ब्रेकिंग न्यूज ! रतलाम मेडिकल कॉलेज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि, सीधे मुख्य ग्रिड से जुड़ेगा संस्थान; 132 kV EHV सब-स्टेशन को मिली हरी झंडी
रतलाम मेडिकल कॉलेज को 132kV EHV सब-स्टेशन की स्वीकृति, करोड़ की इस परियोजना से 24x7 बिजली, ICU-OT में जीरो पावर कट और हाई कैपेसिटी सप्लाई।
-विद्युत वितरण कंपनी के असिस्टेंट इंजीनियर ओमप्रकाश पिपरीवाल की 'शक्ति भवन' में दमदार पैरवी लाई रंग
-'पावर प्रोजेक्ट' मेडिकल कॉलेज को बनाएगा बिजली के मामले में पूरी तरह 'आत्मनिर्भर'
नीरज कुमार शुक्ला
एसीएन टाइम्स @ रतलाम। रतलाम के स्व. डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय मेडिकल कॉलेज के लिए एक बड़ी और असाधारण उपलब्धि सामने आई है। मेडिकल कॉलेज परिसर में अब जिले का पहला ऐसा समर्पित (Dedicated) 132 kV EHV (Extra High Voltage) सब-स्टेशन स्थापित होगा, जो सीधे मुख्य ट्रांसमिशन नेटवर्क से जुड़ेगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए जबलपुर स्थित मुख्यालय 'शक्ति भवन' में उच्च स्तरीय तकनीकी प्रेजेंटेशन के बाद हरी झंडी मिल गई है।
मप्र पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के सहायक अभियंता ओमप्रकाश पिपरीवाल ने जबलपुर स्थित MPPTCL () मुख्यालय ‘शक्ति भवन’ में इस प्रोजेक्ट का तकनीकी खाका पेश किया। प्रस्तुतिकरण के दौरान MPPTCL (Madhya Pradesh Power Transmission Company Limited) और MPPMCL (Madhya Pradesh Power Management Company Limited) के कार्यकारी निदेशक (ED) भी मौजूद रहे। पिपरीवाल द्वारा दी गई दलीलों और मेडिकल कॉलेज की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए, आला अधिकारियों ने उनके प्रेजेंटेशन की सराहना की अपितु उसे मंजूरी भी प्रदान की।
क्यों खास है यह 132 kV सब-स्टेशन?
आमतौर पर बड़े संस्थानों को 33 kV का सब-स्टेशन दिया जाता है, लेकिन 132 kV (1,32,000 वोल्ट) का मतलब है कि अब मेडिकल कॉलेज बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) के बजाय सीधे ट्रांसमिशन कंपनी MPPTCL से बिजली लेगा। यह किसी VIP संस्थान को मिलने वाली सुविधा जैसी है।
- अबाधित बिजली (N-1 Reliability) : इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अस्पताल में बिजली कटने की संभावना लगभग 'जीरो' हो जाएगी। यदि मुख्य लाइन में कोई फॉल्ट आता है, तो यह सिस्टम तुरंत दूसरे रूट से बिजली खींच लेगा।
- स्वतंत्र व्यवस्था : यह सब-स्टेशन शहर की सामान्य लोड शेडिंग या स्थानीय खराबियों से पूरी तरह मुक्त होगा। मेडिकल कॉलेज की अपनी स्वतंत्र बिजली व्यवस्था होगी।
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अनुमानित बजट और निर्माण लागत
पूरे प्रोजेक्ट को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है, जिसकी कुल लागत ₹40 से ₹60 करोड़ के बीच रहने का अनुमान है। इसमें अंतर संभावित है।
- सब-स्टेशन निर्माण (₹25 - ₹35 करोड़) : इसमें 132 kV के महंगे पावर ट्रांसफार्मर (एक की कीमत ₹5-8 करोड़), सर्किट ब्रेकर्स, आइसोलेटर्स और अत्याधुनिक कंट्रोल रूम का निर्माण शामिल है।
- ट्रांसमिशन लाइन (₹15 - ₹25 करोड़) : मुख्य बिजली ग्रिड से कॉलेज तक LILO (Loop-In Loop-Out) लाइन बिछाने के लिए ऊंचे टावर लगाए जाएंगे। इसमें निजी खेतों से गुजरने वाली लाइन के लिए किसानों को दिया जाने वाला मुआवजा भी शामिल है। समय-सीमा: इस पूरे सिस्टम को तैयार होने में 18 से 24 महीने का समय लगेगा।
मेडिकल कॉलेज और मरीजों को होने वाले सीधे लाभ
- क्रिटिकल केयर : ऑपरेशन थिएटर (OT) और ICU में एक सेकंड का पावर कट भी जानलेवा हो सकता है। अपना सब-स्टेशन होने से यह खतरा खत्म हो जाएगा।
- महंगे उपकरणों की सुरक्षा : अस्पताल की करोड़ों की मशीनें (MRI, CT स्कैन, वेंटिलेटर) अब वोल्टेज कम-ज्यादा होने (Fluctuation) के कारण खराब नहीं होंगी।
- सीटों का विस्तार : कॉलेज में सीटें बढ़ाने में सहूलियत होगी। भविष्य के इस विस्तार और नए रिसर्च सेंटरों के लिए भारी और स्थिर बिजली की आवश्यकता होगी जो इस प्रोजेक्ट से पूरी हो सकेगी।
- आस-पास के इलाकों को राहत : कॉलेज का लोड शिफ्ट होने से पास की बस्तियों और कॉलोनियों में बिजली की ट्रिपिंग भी कम होगी।
बिजली मानचित्र पर रतलाम की स्थिति
एक जानकारी के अनुसार वर्तमान में रतलाम जिले में 132 kV और 220 kV क्षमता के प्रमुख केंद्र रतलाम मुख्य, आलोट, ताल, जावरा, सैलाना और स्वीकृत नया ग्रिड ढोढर हैं। मेडिकल कॉलेज जिले का पहला ऐसा संस्थान होगा जिसके पास अपनी इतनी बड़ी क्षमता का ग्रिड होगा। यह निवेश अगले 40-50 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है।





