वर्ल्ड हैप्पीनेस डे पर विशेष : ख़ुशी है धूप की तेज़ी में पेड़ की छाया- प्रो. अज़हर हाशमी

इंसान हैं तो ख़ुश रहिए, ख़ुशी इंसानियत जीवित होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। हर किसी के लिए ख़ुशी के अलग-अलग पैमाने हैं। यही बात कवि एवं चिंतक प्रो. अज़हर हाशमी अपनी इस कविता में बता रहे हैं।

Mar 20, 2024 - 22:27
Mar 21, 2024 - 13:16
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वर्ल्ड हैप्पीनेस डे पर विशेष : ख़ुशी है धूप की तेज़ी में पेड़ की छाया- प्रो. अज़हर हाशमी
वर्ल्ड हैप्पीनेस डे पर विशेष।

ख़ुशी है धूप की तेज़ी में पेड़ की छाया

ख़ुशी भूखे के लिए अन्न का दाना-दाना,

ख़ुशी प्यासे के लिए जैसे जल का आजाना।

किसी ने राजसी ठाठों को ही ख़ुशी माना,

किसी ने त्याग के गुण में ख़ुशी को पहचाना।

ख़ुशी है धूप की तेजी में पेड़ की छाया,

ख़ुशी रोगी के लिए जैसे इक दवाख़ाना।

ख़ुशी न धन की तिजोरी, ख़ुशी न मयखाना,

ख़ुशी तो रूह की राहत का है ताना-बाना।

बिना प्रचार गरीबों की मदद करने से,

ख़ुशी जो दिल को मिले वो ख़ुशी का पैमाना।

-अज़हर हाशमी

(दैनिक समाचार-पत्र ‘पत्रिका’ से साभार)

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।