पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) पर प्रसंगवश : धरती को पानीदार बनाएं, आइए, धरती बचाएं !

विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) के मौके पर प्रो. अज़हर हाशमी ने पनी इस कविता के माध्यम से बड़ी सीख दी है धरती बचाने की। आइये, जानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते प्रदूषण के कारण मरूस्थल की ओर बढ़ती हमारी धरती और हमारी सांसों को हम कैसे बचा सकते हैं।

Apr 22, 2024 - 20:35
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पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) पर प्रसंगवश : धरती को पानीदार बनाएं, आइए, धरती बचाएं !
आइए, धरती बचाएं !

आइए, धरती बचाएं !

बड़ी - बड़ी ‘बातों’ से

150

नहीं बचेगी धरती

500
200

वह बचेगी

छोटी - छोटी कोशिशों से

मसलन

हम

नहीं फेंकें कचरा

इधर - उधर

स्वच्छ रहेगी धरती

हम / नहीं खोदें गड्ढ़े

धरती पर

स्वस्थ रहेगी धरती

हम / नहीं होने दें उत्सर्जित

विषैली गैसें

प्रदूषणमुक्त रहेगी धरती

हम / नहीं काटें जंगल

पानीदार रहेगी धरती

धरती को पानीदार बनाएं

आइए, धरती बचाएं !

अज़हर हाशमी

कवि, साहित्यकार, चिंतक, प्रोफेसर

(कविता हिंदी दैनिक ‘पत्रिका’ समाचार पत्र से साभार)

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।