मन मालिक बन गया और हम गुलाम बन गए, संसार और मोक्ष दोनों का स्वामी मन है- आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी

रतलाम में चातुर्मास के लिए पदाधारी आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वर जी ने भावित और प्रभावित का फर्क बताया। संसार और मोक्ष के लिए मन की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।

Jul 7, 2023 - 20:50
Jul 12, 2023 - 10:50
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मन मालिक बन गया और हम गुलाम बन गए, संसार और मोक्ष दोनों का स्वामी मन है- आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वर जी म.सा.।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रभु से संपर्क करने जाते हैं तो मन रूपी दलाल बीच में आ जाता है, हमें जुड़ने नहीं देता है। मन मालिक बन गया और हम गुलाम बन गए। संसार और मोक्ष दोनों का स्वामी मन है। शरीर और पांच इंद्रियां स्वीच है लेकिन इनका मैन स्वीच मन है। भक्ति के बीच रुकावट करने वाला मन ही होता है।

यह बात मोहन टाकीज सैलाना वालों की हवेली में आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने कही। आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा कि व्यक्ति के मन में तप और धर्म करने का विचार आता है, लेकिन मोह की दीवार बीच में आ जाती है और वह संसार के सुख को छोड़ नहीं पाता है। यह सोचे कि हमारी इज्जत पैसे हैं या इज्जत की वजह से पैसा है।

भावित और प्रभावित में अंतर

आचार्य श्री ने प्रभावित और भावित को परिभाषित करते हुए कहा कि दो घड़े लेकर एक में पानी और एक में घी भरकर उसे खाली करो तो 24 घंटे बाद दोनों खाली नजर आएंगे, लेकिन घी के घड़े से सुंगध आएगी, यानी वह भावित हुआ है। जबकि पानी के घड़े से महक नहीं आएगी क्योंकि वह सिर्फ प्रभावित हुआ था। यदि प्रवचन में जाकर उससे प्रभावित होते है, तो यह पात्रता गुरु की है।

प्रभावित होना मिलना, भावित होना मिटना

आचार्य श्री  ने कहा कि प्रभावित होना मिलना है, भावित होना मिटना है। दो गिलास में पानी लेकर एक में पत्थर और दूसरे में मिश्री डालेंगे, तो पत्थर पानी में मिलेगा लेकिन वह मिटेगा नहीं, यानी प्रभावित हुआ लेकिन मिश्री पानी में घुल जाएगी, उसका अस्तित्व मिट जाएगा। यानी वह भावित होगी। प्रभावित से चित शांत नहीं, लेकिन भावित होने से मन शांत होगा। रुकावट करने वाले तीन परिबल भावित नहीं होने देते है, जो मोह की दीवार, मन रूपी दलाल और मान रूपी दलील है |

रविवार को विशेष जाहिर प्रवचन

मोहन टाकीज सैलाना वालों की हवेली में आचार्य श्री विजय कुलबोधी सूरीश्वरजी म.सा. के मुखारविंद से "मां-बाप को भूलना नहीं" विषय पर रविवार को विशेष जाहिर प्रवचन होंगे। श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी रतलाम द्वारा युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहने की अपील की।

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।