नए कलेक्टर का नया फरमान ! अब रतलाम में नहीं दौड़ेंगी कागजी फाइलें, सिर्फ eFile पर होगा काम
रतलाम के नए कलेक्टर आईएएस अजय कटेसरिया ने पदभार संभालते ही बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब जिले में सभी सरकारी फाइलें केवल eFile के माध्यम से चलेंगी और अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टियां भी eHRMS पोर्टल पर ही स्वीकृत होंगी।
IAS अजय कटेसरिया ने पदभार संभालते ही लागू की ई-गवर्नेंस की नीति, अधिकारियों की छुट्टियां भी अब केवल eHRMS के माध्यम से होंगी स्वीकृत
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । नवागत कलेक्टर आईएएस अजय कटेसरिया ने पदभार ग्रहण करते ही जिले में ई-गवर्नेंस को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब उनके समक्ष कोई भी सरकारी फाइल भौतिक (फिजिकल) रूप में प्रस्तुत नहीं की जाएगी। सभी फाइलों का निस्तारण केवल eFile प्रणाली के माध्यम से होगा। इतना ही नहीं, अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां भी अब eHRMS (इलेक्ट्रॉनिक ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) के जरिए ही स्वीकृत की जाएंगी। कलेक्टर के इस निर्णय को प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यों में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वर्ष 2012 बैच के अधिकारी अजय कटेसरिया ने मंगलवार सुबह रतलाम कलेक्टर का पदभार ग्रहण किया। पूर्व कलेक्टर मिशा सिंह ने उन्हें कार्यभार सौंपा। इस अवसर पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी वैशाली जैन, अपर कलेक्टर बृजेंद्र रावत, एसडीएम तरुण जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
'मैं कागजों पर भरोसा नहीं करता'
शाम को कलेक्ट्रेट सभागार में मीडिया से चर्चा करते हुए कलेक्टर कटेसरिया ने कहा कि उन्होंने पहले ही दिन आदेश जारी कर दिया है कि उनके पास कोई भी फाइल फिजिकली नहीं भेजी जाएगी। सभी विभाग केवल eFile के माध्यम से फाइल प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कहा कि इससे फाइलें अनावश्यक रूप से विभागों में नहीं भटकेंगी, उनके गायब होने की आशंका भी समाप्त होगी और प्रत्येक स्तर पर उनकी ट्रैकिंग संभव होगी। यदि किसी अत्यावश्यक या समयबद्ध मामले में फाइल भौतिक रूप से प्रस्तुत करनी पड़े तो संबंधित अधिकारी को स्वयं उपस्थित होकर यह बताना होगा कि फाइल फिजिकल रूप में लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
कटेसरिया का कहना है कि इस व्यवस्था से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और विभागों की कार्यप्रणाली पर प्रभावी नियंत्रण भी रहेगा।
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GAD की तर्ज पर जिले में लागू होगी ऑनलाइन स्वीकृति व्यवस्था
कलेक्टर ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में जिस तरह अधिकांश प्रशासनिक प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से संचालित हो रही हैं, उसी मॉडल को रतलाम जिले में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
उनका कहना था कि प्रशासनिक स्वीकृतियां अधिकतम ऑनलाइन हों ताकि कार्यों की स्थिति पारदर्शी रहे और आम नागरिकों को भी यह जानकारी उपलब्ध हो सके कि कौन-सा कार्य किस स्तर पर स्वीकृत हुआ है।
अब छुट्टियां भी केवल eHRMS से होंगी मंजूर
कलेक्टर कटेसरिया ने स्पष्ट किया कि जिले में 100 प्रतिशत eHRMS प्रणाली लागू की जाएगी। अब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को अवकाश के लिए eHRMS पोर्टल पर ही आवेदन करना होगा और स्वीकृति भी उसी माध्यम से दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारी लिखित आवेदन देकर अवकाश पर चले जाते हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है। डिजिटल प्रणाली लागू होने से अवकाश संबंधी पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित रहेगी।
कलेक्टर ने बताया कि कलेक्ट्रेट में वर्तमान में 37 कम्प्यूटर सिस्टम कार्यरत हैं। उनका उपयोग केवल आवश्यकता और कार्य के अनुसार होना चाहिए। बिना काम के कम्प्यूटर पर बैठने की प्रवृत्ति से बचना होगा।
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'जनता को आधे घंटे से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़े'
जनसंपर्क को लेकर भी कलेक्टर ने अलग कार्यशैली का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि जनता से मिलने के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं किया गया है। उनका प्रयास रहेगा कि मिलने आने वाले किसी भी व्यक्ति को आधे घंटे से अधिक इंतजार न करना पड़े।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ उन्हें अध्ययन के लिए प्रतिदिन दो से तीन घंटे का समय भी चाहिए, क्योंकि पढ़ना उनकी रुचि का विषय है।
'जनसुनवाई में कम लोग आएं, यही प्रशासन की सफलता'
जनसुनवाई व्यवस्था पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कलेक्टर ने कहा कि वहां आने वाले लोगों को दो श्रेणियों में देखा जा सकता है। पहली श्रेणी में वे लोग हैं जिनकी समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर संभव है, जबकि दूसरी श्रेणी में वे मामले हैं जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं हो सकता। दूसरी श्रेणी के मामलों में लोगों को वास्तविक स्थिति समझाई जाएगी।
कलेक्टर का मानना है कि आदर्श प्रशासन वही है, जहां लोगों को अपनी समस्याएं लेकर जनसुनवाई तक आने की आवश्यकता ही न पड़े। यदि बड़ी संख्या में लोग जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं तो यह संकेत है कि नियमित प्रशासनिक व्यवस्था में कहीं न कहीं कमी है।
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'कलेक्टर की नहीं, सरकार की होती हैं प्राथमिकताएं'
राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में अजय कटेसरिया ने कहा कि कलेक्टर इतना बड़ा आदमा नहीं होता कि वह अपनी अलग प्राथमिकताएं तय करे। सारे निर्णय राज्य स्तर पर ही लिए जाते हैं। हमारी प्राथमिकताएं हमेशा वहीं होती हैं जो राज्य स्तर से निर्णय लिए जाते हैं। मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव से जो आदेश मिलते हैं और उनकी जो भी प्राथमिकताएं होंगी, वही हमारी भी होंगी। हमारा दायित्व उन्हीं निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।ये भी पढ़ें








