हिन्दी समाज को जोड़ने का पुल, भाषा को बचाना और सम्मान देना हम सबकी जिम्मेदारी : आशीष दशोत्तर

रतलाम में हिन्दी दिवस पर हिन्दी वार्षिकी ‘युवाओं की आर्थिक सफलता का आधार - हिन्दी’ का विमोचन हुआ। आशीष दशोत्तर ने हिन्दी को समाज को जोड़ने वाला पुल बताया।

हिन्दी समाज को जोड़ने का पुल, भाषा को बचाना और सम्मान देना हम सबकी जिम्मेदारी : आशीष दशोत्तर
हिन्दी दिवस।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । हिन्दी भाषा समाज को जोड़ने में एक पुल का कार्य करती है। इसलिए इस भाषा को बचाना और सम्मान देना हम सबकी जिम्मेदारी है। आज मोबाइल के बढ़ते उपयोग के कारण भाषा का प्रयोग कम और इमोजी के रूप में संकेतों का प्रयोग अधिक हो रहा है, जो चिंता का विषय है। किसी भी भाषा का प्रयोग जितना अधिक होता है, उस भाषा का विकास भी उतना ही अधिक होता है। हालांकि हिन्दी भाषा के लिए हमें बहुत अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि विश्व में हिन्दी भाषा की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।

यह विचार साहित्यकार आशीष दशोत्तर ने स्व. अरुण भार्गव स्मृति हिन्दी प्रचार-प्रसार समिति, रतलाम द्वारा हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सभागृह में आयोजित समारोह में समिति की हिन्दी वार्षिकी के 24वें अंक ‘युवाओं की आर्थिक सफलता का आधार - हिन्दी’ स्मारिका का विमोचन किया गया।

हिन्दी संस्कृति की सच्चे अर्थों में संवाहक : सुभाष कुमावत

अध्यक्षता करते हुए विद्यालय के प्राचार्य सुभाष कुमावत ने कहा कि हिन्दी भाषा में ज्ञान का अथाह भंडार समाया हुआ है। भारतीय साहित्य और संस्कृति की सच्चे अर्थों में हिन्दी ही संवाहक है। हिन्दी भारत के साहित्य और संस्कृति का संगम है। पूरे भारतीय समाज को आपस में जुड़कर हिन्दी भाषा के विकास और सम्मान के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को भी हिन्दी से जुड़ना चाहिए, क्योंकि किसी भी विषय का सच्चा ज्ञान हिन्दी भाषा में आसानी से प्राप्त किया जा सकता है और यही ज्ञान युवाओं के विकास का आधार बनता है।

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अनेकता में एकता को सार्थक करने वाली भाषा हिन्दी : रक्षा मिश्रा

विशेष अतिथि शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ समाजसेविका रक्षा मिश्रा ने कहा कि अनेकता में एकता को सार्थक करने वाली भाषा हिन्दी है। सभी बोलियों को साथ लेकर चलने की क्षमता हिन्दी भाषा में है और यही इसकी विशेषता है। श्रद्धा जलज घोटे, बाबूलाल परमार एवं अशोक मेहता आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

जिला स्तरीय लोकगीत प्रतियोगिता आयोजित

भारत की मूल संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों को संरक्षित करने के उद्देश्य से रतलाम जिला स्तरीय लोकगीत प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में समता इंटरनेशनल स्कूल ने प्रथम, सांदीपनि विद्यालय रतलाम ने द्वितीय तथा सांदीपनि मॉडल स्कूल, सैलाना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में शिक्षाविद् विनीता ओझा तथा राष्ट्रीय लोक कवि दिनेश बारोठ ने विशेष भूमिका निभाई।

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सेवानिवृत्त श्रेष्ठ शिक्षकों का सम्मान

समिति द्वारा राज्यपाल से पुरस्कृत तथा सेवानिवृत्त श्रेष्ठ शिक्षकों की सम्मान श्रृंखला के अंतर्गत दिनेश बारोठ, सुजाअत मोहम्मद, मनोज यादव, पिंकी, शर्मीला उपाध्याय, डॉ. अंजुम खान एवं राजेश माहेश्वरी आदि का भी सम्मान किया गया। समिति की ओर से अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।

इससे पूर्व सर्प्रथम कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती एवं स्व. अरुण भार्गव के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। दिनेश बारोठ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। स्वागत भाषण नरेन्द्रसिंह पंवार ने दिया। मंचस्थ अतिथियों का पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत दिलीप पंवार, नरेन्द्र टाँक, राजेन्द्र मेहोलिया, रामसेवक प्रेमसिंह दण्डोतिया, विनोद शर्मा, सीमा अरुण भार्गव, डॉ. मुनीन्द्र दुबे, हेमन्तसिंह राठौर, नवीन बोरिया, नरेन्द्र कुमार पासी, डॉ. रवीन्द्र उपाध्याय, रजनीश चौहान, सत्यांश ओझा, मुस्तकीम सिद्दिकी, परवेज खान, पिंकी यादव, नवीन उपाध्याय, विनय राठौर, भँवरलाल बारोठ, आसिफ खान, राधेश्याम बारोठ एवं दिलीप चौहान आदि ने किया। संचालन जुबेर आलम कुरैशी ने किया। आभार प्राचार्य विनोद शर्मा ने व्यक्त किया।