नन्हें कलाकारों का बड़ा संदेश ! ‘समर कैंप’ और ‘मुहावरों का न्याय’ के नाट्य मंचन से दर्शकों को किया सोचने पर मजबूर
रतलाम में युगबोध संस्था के ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य शिविर के समापन पर बच्चों ने ‘समर कैंप’ और ‘मुहावरों का न्याय’ नाटकों का मंचन कर समाज और व्यवस्था की विसंगतियों पर प्रभावी संदेश दिया।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर की सक्रिय नाट्य संस्था ‘युगबोध’ द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य प्रशिक्षण शिविर का समापन रंगारंग एवं विचारोत्तेजक नाट्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ। लगातार 15वें वर्ष आयोजित इस शिविर के समापन अवसर पर बाल कलाकारों ने दो सार्थक नाटकों का मंचन कर समाज की विसंगतियों, बदलती सामाजिक प्रवृत्तियों तथा व्यवस्था की विद्रूपताओं को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। 15 नन्हें कलाकारों के सशक्त अभिनय ने उपस्थित दर्शकों को न केवल प्रभावित किया, बल्कि उन्हें सोचने पर भी मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत ‘समर कैंप’ नाटक ने आधुनिक दौर में बच्चों पर बढ़ते दबाव और समर कैंप संस्कृति पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। आशीष दशोत्तर द्वारा लिखित इस नाटक में यह संदेश दिया गया कि बच्चों को हर समय किसी न किसी गतिविधि में व्यस्त रखने की प्रवृत्ति कहीं न कहीं उन्हें मशीन बनाने का प्रयास भी बनती जा रही है। नाटक ने अभिभावकों को आत्ममंथन का संदेश देते हुए कहा कि बच्चों की तरह स्वयं भी नई-नई कलाएं और जीवन कौशल सीखने की आवश्यकता है।
वहीं स्नेहलता दीक्षित द्वारा लिखित नाटक ‘मुहावरों का न्याय’ ने मुहावरों के माध्यम से शासन-प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली, आमजन को झेलनी पड़ने वाली समस्याओं तथा सामाजिक अन्याय को व्यंग्यात्मक शैली में मंच पर जीवंत कर दिया। नाटक की प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।
अतिथियों ने कलाकारों का बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लायंस क्लब के संदीप निगम, अध्यक्षता कर रहे हम लोग संस्था के अध्यक्ष सुभाष जैन तथा विशेष अतिथि शिक्षक सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने बाल कलाकारों की प्रतिभा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन बच्चों का आत्मविश्वास, अभिनय कौशल और सामाजिक विषयों पर उनकी समझ भविष्य में रतलाम को नई पहचान दिला सकती है।
संस्था के अध्यक्ष ओमप्रकाश मिश्रा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए शिविर की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास, यूसुफ जावेदी, ललित चौरड़िया, युवा रंगकर्मी श्रेयस शर्मा तथा मयुरेश भावे ने किया।
नन्हें कलाकारों ने अभिनय से जीता दिल
दोनों नाटकों में अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रभावी प्रदर्शन करने वाले बाल कलाकारों में हर्षिता मित्तल, कश्वी कटारिया, पीहू शर्मा, आर्या शर्मा, धारवी मोदी, अनन्या वर्मा, खुशी सोनी, गौरी सोनी, दक्षा राठौर, रितुल कोठारी, मनन केरवाल, दर्पिका केरवाल, अर्थ दशोत्तर, वात्सल्य पंवार, दूर्वा राठौर सहित अन्य कलाकार शामिल रहे।
नाटकों का निर्देशन ओमप्रकाश मिश्र ने किया, जबकि श्वेता कटारिया सह-निर्देशक रहीं। आयोजन में ब्राह्मण बोर्डिंग न्यास, हम लोग संस्था, लायंस क्लब तथा शिक्षक सांस्कृतिक मंच का सहयोग प्राप्त हुआ।
प्रतिभागियों का सम्मान, रंगकर्मियों का अभिनंदन
युगबोध के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और संवेदनशील बनाने का सशक्त साधन भी है। बाल कलाकारों को सुभाष जैन, डॉ. प्रदीप सिंह राव, रणजीत सिंह राठौर, उदय कुंवर पंवार, संदीप निगम और दिनेश शर्मा द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर रंगकर्म एवं नाट्य लेखन के क्षेत्र में योगदान के लिए ओमप्रकाश मिश्र और आशीष दशोत्तर का विशेष सम्मान भी किया गया। संचालन सतीश भावे ने किया।
ये उपस्थित रहे
आयोजन में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रतन चौहान, डॉ. सुलोचना शर्मा, गोपाल जोशी, महावीर वर्मा, एस.सी. करमरकर, नवनीत मेहता, श्याम सुंदर भाटी, कीर्ति शर्मा, विनीता ओझा, मनमोहन उपाध्याय, संजय ओझा, विभा राठौर, सलीम पठान, भगवान सिंह महावर, रशेष राठौर सहित बड़ी संख्या में नाट्यप्रेमी, साहित्यकार और कला-संस्कृति से जुड़े नागरिक उपस्थित रहे।





