाद अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि सही दिशा, धैर्य और निरंतर प्रयास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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