वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर रतलाम में हुआ अनूठा काम, 10 थाटों के रागों में स्वरांकित कर दिया मुखड़ा, आप भी सुनें
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर रतलाम के शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संगीत विभाग ने 10 थाटों पर आधारित विभिन्न रागों में मुखड़ा स्वरांकित किया। प्रस्तुति डेढ़ माह में तैयार हुई।
कन्या महाविद्यालय के संगीत विभाग की अभिनव पहल, छात्राओं और प्राध्यापकों ने करीब डेढ़ माह की मेहनत से तैयार की प्रस्तुति
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रतलाम के शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संगीत विभाग ने एक अनूठी संगीतमय प्रस्तुति तैयार की है। संगीत विभाग के प्राध्यापकों और छात्राओं ने वंदे मातरम् के मुखड़े को भारतीय शास्त्रीय संगीत के 10 थाटों पर आधारित विभिन्न रागों में स्वरांकित किया। इसे तैयार करने में करीब डेढ़ माह की मेहनत लगी। इस तरह की यह पहली प्रस्तुति है।
इस अभिनव प्रस्तुति को तैयार करने में संगीत संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ. बी. वर्षा, डॉ. स्नेहा पंडित, प्रो. कमलेश राठौर, डॉ. रोहित चावरे और विवेकानंद उपाध्याय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भारतीय शास्त्रीय संगीत के 10 थाटों पर आधारित रागों पर इसकी कंपोजीशन भी उन्होंने ही तैयार की। प्रस्तुति में स्वर छात्राओं महिमा गोथवाल, दिया परसाई, रिद्धिमा शर्मा और ज्योति पांचाल ने दिए।
इसे और प्रभावी बनाने में रागिनी हीर का बांसुरी वादन तथा रिमझिम जोनवेल की नृत्य प्रस्तुति भी शामिल रही। इस तरह संगीत, गायन, बांसुरी वादन और नृत्य का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
10 थाटों के रागों में प्रस्तुत किया मुखड़ा
संगीत की प्राध्यापक डॉ. स्नेहा पंडित ने बताया वंदे मातरम् को सीधे थाट में गाना संभव नहीं था। इसलिए 10 थाटों पर आधारित विभिन्न रागों का चयन कर गीत के मुखड़े को उन रागों में स्वरबद्ध किया गया। चूंकि वंदे मातरम् की मूल रचना काफी लंबी है, इसलिए इस विशेष संगीत प्रयोग के लिए केवल इसके मुखड़े को ही शामिल किया गया।
इस प्रयोग के माध्यम से एक ही राष्ट्रगीत को भारतीय शास्त्रीय संगीत की विभिन्न राग परंपराओं में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। इससे वंदे मातरम् के भाव और भारतीय शास्त्रीय संगीत की विविधता दोनों को एक साथ अभिव्यक्ति मिली।
डेढ़ माह में तैयार हुई प्रस्तुति
इस विशेष प्रस्तुति को तैयार करने में संगीत विभाग की टीम को करीब डेढ़ माह का समय लगा। रागों का चयन, स्वरांकन, गायन के अभ्यास के साथ बांसुरी वादन और नृत्य को प्रस्तुति के अनुरूप तैयार किया गया। इसके बाद सभी कलाकारों के सामूहिक प्रयास से यह प्रस्तुति आकार ले सकी।
महाविद्यालय की छात्राओं को इस रचनात्मक संगीत प्रयोग से भारतीय शास्त्रीय संगीत के विभिन्न रागों और उनके प्रयोग को समझने का अवसर भी मिला। राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर तैयार की गई यह प्रस्तुति संगीत शिक्षा और राष्ट्रभावना के सुंदर समन्वय के रूप में सामने आई।
प्राचार्य ने की पूरी टीम की सराहना
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मंगलेश्वरी जोशी ने इस विशेष प्रस्तुति की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने प्रस्तुति तैयार करने वाली पूरी टीम को बधाई देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।
महाविद्यालय के संगीत विभाग की यह पहल न केवल वंदे मातरम् के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति रही, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने वाला रचनात्मक प्रयास भी बनी।





