यह फैसला खास है ! कुल्हाड़ी और लोहे के पाइप से हमला कर काट दी थी पैर की हड्डी, न्यायालय ने पीड़ित को माना अहम साक्ष्य और सुना दी यह सजा

रतलाम के न्यायालय का यह फैसला मारपीट के गंभीर मामलों में कानून के कठोर दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह समाज में विधि व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में अहम् है।

Feb 18, 2026 - 22:22
Feb 18, 2026 - 23:32
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यह फैसला खास है ! कुल्हाड़ी और लोहे के पाइप से हमला कर काट दी थी पैर की हड्डी, न्यायालय ने पीड़ित को माना अहम साक्ष्य और सुना दी यह सजा
कोर्ट का फैसला।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने कुल्हाड़ी और लोहे के पाइप से एक व्यक्ति पर हमला कर गंभीर घायल करने के मामले में एक दो आरोपियों को सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों को अलग-अलग धाराओं में 3 एवं 4 माह के सश्रम कारावास देने के साथ ही 6 हजार रुपए अर्थदंड भी किया है। 

अतिरिक्त लोक अभियोजन संजीव सिंह चौहान के द्वारा बताया कि दिनांक 30.09.2020 को ग्राम पलसोड़ा के चौराहे पर स्थित एक दुकान के सामने भरतलाल के साथ कुछ लोगों द्वारा विवाद कर मारपीट की गई थी। आरोपियों ने पीड़ित पर कुल्हाड़ी और लोहे के पाइप से हमला किया था। इससे उसके पैर की हड्टी कट गई थी। मामले में नामली थाने में अपराध क्रमांक 338/2020 दर्ज किया गया था। इसमें आरोपी कैलाश एं सुरेश के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 294, 323, 326, 506 सहपठित धारा 34 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज हुआ था।

पीड़ित साक्षी के कथन को माना प्रमाणित

चौहान ने बताया कि पुलिस ने विवेचना के बाद न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया था। इसमें अभियोजन पक्ष की ओर से मौखिक एवं चिकित्सीय साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। साथ ही पीड़ित साक्षी के विश्वसनीय कथन भी हुए। इन्हें न्यायालय ने प्रमाणित मानते हुए आरोपी कैलाश एवं सुरेश को धारा 323 एवं 326 भादंवि के तहत दोषी ठहराया। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी को क्रमशः 03 माह तथा 04 वर्ष का सश्रम कारावास सुनाया। आरोपियों पर कुल ₹6000/- अर्थदंड भी किया गया।

इसलिए महत्वपूर्ण है यह फैसला

अभिभाषक चौहान के अनुसार न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि साक्ष्य का महत्व उसकी संख्या नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करता है। विश्वसनीय प्रत्यक्ष पीड़ित साक्षी के कथन के आधार पर भी अपराध सिद्ध किया जा सकता है। यह निर्णय गंभीर मारपीट के मामलों में कानून के प्रति कठोर दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह समाज में विधि-व्यवस्था बनाए रखने हेतु प्रभावी संदेश प्रदान करता है कि घातक हथियारों से हिंसा करने वाले व्यक्तियों को न्यायालय से कठोर दण्ड अवश्य मिलेगा।

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।