रतलाम ब्रेकिंग न्यूज ! धोखाधड़ी में माहिर कॉलोनाइजर मनीष सुराना को 3 साल के सश्रम कारावास की सजा, नगर निगम में बंधक प्लॉट बेचने के डेढ़ दशक पुराने मामले में मिला न्याय

रतलाम की एक न्यायालय ने धोखाधड़ी से जुड़े डेढ़ दशक पुराने एक मामले में कॉलोनाइजर मनीष सुराना को 3 साल की सजा सुनाई है। सुराना ने बिना अनुमति नगर निगम में बंधक रखे 17 भूखंड और भवन बेचकर धोखाधड़ी की थी।

Apr 2, 2026 - 20:04
Apr 2, 2026 - 20:45
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रतलाम ब्रेकिंग न्यूज ! धोखाधड़ी में माहिर कॉलोनाइजर मनीष सुराना को 3 साल के सश्रम कारावास की सजा, नगर निगम में बंधक प्लॉट बेचने के डेढ़ दशक पुराने मामले में मिला न्याय
जालसाज कॉलोनाइजर मनीष सुराना को धोखाधड़ी मामले में 3 साल की सजा।

न्यायालय ने 22 हजार रुपए किया जुर्माना, नगर निगम के अधिकारी दोषमुक्त

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी प्रगति असाटी ने धोखाधड़ी में माहिर कॉलोनाइजर मनीष पिता पूनमचंद्र को धोखाधड़ी के तीन साल के सश्रम कारावास की सजा से दंडित है। न्यायालय ने अभियुक्त को अलग-अलग धाराओं में 22 हजार रुपए अर्थदंड भी सुनाया है। सुराना को नगर निगम में बंधक रखे गए प्लॉट बिना अनुमति लिए ही बेचने के मामले में दंडित किया गया है।

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प्रभारी सहायक निदेशक अभियोजन योगेश कुमार तिवारी ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र थाना रतलाम रतलाम के थाना प्रभारी द्वारा एसपी का पत्र क्रमांक पु.अ./रत/रीडर /3946-ए/ दिनांक 09.06.2010 प्राप्त हुआ था। पत्र के साथ आवेदक भगवतीलाल पिता श्यामसुन्दर सोनी, निवासी चांदनी चैक रतलाम के आवेदन की छायाप्रति, नगर निवेश कार्यालय रतलाम की समिति की रिपोर्ट भी उपलब्ध करवाई गई थी। उक्त पत्र में गोपाल नगर कॉलोनी ग्राम राजगढ़ के कॉलोनाइजर मनीष पिता पूनमचन्द्र सुराना उम्र 42 निवासी 19 बिचलावास रतलाम द्वारा किए गए फर्जीवाड़े का ब्योरा दिया गया था। इसमें बताया गया था कि कॉलोनाइजर द्वारा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा स्वीकृत नक्शे से विपरित सार्वजनिक उपयोग हेतु छोड़ी गई भूमि पर अवैध निर्माण करवाकर अवैध लाभ अर्जित किया गया है। इसके चलते तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक एस. आर. पाटीदार ने आरोपी मनीष के विरूद्ध अपराध क. 308/10 धारा 420 भादवि का पंजीबद्ध कर प्रकरण के अनुसंधान में लिया था।

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बगीचे और रास्ते की जमीन पर भी कर दिया निर्माण

पुलिस द्वारा किए गए अनुसंधान में पाया गया कि आरोपी गोपालनगर कॉलोनी के लिए सर्वे नम्बर 102/1 व 102/2 के स्वीकृत अभिन्यास के अनुसार कुल रकबा 0.470 हेक्टर में से 0.050 हेक्टर (497 वर्ग मीटर) बगीचे के लिए आरक्षित की गई थी। किन्तु कॉलोनाइजर मनीष सुराना ने बगीचे तथा रास्ते की 1400 वर्गफीट भूमि पर छत विहीन निर्माण किया। कालोनी की सड़क की चौड़ाई भी 24 फीट 06 इंच के स्थान पर 20.9 फीट की बनाकर 4 फीट कम कर दी गई। स्वीकृत अभिन्यास अनुसार भूखण्ड की चैड़ाई 11 फीट तथा लंबाई 45 फीट को बदल कर विभिन्न चैड़ाई में विभक्त कर भूखण्डों के आगे व पीछे 8 फीट व 5 फीट खुला सीमांत क्षेत्र नहीं छोड़ और सम्पूर्ण भूखण्ड पर निर्माण कर दिया।

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17 भूखण्ड और भवन रखे थे बंधक, सभी बेच दिए

आरोपी मनीष सुराना द्वारा गोपाल नगर के कुल भूखण्डों में से 25 प्रतिशत अर्थात 17 भूखण्ड और भवन सरल क्रमांक 13 से 17 तथा 42 से 49 तक नगर निगम में बंधक रखे गए थे। उक्त बंधक भूखण्डों को अनाधिकृत रूप से बंधक मुक्त करवाए बिना भूखण्डों को विक्रय कर दिया गया। साक्षी धर्मराज यादव, रेखा दुबे, सलामत खान, कृष्णवल्लभ शर्मा तथा समिति के सदस्य उपयंत्री नगर निगम रतलाम अनवर कुरैशी, पटवारी निनामा, राजस्व निरीक्षक भेरूलाल रावल के कथन लिए गए। अनुसंधान के दौरान नगर निगम रतलाम से बंधक भूखण्डों के नामांतरण तथा भवन निर्माण की अनुमति की जानकारी बंधकनामा की प्रमाणित प्रति भी प्राप्त की गई।

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न कॉलोनी का निर्माण पूरा हुआ न ही बंधक प्लॉट मुक्त हुए

जिला पंजीयक कार्यालय रतलाम से बंधक भूखण्डों को आरोपी मनीष सुराना द्वारा विक्रय करने की रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रतिलिपियां प्राप्त की गईं। इसमें पता चला कि बंधक भूखण्डों को नगर निगम रतलाम के अधिकारी आरोपी संदेश शर्मा, जी. के. जायसवाल तथा ओमप्रकाश शर्मा द्वारा बंधक रखे गए भूखण्डों पर भवन निर्माण की अनुमति व नामांतरण किया गया। आरोप था कि अधिकारियों ने यह कृत्य कॉलोनी का निर्माण पूरा हुए बिना और बंधक भूखण्ड मुक्त हुए बिना ही आरोपी मनीष सुराना के के षड्यंत्र में शामिल होकर बंधक भूखण्डों पर भवन निर्माण की अनुमति जारी कर दी और नामान्तरण भी करवा दिया जोकि धारा 120बी भादंवि की श्रेणी में आपराधिक कृत्य है।

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इन धाराओं का भी हुआ प्रकरण में इजाफा

अभियोजन के अनुसार आरोपी संदेश शर्मा, गिरिराज कुमार जायसवाल तथा ओमप्रकाश शर्मा की गिरफ्तारी की आवश्कता नहीं होने से दिनांक 08.05.2018 को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए धारा 41 (क) जाफ्ता फौजदारी का सूचना-पत्र तामील करवाया गया। इसके साथ ही प्रकरण में धारा 420 के साथ ही धारा 120 बी भादवि तथा धारा 293 म.प्र. नगर निगम अधिनियम, धारा 36घ म.प्र. नगर एवं निवेश अधिनियम 1973, धारा 292-सी म.प्र. कॉलोनाइजर एक्ट भी बढ़ाई गई थी। पुलिस ने पूरी विवेचना के बाद न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। जहां अभियोजन पक्ष की ओर से करवाए गए 12 साक्ष्य एवं दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर न्यायालय को अभियुक्त मनीष पिता पूनमचन्द्र सुराना (42) निवासी 19 बिचलावास रतलाम को दोषी पाया और सजा सुनाई। वहीं अन्य आरोपियों गिरिराज कुमार जायसवाल, संदेश शर्मा तथा ओमप्रकाश शर्मा को दोषमुक्त कर दिया।

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किस धारा में क्या सजा मिली

न्यायालय ने अभियुक्त मनीष सुराना को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420 में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपए सुनाया है। इसक अलावा धारा 201 में 06 माह का सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपए जुर्माना किया गया। म.प्र नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के तहत धारा 292 सी में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपए के जुर्माने से एवं धारा 36 में 4 माह का सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपए के जुर्माने से भी दण्डित किया गया है। मामले में शासन की ओर से सफल पैरवी एडवोकेट हेमंत राठौर ने की।

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Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।