ये कैसी विडंबना ! भाजपा विधायक को कलेक्ट्रेट की साढ़ियों पर बैठकर करना पड़ा कलेक्टर का इंतजार, सख्त लहजे में प्रशासन को दी यह चेतावनी...

रतलाम जिले में अफसरों पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। पहले भाजपा से जिला पंचायत अध्यक्ष और अब आलोट विधायक को कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर बैठकर कलेक्टर का इंतजार करने का मामला सुर्खियों में है।

Apr 4, 2026 - 17:27
Apr 4, 2026 - 18:29
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ये कैसी विडंबना ! भाजपा विधायक को कलेक्ट्रेट की साढ़ियों पर बैठकर करना पड़ा कलेक्टर का इंतजार, सख्त लहजे में प्रशासन को दी यह चेतावनी...
डॉ. चिंतामणि मालवीय, भाजपा विधायक, आलोट

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मप्र के रतलाम जिले में एक बार फिर भाजपा नेता और जनप्रतिनिधि को कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर बैठकर कलेक्टर का इंतजार करना पड़ा। ये कोई सामान्य जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि आरक्षित विधानसभा सीट आलोट के विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय हैं जो यहां किसानों के साथ ज्ञापन देने पहुंचे थे। उन्हें और उनके समर्थकों को करीब आधा घंटा तक कलेक्टर का इंतजार करना पड़ा। इससे पहले जिला पंचायत अध्यक्ष लालाबाई को तो धरना तक देना पड़ा था।

घटना शनिवार की है। आलोट विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय किसानों के साथ ज्ञापन देने के लिए जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। वे कलेक्टर को ज्ञापन देना चाह रहे थे लेकिन कलेक्टर मिशा सिंह ने उन्हें अपने चैंबर में आने के लिए कहां लेकिन उनके समर्थक इसके लिए सहमत नहीं हुए। समर्थकों की नाराजगी पर विधायक कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर ही बैठ गए और इंतजार करने लगे। उन्होंने कहा कि जानता से जुड़ा मामला है इसलिए बातचीत भी जनता के बीच ही होगी। करीब आधा घंटे बाद कलेक्टर सिंह खुद ही कार्यालय के बाहर आईं और उन्होंने विधायक डॉ. मालवीय से ज्ञापन लिया। विधायक ने उन्हें क्षेत्र और किसानों से जुड़ी समस्याएं बताई। विधायक ने सख्त लहजे में कहा कि यदि किसानों की बात नहीं सुनी गई, तो ‘जिंदाबाद’ के नारे ‘मुर्दाबाद’ में बदल सकते हैं।

यह है मामला

विधायक डॉ. मालवीय के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में बताया गया है कि उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड परियोजना के तहत बन रहे एक्सप्रेस हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण की जा रही है। इसमें दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर शिकायतें आ रही हैं जिससे किसान परेशान हैं। इसलिए किसानों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए लेकिन जिम्मेदारों द्वारा उनकी उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि जब तक किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक हाईवे का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।

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जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ भी हो चुका ऐसा

बता दें कि, बीते पखवाड़े जिला पंचायत अध्यक्ष लालाबाई पति शंभुलाल के साथ कलेक्टर से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचीं थी। तब मुलाकात के लिए कलेक्टर से समय नहीं मिला था। इससे नाराज होकर वे कलेक्टर कार्यालय में ही धरने पर बैठ गईं थी। सोशल मीडिया में यह बात वायरल हुई तो अन्य अधिकारी उन्हें समझाने पहुंचे थे। अगले दिन भाजपा जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय जिला पंचायत अध्यक्ष लालाबाई को अपने साथ लेकर कलेक्टर से मिलने पहुंचे थे और चर्चा के बाद मामला शांत हुआ था। 15 दिन से भी कम अवधि में भाजपा के ही निर्वाचित जनप्रतिनिधि का इस तरह कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर बैठकर कलेक्टर का इंतजार करने का मामला भी तूल पकड़ रहा है। इसे लेकर विपक्ष तो सवाल उठा ही रहा है, सत्ता में काबिज भाजपा के लोग भी कटाक्ष करने से नहीं चूक रहे। वहीं ऐसा कहने वालों की भी कमी नहीं है कि सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों को यदि ज्ञापन देना है या अधिकारी से मिलना है तो वे संगठन के उन प्रमुखों को बताकर ऐसा कदम उठाएं जिन्हें समन्वय की जिम्मेदारी मिली है।

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Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।