पटवारियों का बड़ा सवाल : जिम्मेदारी वही, काम वही, जनता की सेवा भी वही तो फिर हम वेतन और पदोन्नति में पीछे क्यों रह गए ?
मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने वेतनमान और पदोन्नति में असमानता का मुद्दा उठाते हुए न्यूनतम पे-लेवल-6 और समयबद्ध पदोन्नति की मांग की है। संघ का दावा है कि समान वेतनमान वाले कई पद आज उच्च पे-लेवल तक पहुंच चुके हैं, जबकि पटवारी अब भी लेवल-4 पर हैं।
एसीएन टाइम्स @ भोपाल । मध्यप्रदेश में अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर बैठे पटवारियों ने अब वेतनमान और पदोन्नति में कथित असमानता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। पटवारी संघ का कहना है कि वर्ष 1995 में जिन कई शासकीय पदों का वेतनमान लगभग समान श्रेणी में था, वे आज उच्च वेतन स्तर और बेहतर पदोन्नति व्यवस्था तक पहुंच चुके हैं, जबकि पटवारी अब भी पे-लेवल-4 पर कार्य कर रहे हैं। संघ का दावा है कि जिम्मेदारियां लगातार बढ़ने के बावजूद वेतनमान और पदोन्नति में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया, इसलिए न्यूनतम पे-लेवल-6 और समयबद्ध पदोन्नति की मांग की जा रही है।
पटवारी संघ का दावा है कि वर्ष 1995 में जिन कई शासकीय पदों का वेतनमान लगभग समान श्रेणी में था, वे आज सातवें वेतनमान में लेवल-5 से लेकर लेवल-12 तक पहुंच चुके हैं, जबकि पटवारी आज भी पे-लेवल-4 पर कार्य कर रहे हैं। इसी आधार पर संगठन न्यूनतम लेवल-6 वेतनमान और समयबद्ध पदोन्नति व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहा है।
1998 से 2026 तक का तुलनात्मक आंकड़ा
पटवारी संघ ने वर्ष 1998 (पांचवें वेतन आयोग) और वर्तमान 2026 (सातवें वेतन आयोग) के वेतनमान का तुलनात्मक विवरण जारी करते हुए दावा किया है कि समय के साथ अधिकांश समकक्ष पदों के वेतन और पदोन्नति में उल्लेखनीय सुधार हुआ, लेकिन पटवारियों को उसका लाभ नहीं मिला।
तुलनात्मक विवरण के अनुसार पटवारी वर्ष 1998 में 3050-4590 रुपये के वेतनमान और 1400 ग्रेड पे पर थे। वर्तमान में उनका वेतनमान 22,100 से 70,000 रुपए है और वे पे-लेवल-4 में कार्यरत हैं।
इसके विपरीत प्रधान आरक्षक और वनपाल लेवल-5, सहायक उप निरीक्षक (ASI), राजस्व निरीक्षक, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) तथा प्राथमिक शिक्षक लेवल-6, उप निरीक्षक (SI) लेवल-6/7, माध्यमिक शिक्षक लेवल-7, नायब तहसीलदार लेवल-10, तहसीलदार लेवल-12 तथा सहायक अभियंता लेवल-10/12 तक पहुंच चुके हैं।
मप्र में विभिन्न पदों का 1998 और वर्तमान वेतनमान
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1995 का हवाला देकर उठाया सवाल
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पटवारी संघ का कहना है कि वर्ष 1995 में उपरोक्त अधिकांश पद चौथे वेतन आयोग के दौरान लगभग समान वेतनमान की श्रेणी में थे। समय के साथ अन्य विभागों के कर्मचारियों को उच्च वेतन स्तर और बेहतर पदोन्नति का लाभ मिला, लेकिन पटवारी आज भी अपेक्षाकृत निचले वेतन स्तर पर कार्य कर रहे हैं।
संघ ने सवाल उठाया है कि जब अन्य विभागों के कर्मचारियों को सम्मानजनक पदोन्नति और उच्च वेतनमान का लाभ मिल चुका है तो पटवारियों को इससे वंचित क्यों रखा गया है।
संघ का तर्क- जिम्मेदारी सबसे अधिक, वेतन सबसे कम
पटवारी संघ का कहना है कि राजस्व अभिलेखों का संधारण, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, फसल गिरदावरी, प्राकृतिक आपदाओं का सर्वे, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन सहित अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पटवारियों पर होती हैं। गांव स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण दायित्व निभाने के बावजूद उनका वेतनमान अन्य समकक्ष सेवाओं की तुलना में कम है।
संघ का कहना है कि कार्यक्षेत्र लगातार बढ़ा है, जिम्मेदारियां बढ़ी हैं और तकनीकी कार्यों का दायरा भी विस्तृत हुआ है, लेकिन सेवा संरचना में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया।
ये हैं प्रमुख मांगें
- पटवारियों को न्यूनतम पे-लेवल-6 का वेतनमान दिया जाए।
- समयबद्ध एवं स्पष्ट पदोन्नति व्यवस्था लागू की जाए।
- समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू किया जाए।
- वेतनमान में कथित भेदभाव समाप्त किया जाए।
- राजस्व व्यवस्था की रीढ़ होने के अनुरूप अधिकार और सम्मान प्रदान किया जाए।
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हड़ताल से प्रभावित हो रही राजस्व सेवाएं
प्रदेशभर में जारी पटवारियों की कलमबंद हड़ताल का असर आम नागरिकों को मिलने वाली राजस्व सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, नक्शा, राजस्व अभिलेखों से जुड़े कार्य और अन्य कई प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में विभिन्न जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन भी सरकार और पटवारी संघ के बीच शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
पटवारी संघ ने अपनी मांगों को न्यायसंगत बताते हुए शीघ्र निर्णय की अपेक्षा जताई है। वहीं, इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से इस समाचार के प्रकाशन तक वेतनमान और पदोन्नति संबंधी मांगों पर कोई नई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।






