12 साल पुराने यास्मीन शेरानी शूटआउट केस में बड़ा फैसला ! फायरिंग करने वाले वैभव बैरागी और साथी चंदन शर्मा को 10-10 साल की सजा, दो आरोपी बरी

रतलाम में कांग्रेस नेत्री यास्मीन शैरानी पर 2014 में हुई जानलेवा फायरिंग के बहुचर्चित मामले में जिला न्यायालय का बड़ा फैसला। मुख्य आरोपी वैभव बैरागी और चंदन शर्मा को 10-10 वर्ष की सजा, तरुण सांकला को 3 वर्ष का कारावास, जबकि दो आरोपी बरी।

12 साल पुराने यास्मीन शेरानी शूटआउट केस में बड़ा फैसला ! फायरिंग करने वाले वैभव बैरागी और साथी चंदन शर्मा को 10-10 साल की सजा, दो आरोपी बरी
यास्मीन शेरानी पर 12 साल पूर्व हुए जानलेवा हमले के मामले में तीन आरोपियों को सजा।

2014 में नगर निगम परिसर के बाहर कांग्रेस नेत्री पर हुई थी जानलेवा फायरिंग, बेटे शाहिर शैरानी हत्याकांड में सजा दिलाने के शक में रची गई थी साजिश

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । करीब 12 वर्ष पहले कांग्रेस नेत्री एवं तत्कालीन पार्षद यास्मीन शेरानी पर दिनदहाड़े हुई जानलेवा फायरिंग के बहुचर्चित मामले में शनिवार को जिला न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया। फैसला सप्तम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने सुनाया। न्यायालय ने मुख्य आरोपी वैभव बैरागी और उसके सहयोगी चंदन शर्मा को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास जबकि तरुण सांकला को आर्म्स एक्ट में तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। मामले में अनुराग लोखंडे और हरिओम मारू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।

अभियोजन के अनुसार 27 सितंबर 2014 को दोपहर करीब 12:45 बजे तत्कालीन कांग्रेस पार्षद यास्मीन शेरानी नगर निगम कार्यालय से बाहर निकल रही थीं। इसी दौरान मुंह पर कपड़ा बांधे एक हमलावर ने उन पर पिस्टल से फायर कर दिया। गोली लगने से शैरानी गंभीर रूप से घायल हो गईं। फायरिंग के तुरंत बाद आरोपी निगम परिसर से बाहर भागा, जहां उसका साथी पहले से मोटरसाइकिल स्टार्ट कर इंतजार कर रहा था। दोनों आरोपी बाइक से फरार हो गए।

11 माह की जांच के बाद हुआ था खुलासा

घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। लगभग 11 माह तक चली विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने इस सनसनीखेज हमले का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी वैभव पिता ओमदास बैरागी को उज्जैन से जबकि, चंदन पिता महेश शर्मा, तरुण पिता संजय सांकला, अनुराग लोखंडे और हरिओम मारू को रतलाम में अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध जिला न्यायालय में चालान पेश किया था। मामले का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को तत्कालीन आईजी वी. मधुकुमार ने 30 हजार रुपए के नकद पुरस्कार की घोषणा भी की थी।

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अदालत ने किसे कितनी सजा सुनाई

अदालत ने फायरिंग करने वाले मुख्य आरोपी वैभव बैरागी को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 27(1) के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर क्रमशः 6 माह और 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

सह-आरोपी चंदन शर्मा को धारा 307 सहपठित धारा 34 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उसे 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

वहीं तरुण सांकला को आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 2 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अदालत ने मामले में आरोपी बनाए गए अनुराग लोखंडे और हरिओम मारू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक सौरभ सक्सेना ने तथा लोखंडे एवं एडवोकेट राकेश शर्मा ने की।

शाहीर की हत्या से जुड़ा था हमले का मकसद

अभियोजन के अनुसार इस हमले की पृष्ठभूमि वर्ष 2013 के शहीर पिता दबीर शेरानी हत्याकांड से जुड़ी थी। 15 अप्रैल 2013 को जावरा रोड स्थित एसएसआईटी कॉलेज के पास बीकॉम के छात्र शाहिर शैरानी (18) की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में वैभव बैरागी भी आरोपी था।

पुलिस जांच में सामने आया कि वैभव को संदेह था कि यास्मीन शेरानी शहीर हत्याकांड में उसे सजा दिलाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही हैं। जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद उसने अपने साथी चंदन शर्मा के साथ मिलकर शेरानी की हत्या की साजिश रची। साजिश के तहत वैभव ने फायरिंग की थी, जबकि चंदन मोटरसाइकिल लेकर मौके पर इंतजार करता रहा और वारदात के बाद दोनों फरार हो गए थे।

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हमले के बाद हुआ था कपिल राठौड़ हत्याकांड, लगा था कर्फ्यू

रतलाम बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट राकेश शर्मा ने बताया कि हमलावरों ने यास्मीन शेरानी पर दो गोलियां चलाई थीं। इसमें से एक गोली उनके गले (गर्दन) पर लगी थी। उन्हें गंभीर हालत में प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत इंदौर रैफर कर दिया गया था जहां उनका इलाज बॉम्बे हॉस्पिटल में चला था। शर्मा के अनुसार इस गोलीकांड के ठीक दो घंटे बाद (दोपहर लगभग 2:20 बजे) शहर के रोडवेज बस स्टैंड इलाके में कपिल राठौड़ हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। इस घटना के बाद पूरे शहर में सांप्रदायिक तनाव भड़क गया और प्रशासन को अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा था।

उज्जैन में बना लिया था ठिकाना

जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि वैभव बैरागी ने दूसरे समाज की युवती से प्रेम विवाह किया था। शाहिर हत्याकांड में नाम आने और अन्य परिस्थितियों के चलते वह रतलाम में नहीं रहना चाहता था, इसलिए उसने अपना ठिकाना उज्जैन में बना लिया था।

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