MP को बड़ी सौगात ! 351 बसों के साथ 25 सितंबर से बदलेगा सार्वजनिक परिवहन का ढांचा, CM डॉ. मोहन यादव दिखाएंगे हरी झंडी
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की 25 सितंबर से शुरुआत होगी। सीएम मोहन यादव भोपाल में 351 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने और 15 हजार से अधिक बसें चलाने की योजना है।
15 हजार से ज्यादा बसों का लक्ष्य, 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने की तैयारी; 7 शहरों से होगी शुरुआत
एसीएन टाइम्स @ भोपाल । मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी पूरी हो गई है। ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की शुरुआत 25 सितंबर से होगी। भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर सेवा का शुभारंभ करेंगे। शुरुआती चरण में सात शहरों से शुरू होने वाली यह व्यवस्था आगे प्रदेशभर में विस्तार लेगी और वर्ष 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना के तहत प्रदेश में करीब 1500 बसों का संचालन शुरुआती चरण में शुरू किया जाएगा, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्य प्रदेशभर में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित करने का है। सरकार के अनुसार विस्तारित नेटवर्क से प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को परिवहन सुविधा मिल सकेगी। 25 सितंबर को जिन 351 बसों को रवाना किया जाएगा, उनमें 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें हैं। यानी एक हिस्सा शहरों को आपस में जोड़ने के लिए और दूसरा संबंधित शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होगा।
पहले चरण में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को शामिल किया गया है। इंदौर में 145 बसें चलेंगी, जिनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी हैं। भोपाल के हिस्से में 106 बसें होंगी, जिनमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। जबलपुर में 67 बसों का संचालन होगा, जिनमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसें हैं। रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसें संचालित की जाएंगी।
शहरों से गांवों तक बढ़ेगा नेटवर्क
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का दायरा केवल शुरुआती सात शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। योजना के तहत वर्ष 2031 तक प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रदेश में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित करने की योजना है। बसों की संख्या बढ़ाने के साथ परिवहन से जुड़े आधारभूत ढांचे को भी विकसित किया जाएगा। प्रदेश में 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड, टर्मिनल और डिपो के कायाकल्प की योजना है।
सात कैमरे, पैनिक बटन और लाइव ट्रैकिंग भी
नई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में तकनीक और सुरक्षा को भी जोड़ा गया है। प्रत्येक बस में 7 सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (VLTD) सिस्टम लगाए जा रहे हैं। महिला और बाल सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यात्रियों को बसों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (PIS) की व्यवस्था होगी। ड्राइवरों को तकनीकी प्रशिक्षण देने के साथ शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए सिस्टम विकसित किया जा रहा है।
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कमांड सेंटर से होगी निगरानी
पूरे बस नेटवर्क की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के जरिए की जाएगी। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) और उसकी 7 सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटरों के जरिए बसों की लोकेशन, संचालन, समयबद्धता और अन्य गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन संचालन को अधिक व्यवस्थित और निगरानी योग्य बनाना है।
योजना में पर्यावरणीय पहलू को भी शामिल किया गया है। कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल का विस्तार किया जाएगा। इलेक्ट्रिक बसों के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
PPP मॉडल से निजी ऑपरेटरों की भागीदारी
सरकार सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के विस्तार में निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी भी बढ़ाएगी। इसके लिए जन-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के तहत पारदर्शी अनुबंध व्यवस्था और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। निजी ऑपरेटरों के लिए राजस्व रिसाव रोकने, विज्ञापन और कार्गो जैसी गैर-किराया आय बढ़ाने तथा आधुनिक डिपो और टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। प्रशासन की ओर से भी आवश्यक सहयोग दिए जाने का प्रावधान है।
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परिवहन विस्तार से रोजगार और निवेश की उम्मीद
सार्वजनिक बसों के नेटवर्क के विस्तार का असर परिवहन से जुड़े कई क्षेत्रों पर पड़ने की संभावना है। बस संचालन के साथ वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश के अवसर बढ़ेंगे। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों के विस्तार के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।





