कलेक्टर का एक और फरमान ! अब कलेक्टर न्यायालय में नियमित होगी सुनवाई, पुराने लंबित प्रकरणों का समयबद्ध होगा निराकरण

रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया ने कलेक्टर न्यायालय में लंबित प्रकरणों की नियमित सुनवाई और समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए। पुराने मामलों को प्राथमिकता से सूचीबद्ध करने और अनावश्यक स्थगन से बचने पर जोर दिया गया।

कलेक्टर का एक और फरमान ! अब कलेक्टर न्यायालय में नियमित होगी सुनवाई, पुराने लंबित प्रकरणों का समयबद्ध होगा निराकरण
रतलाम कलेक्टर न्यायालय में अब नियमित सुनवाई होगी।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । कलेक्टर न्यायालय में लंबित विभिन्न प्रकरणों की नियमित सुनवाई और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर अजय कटेसरिया ने न्यायालय के नियमित संचालन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने न्यायालय के रीडर एवं संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया कि दर्ज प्रकरणों की नियमित पेशी निर्धारित कर उन्हें नियत तिथि पर सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया जाए।

कलेक्टर न्यायालय में राजस्व प्रकरणों के अलावा खनिज संबंधी मामले, फौजदारी एवं प्रतिबंधात्मक प्रकरण तथा विभिन्न अधिनियमों के तहत कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी की न्यायालयीन अधिकारिता में आने वाले अन्य मामलों की भी सुनवाई होती है। कलेक्टर ने सभी श्रेणियों के लंबित प्रकरणों को व्यवस्थित रूप से सूचीबद्ध कर नियमित सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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पुराने मामलों को प्राथमिकता

न्यायालय के रीडर को लंबित प्रकरणों की अद्यतन सूची तैयार करने तथा पुराने और लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही नियमित कॉज लिस्ट तैयार करने, नोटिस की समय पर तामील कराने और संबंधित अभिलेख उपलब्ध रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

अधीनस्थ न्यायालयों अथवा संबंधित कार्यालयों से अपेक्षित रिकॉर्ड समय पर प्राप्त करने के लिए भी आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अभिलेखों के अभाव में मामलों की सुनवाई प्रभावित न हो।

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अनावश्यक स्थगन से बचने के निर्देश

कलेक्टर ने प्रकरणों में अनावश्यक स्थगन से बचते हुए प्रत्येक पेशी पर प्रभावी कार्यवाही करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पक्षकारों को अनावश्यक रूप से बार-बार उपस्थित न होना पड़े और निर्धारित तिथि पर उन्हें सुनवाई का समुचित अवसर मिले, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

कलेक्टर न्यायालय में अब प्रकरणों की नियमित सुनवाई होने से राजस्व, खनिज, फौजदारी एवं अन्य वैधानिक मामलों के निराकरण में गति आने की उम्मीद है। इससे न्यायालयीन कार्यवाही अधिक नियमित, प्रभावी और सुव्यवस्थित हो सकेगी।