मौत के लिए छोड़ा था लेकिन... पुलिया के अंधेरे पाइप से आई किलकारी... मौत के मुंह से जिंदा निकला नवजात

रतलाम के ग्राम मथुरी में पुलिया के नीचे पानी के पाइप में बोरी और प्लास्टिक में लिपटा नवजात जीवित मिला। किसान अंबाराम पाटीदार की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से मासूम की जान बच गई। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अस्पतालों के रिकॉर्ड खंगाल रही है।

मौत के लिए छोड़ा था लेकिन... पुलिया के अंधेरे पाइप से आई किलकारी... मौत के मुंह से जिंदा निकला नवजात
पुलिया के पाइप के नीचे से जीवित मिला नवजात बालक।

रतलाम के मथुरी क्षेत्र में पुलिया के नीचे पाइप में मिला बोरी और प्लास्टिक में लिपटा मासूम; किसान की सतर्कता बनी जीवनदान

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । कुछ कहानियां लिखी नहीं जातीं, वे घटनाएं बनकर समाज की अंतरात्मा को झकझोर देती हैं। रविवार की सुबह रतलाम जिले के ग्राम मथुरी में जो दृश्य सामने आया, उसने इंसानियत, मातृत्व और समाज- तीनों से एक साथ कई सवाल पूछ दिए। एक नवजात, जिसने शायद अभी अपनी मां का चेहरा भी ठीक से नहीं देखा था, उसे बोरी और प्लास्टिक की थैली में बंद कर पुलिया के नीचे बने पानी के पाइप में इस तरह छोड़ दिया गया, मानो वह कोई निर्जीव वस्तु हो।

लेकिन शायद उस मासूम की सांसें अभी बाकी थीं। उसकी हल्की-सी किलकारी मौत के सन्नाटे को चीरते हुए एक किसान के कानों तक पहुंच गई और वहीं से उसकी जिंदगी ने फिर करवट ले ली।

रविवार सुबह करीब 10 बजे ग्राम मथुरी निवासी किसान अंबाराम पाटीदार अपने खेत की ओर जा रहे थे। रिंग रोड चौराहे के पास घोड़ाखेड़ा रोड स्थित पुलिया के समीप पहुंचते ही उन्हें किसी बच्चे के रोने जैसी आवाज सुनाई दी। पहले उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि इस सुनसान जगह पर बच्चे की आवाज कैसे आ सकती है। उन्होंने आसपास तलाश शुरू की, लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया। आवाज लगातार पानी के पाइप की दिशा से आ रही थी।

जब अंबाराम पाइप के पास पहुंचे तो भीतर एक बारदान (बोरी) पड़ा दिखाई दिया। संदेह होने पर उन्होंने बोरी बाहर निकाली। जैसे ही उसे खोला गया, भीतर प्लास्टिक की थैली में लिपटा एक नवजात बालक जीवित मिला। वह रो रहा था... शायद इसलिए कि उसे जीना था।

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...वरना मासूम का बच पाना मुश्किल था

ग्रामीणों कह रहे हैं कि- बच्चे की गर्भनाल (जिला चिकित्सकीय भाषा में अंबिलिकल कॉर्ड कहते हैं) तक नहीं कटी थी। इससे साफ हैं कि उसका जन्म कुछ ही समय पहले हुआ था। आशंका है कि जन्म के तुरंत बाद ही उसे यहां लाकर छोड़ दिया गया, शायद मरने के लिए। यदि कुछ और देर हो जाती, तो बारिश, दम घुटने या किसी जानवर के हमले से उस मासूम का बच पाना बेहद मुश्किल था।

यह दृश्य देखकर अंबाराम पाटीदार ने बिना समय गंवाए गांव के गिरधारी चौधरी, मुकेश पाटीदार और सुनील राठौड़ को सूचना दी। गिरधारी चौधरी ने तत्काल डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही डीडी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात को तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों की देखरेख में उसका उपचार जारी है और फिलहाल उसकी हालत सुरक्षित बताई जा रही है।

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बच्चे की हालत स्थिर

अब पुलिस उस शख्स तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिसने इस मासूम को मौत के भरोसे छोड़ दिया। डीडी नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव के अनुसार बच्चे की हालत स्थिर है। आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही निजी और सरकारी अस्पतालों तथा प्रसूति केंद्रों से हाल ही में हुए प्रसव का रिकॉर्ड भी एकत्र किया जा रहा है, ताकि बच्चे को छोड़ने वाले व्यक्ति या परिजनों की पहचान की जा सके।

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक संवेदनाओं की भी परीक्षा है। एक तरफ किसी ने जन्म लेते ही इस मासूम को दुनिया से छीन लेने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर एक किसान की सजगता, ग्रामीणों की तत्परता और पुलिस की तेजी ने उसे नया जीवन दे दिया।

बड़ा सवाल- आखिर यह कैसी सजा ?

उस मासूम का कोई नाम नहीं है, कोई पहचान नहीं है। लेकिन रविवार की सुबह उसने पूरे समाज को एक सवाल जरूर दे दिया- क्या किसी नवजात को इस दुनिया में आने की सजा मौत हो सकती है?

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