राजनीति का सबक ! झांकीबाजी के लिए सड़क पर तमाशा, वरिष्ठों की तस्वीर पर लटकती उन्हीं के निर्देशों-आदर्शों की माला!

‘नीर का तीर’ में पढ़िए राजनीति की झांकीबाजी, क्रेन और जेसीबी से शक्ति प्रदर्शन, वरिष्ठों के आदेशों और आदर्शों की अनदेखी और आमजन की परेशानी पर यह कटाक्ष।

राजनीति का सबक ! झांकीबाजी के लिए सड़क पर तमाशा, वरिष्ठों की तस्वीर पर लटकती उन्हीं के निर्देशों-आदर्शों की माला!
नीर का तीर : राजनीति का सबक !

नीरज कुमार शुक्ला

राजनीति में कुछ जन्मदिन उम्र बढ़ने के लिए, राजनीतिक कद नापने के लिए मनाए जाते हैं। इसी तरह कुछ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भी धार्म-कर्म के लिए नहीं, झांकीबाजी के लिए किए जाते हैं। क्या आप भी राजनीति में आने के बारे में सोच रहे हैं या इस ओर कदम बढ़ा दिया है? यदि आपका जवाब ‘हां’ है, तो पहले कुछ जरूरी गुर सीख लें, क्योंकि आपको यही आगे ले जाएंगे।

हे पार्थ ! ध्यान से सुनो...

अगर आपकी भी राजनीति के आकाश में ऊंची छलांग लगाने की सोच रहे हैं या इस क्षेत्र में पदार्पण कर दिया है तो आपमें दूसरों के कंधों पर चढ़ने और ऊंचाई पर पहुंचते ही उन कंधों को लात मारने का गुण अवश्य होना चाहिए। यह करते समय किसी की किंचित भी परवाह नहीं करें, न पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों के आदेश-निर्देश की और ना ही राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों की। उनका तो काम ही है आदेश-निर्देश देना, जो वे देते ही रहेंगे लेकिन आप अपनी मस्ती में रहते रहें और उन्हें हवा में उड़ाते रहिए। किसी ने कहा भी है कि- जिसकी मस्ती जिंदा है, उसी की हस्ती जिंदा है। अगर ऐसे आदेशों-निर्देशों की माला बनाकर उन्हीं की तस्वीर पर चढ़ा सकें, जिन्होंने ये दिए थे तो सोने पे सुहागा। कोई भी आदेश-निर्देश, नियम-कानून अपनी जगह और आपका जलवा अपनी जगह!

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हर छोटे-बड़े अवसर पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करवाएं। इसके लिए व्यस्ततम सड़क-चौराहे पर मंच सजाएं। यह जरूर ध्यान रखें कि इससे यातायात अवश्य बाधित हो, रुके भले ही ना लेकिन प्रभावित तो हो ही। इससे आमजन परेशान होंगे, यह बेकार का विचार भूले से भी जेहन में नहीं लाएं। सच भी है कि- लोग आपको मुसीबत में ही याद रखते हैं, जब उन्हें मुसीबत ही नहीं होगी तो भला वे आपको क्यों याद रखने लगे।

कोई कसर रह जाए तो फूलों और मालाओं से लदी दो-चार क्रेन और जेसीबी सड़क पर खड़ी करवा लो, क्योंकि जब क्रेन और जेसीबी इस तरह खड़ी रहकर सियासी वजन का प्रदर्शन करती हैं तो पद का छोटा या बड़ा होना मायने नहीं रखता, उल्टे इससे रुतबा जरूर काफी बढ़ जाता है। एक बात और गांठ बांध लो- अगर आप सत्ताधारी दल से जुड़े हो या उससे कोई ताल्लुक है तो मंच सजाने, रास्ता रोकने के लिए किसी भी प्रकार अनुमति लेने की गलती नहीं करें। अनुमति मांगने से अफसर को लगेगा कि आप नए-नवेले नेता हैं और आपका राजनीतिक वजन में काफी हल्के हैं, और तब आला अधिकारी तो ठीक, आपके हल्के का पटवारी भी आपको नहीं गांठेगा।

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बर्थ-डे सेलिब्रेशन हो या किसी वरिष्ठ का स्वागत-सत्कार, भीड़ के बिना सबकुछ फीका है। भीड़ जुटाना काफी आसान है और हमारे शहर के कतिपय छोटे-बड़े नेता इसमें माहिर हैं। उन्हीं लिया गया टोटका (आइडिया) आपको चिपका रहा हूं। भीड़ जुटाने के लिए आप भी इन छोटे-छोटे टोटकों को आजमाइए और फिर कमाल देखिए। जिस दिन आयोजन हो, उसके एक-दो दिन पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह ऐलान कर दीजिए कि आप अपने जन्मदिन, परण दिन, मरण दिन... पर अपने निवास पर ही रहेंगे। यकीन मानिए, आपके समर्थक तो सिर्फ इस ऐलान मात्र से ही खिंचे चले आएंगे।

जो समर्थक नहीं हैं उन्हें आकर्षित करने का भी टोटका भी काफी कारगर है। किसी भी माध्यम से ऐसे लोगों तक सिर्फ इतना सी बात पहुंचा दो कि- कार्यकारिणी में पद बंटने वाले हैं और ये रेवड़ियां आपकी कृपा से ही मिलेगी। जिसने भी आपके दरबार में हाजिरी नहीं लगाई उसके राजनीतिक भविष्य की फाइल पर ‘लाल निशान’ लग जाएगा! पद पाने की चाहत में ऐसे-ऐसे लोग आपके स्वागत के लिए कतार में नजर आएंगे, जिन्हें आप फूटी आंख नहीं सुहाते। ऐसे लोग यह भी कह सकते हैं कि- 'मैंने तेरे भी भरोसे महराज, सड़क पर नैया डार दयी...।'

...और अंत में पते की बात ! राजनीतिक ‘विप्लव’ (क्रांति / विद्रोह / भारी उथल-पुथल) से सृजन भी होता है, विनाश भी। अब यह आप पर निर्भर है कि आप कैसी राजनीति करते हैं, सृजन वाली या विनाश वाली। 

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डिस्क्लेमर

ऊपर लिखी बकवास या उसके किसी भी हिस्से का पिछले दिनों शहर में हुए किसी भी समारोह या घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं है। यह लेखक के दिमाग में उपजा एक फितूर भर है। इसे पढ़िए और भूल जाइए उन नेताओं की तरह, जो अपनी राजनीति चमकाने और झांकीबाजी करने के लिए वरिष्ठों के आदेश-निर्देश, नियम-कानून और अपने क्रिया-कलापों से आमजनता को होने वाली तकलीफों को भूल जाते हैं।