जैन संत से बोलीं मेनका गांधी- ‘मयूर पिच्छी के लिए 15 लाख मोर मारे गए’, भड़का जैन समाज, देशभर में हो रही माफी मांगने की मांग

मेनका गांधी द्वारा जैन साधुओं की मयूर पिच्छी पर की गई टिप्पणी और मोरों की हत्या के आरोपों को लेकर देशभर में जैन समाज में आक्रोश है। जैन संगठनों ने आरोपों को निराधार बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है।

जैन संत से बोलीं मेनका गांधी- ‘मयूर पिच्छी के लिए 15 लाख मोर मारे गए’, भड़का जैन समाज, देशभर में हो रही माफी मांगने की मांग
मेनका गांधी द्वारा मयूर पिच्छी को लेकर दिए गए विवादित बयान से जैन समाज में आक्रोश।

जैन संगठनों ने आरोपों को बताया तथ्यहीन; बोले- अहिंसा के सिद्धांत पर चलने वाले संतों को बदनाम करने का प्रयास, धार्मिक भावनाएं आहत

एसीएन टाइम्स @ नई दिल्ली । पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी द्वारा जैन साधुओं की मयूर (मोरपंख) पिच्छी को लेकर दिए गए बयान के बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया है। मेनका गांधी का कहना है कि पिच्छी के लिए बड़ी संख्या में मोरों की हत्या की जाती है, इस कारण करीब 15 लाख मोर मारे गए हैं। इस बयान से जैन समाज, संत समुदाय और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों में जबरदस्त नाराजगी है।

जानकारी के अनुसार मेनका गांधी संत श्री सौरभ सागर महाराज के पास पहुंची थी उनके तथा अन्य दिगंबर जैन साधुओं द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी को लेकर टिप्पणी की थी। इस दौरान सांतश्री ने स्थिति स्पष्ट भी करना चाही लेकिन मेनका गांधी ने उन्हें बोलने भी नहीं दिया और पिच्छी के लिए 15 लाख मोरों की हत्या होने तथा नियम-कानून का हवाला देने लगीं। उनकी इस चर्चा का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते ही हंगामा मच गया।

मेनका गांधी के इस बयान के सामने आने के बाद से मामले ने तूल पकड़ लिया है। जैन समाज और साधु-संतों ने इस पर तीखी प्रतिक्राय व्यक्त करते हुए पिच्छी के लिए मोरों की हत्या के आरोप को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और जैन धर्म की मूल भावना के विपरीत बताया है। समाज ने मेनका गांधी से बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की है।

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क्या होती है मयूर पिच्छी?

दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी जैन परंपरा का महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक मानी जाती है। इसका उपयोग किसी जीव को हटाने या बैठने के स्थान को हल्के से साफ करने के लिए किया जाता है ताकि किसी सूक्ष्म जीव की भी हिंसा न हो। जैन धर्म में इसे अहिंसा, करुणा, संयम और जीव दया का प्रतीक माना जाता है।

मोरों को मारकर नहीं बनाई जाती पिच्छी- जैन समाज

मेनका गांधी के आरोपों के बाद जैन समाज ने स्पष्ट किया है कि मयूर पिच्छी मोरों को मारकर नहीं बनाई जाती। समाजजन के अनुसार प्रत्येक वर्ष प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत अक्टूबर-नवंबर के दौरान मोरों के पंख स्वयं झड़ जाते हैं। इन्हीं प्राकृतिक रूप से गिरे हुए पंखों को एकत्रित कर पारंपरिक विधि से पिच्छी तैयार की जाती है।

जैन संतों और संगठनों का कहना है कि जिस धर्म का मूल आधार ही अहिंसा है, वह किसी भी जीव की हत्या को स्वीकार नहीं कर सकता।

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भगवान महावीर देशना फाउंडेशन ने भेजा औपचारिक पत्र

मामले को लेकर भगवान महावीर देशना फाउंडेशन के निदेशक मनोज कुमार जैन ने मेनका गांधी को एक औपचारिक पत्र भेजकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। फाउंडेशन ने कहा है कि इस बयान से देशभर के जैन समाज, विशेषकर दिगंबर जैन संत समुदाय तथा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मयूर पिच्छी केवल प्राकृतिक रूप से झड़े हुए मोरपंखों से बनाई जाती है और इसका उद्देश्य सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना तथा जैन धर्म के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा’ का पालन करना है।

मोरपंख भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक

जैन समाज का तर्क है कि मोरपंख केवल जैन परंपरा में ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति में भी अत्यंत पवित्र माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में सुशोभित मोरपंख भारतीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे में बिना पर्याप्त प्रमाण के लगाए गए आरोप समाज में भ्रम उत्पन्न करने के साथ धार्मिक भावनाओं को भी आहत कर सकते हैं।

समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि किसी धार्मिक परंपरा को लेकर कोई शंका थी तो पहले संबंधित समुदाय और विषय विशेषज्ञों से चर्चा की जानी चाहिए थी।

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सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया

विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में जैन समाज के लोगों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई लोगों ने मेनका गांधी के बयान को तथ्यों से परे बताते हुए इसकी आलोचना की है, जबकि कुछ लोगों ने इसे अनावश्यक विवाद पैदा करने वाला बयान बताया है।

लोगों का कहना है कि मेनका गांधी ने अपनी ओर ध्यान खींचने के उद्देश्य से यह अनर्गल बात कही है। इसके लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।