अफसर हो तो ऐसा ! 21 साल की सेवा, 25 तबादले, 29 अफसरों ने की शिकायत... फिर भी नहीं रुका इस IAS अफसर का अभियान, हाईकोर्ट तक में मारा छापा
21 साल की सेवा में 25 तबादले झेल चुके एक सख्त अधिकारी के खिलाफ विभाग के ही 29 अधिकारियों-कर्मचारियों ने शिकायत कर दी लेकिन उसका अभियान नहीं रुका। सख्ती ऐसी कि अफसर ने हाईकोर्ट तक को नहीं छोड़ा। पढ़िए- नेतागिरी और रसूख की परवाह नहीं करने वाले एक IAS अधिकारी की पूरी कहानी ।
मिलावट, फूड माफिया और रसूखदार संस्थानों पर लगातार कार्रवाई से मचा हड़कंप, नेताओं से लेकर कर्मचारियों तक के विरोध के बीच भी सख्त रुख कायम
एसीएन टाइम्स @ मुंबई । भ्रष्टाचार, मिलावटखोरी और प्रभावशाली लोगों के दबाव के आगे झुकने के बजाय लगातार कार्रवाई करने वाले एक आईएएस अधिकारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। महज 21 साल के प्रशासनिक करियर में 25 बार तबादला झेल चुके इस अधिकारी के खिलाफ अब उनके ही विभाग के 29 अधिकारियों और कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। शिकायत सीधे कैबिनेट मंत्री तक पहुंची है, लेकिन उनके अभियान को पूर्व केंद्रीय मंत्री समेत कई सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन भी मिल रहा है।
यह पूरा विवाद महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा चलाए जा रहे अभियान से जुड़ा है, जिसमें मिलावटी खाद्य पदार्थों, बिना लाइसेंस चल रहे प्रतिष्ठानों और स्वच्छता नियमों की अनदेखी करने वालों पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई का दायरा छोटे कारोबारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े होटल, क्लब और चर्चित संस्थान भी इसकी जद में आए हैं। यह सब हो रहा है सिंघम कहे जाने वाले विभाग के आयुक्त आईएएस तुकाराम मुंढे के कारण।
विरोध छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्थित FDA प्रयोगशाला से शुरू हुआ। प्रयोगशाला के 29 अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभागीय मंत्री नरहरी झिरवाल को शिकायत भेजकर आईएएस मुंढे की कार्यशैली पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रयोगशालाओं में दो शिफ्ट में काम कराया जा रहा है। शनिवार, रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि विभाग में कई पद रिक्त होने के कारण पहले से ही काम का दबाव अधिक है। ऐसे में अतिरिक्त कार्यभार से जांच की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
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ढाई महीने में ही मचा दिया हड़कंप
आईएएस तुकाराम मुंढे ने 25 मई 2026 को महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त का पद संभाला था। पदभार ग्रहण करने के बाद से ही उन्होंने खाद्य सुरक्षा कानूनों के पालन को लेकर व्यापक अभियान शुरू कर दिया। उनकी अगुवाई में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
फैसले जिससे चर्चा में आए मुंढे
- स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लागू कराया।
- बिना लाइसेंस चल रहे होटल, रेस्टोरेंट और क्लबों पर कार्रवाई तेज की।
- गंदगी मिलने पर कई बड़े और वीआईपी प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस निलंबित किए।
- नकली दूध, संदिग्ध पनीर और मिलावटी खाद्य तेल के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाया।
- मिलावटखोरों को केवल जुर्माने तक सीमित नहीं रखते हुए गिरफ्तारी की चेतावनी भी दी।
- सॉफ्ट ड्रिंक्स, कोला, चिप्स, चॉकलेट और अन्य प्रोसेस्ड फूड की बिक्री रोकने की कार्रवाई।
हाईकोर्ट की कैंटीन भी नहीं बची
सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निरीक्षण अभियान के दौरान हाईकोर्ट परिसर की कैंटीन तक जांच के दायरे में आ गई। बताया जा रहा है कि मुंबई हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की थी कि किसी होटल में केवल दो छोटे कॉकरोच मिलने के आधार पर फूड लाइसेंस निलंबित करना व्यवहारिक दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता। अदालत ने एफडीए को संतुलित और व्यावहारिक रवैया अपनाने की सलाह दी थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार न्यायालय ने उन्हें निजी होटलों और संस्थानों के साथ ही सरकारी संस्थानों पर भी कार्रवाई के लिए कहा। इसके बाद मुंढे ने हाईकोर्ट की ही कैंटीन पर धावा बोल दिया। मुंबई महानगरपालिका (BMC) की कैंटीन पर भी कार्रवाई की।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुईं
शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय निरुपम ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई का तरीका अत्यधिक कठोर है। उनके अनुसार, किसी प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित करने से पहले नोटिस देकर सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। यदि नियमों का पालन न हो, तब लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने अभियान की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय है और इस दिशा में चल रहे अभियान को पूरा समर्थन मिलना चाहिए। अभिनेत्री काजल अग्रवाल भी सार्वजनिक रूप से इस अभियान के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं।
25 तबादलों के बावजूद नहीं बदला अंदाज
तुकाराम मुंढे अपनी सख्त प्रशासनिक शैली के कारण लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। 21 वर्षों की सेवा में 25 बार तबादला उनके प्रशासनिक जीवन की सबसे चर्चित विशेषताओं में से एक है। इसके बावजूद वे जहां भी पदस्थ हुए, वहां नियमों के पालन और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अपने रुख से पीछे नहीं हटे। यही वजह है कि समर्थक उन्हें "सिंघम" अधिकारी कहते हैं, जबकि विरोधियों के निशाने पर भी वे लगातार बने रहते हैं।
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तुकाराम मुंढे : एक संक्षिप्त परिचय
तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव के एक किसान परिवार में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा जिला परिषद स्कूल से प्राप्त करने के बाद उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, छत्रपति संभाजीनगर से इतिहास में स्नातक तथा राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। UPSC-2005 में अखिल भारतीय 20वीं रैंक हासिल कर वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में आए।
प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने धरणी में प्रोजेक्ट ऑफिसर, नांदेड़ में सहायक कलेक्टर, नागपुर जिला परिषद के सीईओ, जालना और सोलापुर के कलेक्टर, नवी मुंबई और नागपुर नगर निगम के आयुक्त तथा पीएमपीएमएल के प्रबंध निदेशक सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। सोलापुर में जल संरक्षण कार्यों के लिए उन्हें 'वॉटर मैन' के नाम से पहचान मिली।
नागपुर में गैरहाजिर शिक्षकों और डॉक्टरों पर कार्रवाई, जालना में वर्षों से अटकी पेयजल परियोजना को पूरा कराना, पंढरपुर वारी में 3,000 शौचालयों की व्यवस्था और नवी मुंबई में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जैसी पहलें उनके प्रशासनिक रिकॉर्ड का हिस्सा रही हैं। इसी कार्यशैली के कारण वे देश के सबसे चर्चित और सख्त आईएएस अधिकारियों में गिने जाते हैं।
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