बड़ी खबर ! MP की 16 सरकारी ITI निजी हाथों में सौंपने की तैयारी पर बवाल, विधायक डोडियार ने उठाए सवाल, 'निजीकरण' पर रोक लगाने की उठाई मांग

मध्यप्रदेश की 16 शासकीय आईटीआई का संचालन परम फाउंडेशन को सौंपने की प्रस्तावित प्रक्रिया पर सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे सरकारी आईटीआई के निजीकरण का प्रयास बताते हुए विद्यार्थियों, कर्मचारियों और सरकारी परिसंपत्तियों के हितों का हवाला देकर पूरी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

बड़ी खबर ! MP की 16 सरकारी ITI निजी हाथों में सौंपने की तैयारी पर बवाल, विधायक डोडियार ने उठाए सवाल, 'निजीकरण' पर रोक लगाने की उठाई मांग
सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने मप्र की 16 आईटीआई को निजी हाथों में सौंपने का विरोध करते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर सरकार को पत्र लिखा है।

परम फाउंडेशन को संस्थान सौंपने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल; कहा- हजारों विद्यार्थियों का भविष्य, कर्मचारियों का हित और करोड़ों की सरकारी परिसंपत्तियां दांव पर

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश की 16 शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) का संचालन निजी संस्था परम फाउंडेशन को सौंपने की प्रस्तावित प्रक्रिया अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। इस मुद्दे पर सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए पूरी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग को पत्र लिखकर इसे विद्यार्थियों, कर्मचारियों और सरकारी संसाधनों के हितों से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

विधायक डोडियार ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि कौशल विकास संचालनालय, जबलपुर द्वारा 29 जुलाई 2026 को जारी पत्र के माध्यम से प्रदेश की 16 शासकीय आईटीआई संस्थाओं को परम फाउंडेशन को हस्तांतरित करने के संबंध में कार्ययोजना मांगी गई है। उनके अनुसार इस पत्र के बाद संबंधित संस्थानों में हस्तांतरण की तैयारियां शुरू होने की जानकारी सामने आई है।

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सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर उठाए सवाल

डोडियार ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि सरकारी धन से स्थापित और वर्षों से संचालित आईटीआई संस्थानों को निजी संस्था के हवाले करने से प्रदेश के तकनीकी शिक्षा तंत्र पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। उनका कहना है कि यह केवल संस्थानों के संचालन का मामला नहीं है, बल्कि इससे हजारों प्रशिक्षणार्थियों, कर्मचारियों और सरकारी परिसंपत्तियों का भविष्य भी जुड़ा हुआ है।

हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर जताई चिंता

विधायक ने कहा कि यदि प्रस्तावित योजना लागू होती है तो संबंधित आईटीआई में अध्ययनरत हजारों प्रशिक्षणार्थियों की शिक्षा, परीक्षा, छात्रावास व्यवस्था, आवागमन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि निजी संस्था के संचालन में आने से विद्यार्थियों के हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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कर्मचारी और सरकारी संसाधन भी दायरे में

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित प्रक्रिया के तहत अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ-साथ मशीनरी, उपकरण, फर्नीचर और अन्य सरकारी संसाधनों के हस्तांतरण की भी तैयारी की जा रही है। विधायक का कहना है कि करोड़ों रुपये की शासकीय परिसंपत्तियों के निजी संस्था को हस्तांतरण से प्रशासनिक, वित्तीय और विधिक स्तर पर कई गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।

तत्काल रोक लगाने की मांग

डोडियार ने प्रमुख सचिव से मांग की है कि 29 जुलाई 2026 के पत्र के आधार पर की जा रही समस्त कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। उन्होंने आग्रह किया है कि किसी भी आईटीआई, प्रशिक्षणार्थी, अधिकारी-कर्मचारी अथवा शासकीय मशीनरी और संसाधनों का स्थानांतरण नहीं किया जाए तथा सभी शासकीय आईटीआई संस्थाओं का संचालन पूर्ण पारदर्शिता के साथ सरकार के नियंत्रण में ही जारी रखा जाए।

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