राज्यसभा से पास हुआ 'वंदे मातरम्' संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय गीत के अपमान पर होगी 3 साल तक की सजा
राज्यसभा ने प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। अब राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के गायन में जानबूझकर बाधा डालना भी दंडनीय होगा। जानिए क्या बदलेगा, किस पर होगा असर और क्या हैं नए प्रावधान।
एसीएन टाइम्स @ नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को राज्यसभा ने प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सदन में पेश विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को भी वही कानूनी संरक्षण देना है, जो अब तक केवल राष्ट्रगान 'जन गण मन' को प्राप्त था। संशोधन लागू होने के बाद जानबूझकर वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालने या कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान राजनीति से ऊपर का विषय है। उनके अनुसार यह संशोधन किसी व्यक्ति या विचारधारा के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम की भावना के सम्मान में लाया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 में बने प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान को कानूनी संरक्षण दिया गया था, लेकिन राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को इसमें शामिल नहीं किया गया था। नया संशोधन इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।
‘वंदे मातरम् का विरोध 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' सोच को बढ़ावा’
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समझ से परे है कि कुछ राजनीतिक दल 'वंदे मातरम्' का विरोध क्यों कर रहे हैं।
राय ने कहा, "वंदे मातरम् का विरोध 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' गैंग के मनोबल को बढ़ाने जैसा है। देश का नौजवान, किसान, महिलाएं, मजदूर, बेटे-बेटियां और हर सच्चा देशभक्त ऐसी सोच को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। देश की जनता ऐसे लोगों को सबक भी सिखाएगी।"
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क्या है 'वंदे मातरम्' संशोधन विधेयक?
यह विधेयक प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव है। वर्तमान कानून में केवल राष्ट्रगान 'जन गण मन' के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालना या उसे रोकना दंडनीय अपराध है। संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को भी इसी कानून के दायरे में लाया जाएगा।
अर्थात यदि किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् का गायन हो रहा हो और कोई व्यक्ति जानबूझकर उसे रोकने, बाधित करने या कार्यक्रम में अवरोध उत्पन्न करने का प्रयास करे, तो उसके खिलाफ भी वही कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी जो अभी राष्ट्रगान के मामले में लागू होती है।
सरकार ने इसलिए इस संशोधन को बताया जरूरा
सरकार ने विधेयक के उद्देश्य और कारणों में कहा है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि राष्ट्रगान 'जन गण मन' होगा, जबकि 'वंदे मातरम्' को समान सम्मान प्राप्त रहेगा। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय गीत को संवैधानिक सम्मान तो मिला, लेकिन उसके अनुरूप स्पष्ट कानूनी संरक्षण नहीं था। यही कारण है कि अब कानून में संशोधन कर इस कमी को दूर किया जा रहा है।
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'वंदे मातरम्' के दौरान खड़ा होना अनिवार्य नहीं
विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं जोड़ा गया है जिससे प्रत्येक व्यक्ति के लिए वंदे मातरम् के दौरान खड़ा होना, गीत गाना या किसी समारोह में शामिल होना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाए। संशोधन केवल उन मामलों पर लागू होगा, जहां कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकता है या कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न करता है।
'जानबूझकर' शब्द सबसे महत्वपूर्ण, सजा व जुर्माना भी
इस संशोधन का सबसे अहम आधार 'जानबूझकर' (Intentionally) शब्द है। किसी भी मामले में पुलिस और अदालत को यह साबित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति का उद्देश्य वास्तव में राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालना या कार्यक्रम को रोकना था।
यदि तकनीकी खराबी, ध्वनि व्यवस्था में समस्या, अनजाने में हुई गलती या सामान्य अव्यवस्था के कारण कार्यक्रम प्रभावित होता है, तो हर घटना स्वतः अपराध नहीं मानी जाएगी। प्रत्येक मामले का फैसला उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर होगा।
यदि अदालत किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालने या कार्यक्रम बाधित करने का दोषी पाती है, तो उसे अधिकतम तीन वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। यही दंड प्रावधान वर्तमान में राष्ट्रगान के अपमान से जुड़े मामलों में भी लागू है।
इन जगहों पर दिखेगा कानून का असर
- स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान यदि वंदे मातरम् का गायन हो रहा हो और कोई व्यक्ति जानबूझकर उसमें व्यवधान उत्पन्न करे, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
- सरकारी समारोहों, राष्ट्रीय पर्वों और अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के दौरान जानबूझकर बाधा डालना कानून के दायरे में आ सकता है।
- सांस्कृतिक आयोजनों, सामाजिक समारोहों और सार्वजनिक मंचों पर होने वाले सामूहिक वंदे मातरम् गायन के दौरान जानबूझकर कार्यक्रम बाधित करने वालों पर भी यह कानून लागू हो सकेगा।
- कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का गायन करते हैं। ऐसे आयोजनों में यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर हंगामा कर कार्यक्रम रुकवाता है, तो इस संशोधन के तहत कार्रवाई की जा सकती है>
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हर विवाद में दर्ज नहीं होगी FIR
किसी भी घटना में केवल विवाद होना पर्याप्त नहीं होगा। जांच एजेंसियों को यह स्थापित करना होगा कि राष्ट्रीय गीत के गायन में व्यवधान जानबूझकर उत्पन्न किया गया था। तकनीकी कारण, अनजाने में हुई गलती या सामान्य अव्यवस्था जैसी परिस्थितियों में हर मामला स्वतः अपराध नहीं माना जाएगा। प्रत्येक प्रकरण की अलग-अलग जांच और कानूनी परीक्षण होगा।
अब आगे क्या ?
राज्यसभा से पारित होने के बाद विधेयक को कानून बनने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसे लोकसभा पहले में पास करना होगा। अगला चरण राष्ट्रपति की स्वीकृति और राजपत्र (गजट) में अधिसूचना का होगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह संशोधन कानून के रूप में प्रभावी होगा।
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