रतलाम में पहली बार निकली आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती की भव्य शोभायात्रा, दिव्य चातुर्मास महोत्सव का शुभारंभ
रतलाम में पहली बार निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री 1008 विशोकानंद भारती जी महाराज की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। दिव्य चातुर्मास महोत्सव के तहत 26 सितंबर तक अखंड ज्ञान आश्रम में स्वाध्याय, श्रीमद्भागवत कथा और दिव्य प्रवचन होंगे।
करीब 30 सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत, 26 सितंबर तक अखंड ज्ञान आश्रम में होंगे स्वाध्याय, श्रीमद्भागवत कथा और दिव्य प्रवचन
एसीएन टाइम्स @ रतलाम। निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर, आचार्य महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी श्रीश्री 1008 विशोकानंद भारती जी महाराज के दिव्य चातुर्मास महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को रतलाम में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में हुआ। इस अवसर पर शहर में पहली बार उनकी भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यात्रा मार्ग पर विभिन्न समाजों एवं सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर संत समाज का आत्मीय स्वागत किया।
शोभायात्रा का शुभारंभ माणक चौक स्थित श्री गोपालजी के बड़े मंदिर से हुआ। इससे पूर्व स्वामी श्री 1008 विशोकानंद भारती जी महाराज मंदिर पहुंचे, जहां मंदिर समिति ट्रस्ट ने पुष्पमालाएं पहनाकर एवं सम्मान-पत्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया। शोभायात्रा में अखंड ज्ञान आश्रम के स्वामी देव स्वरूपानंद जी, दो मुंह की बावड़ी मठ के स्वामी आत्मानंद सरस्वती जी, स्वामी शिवानंद जी (सुजापुर), नील भारती जी, पंडित नारायण प्रसाद शर्मा (शाजापुर), गोपाल गौशाला के गोशरणानंद जी महाराज तथा महर्षि संजय चैतन्य ब्रह्मचारी सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
शोभायात्रा में भाजपा जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, रतलाम विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, प्रवीण सोनी, पूर्व महापौर शैलेंद्र डागा, प्रेमलता दवे, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष बजरंग पुरोहित सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए।
घुड़सवार, बैंड और भक्ति नृत्य बने आकर्षण
शोभायात्रा में सबसे आगे ध्वज लिए घुड़सवार आकर्षण का केंद्र रहे। उनके पीछे बैंड की मधुर धुनों पर महिलाएं एवं पुरुष श्रद्धालु भक्ति-भाव से नृत्य करते हुए चल रहे थे। यात्रा के अंतिम रथ (बग्घी) में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री 1008 विशोकानंद भारती जी महाराज विराजमान थे। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। शोभायात्रा माणक चौक, डालुमोदी चौराहा, नाहरपुरा, धान मंडी, शहीद चौक एवं सैलाना बस स्टैंड होते हुए अखंड ज्ञान आश्रम पहुंची।
यात्रा मार्ग में सर्व ब्राह्मण समाज, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज, राजपूत समाज, खटीक समाज, सखवाल समाज, वाल्मीकि समाज सहित लगभग 30 सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
नाहरपुरा चौराहे पर श्री श्रीमाली ब्राह्मण समाज ने किया स्वागत
श्री श्रीमाली ब्राह्मण समाज, रतलाम द्वारा नाहरपुरा चौराहे पर निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी श्री श्री 1008 विशोकानंद भारती जी महाराज, उनके साथ पधारे संतों तथा शोभायात्रा का पुष्पवर्षा कर एवं पुष्पमालाएं पहनाकर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर समाज अध्यक्ष नयन व्यास, सचिव कुलदीप त्रिवेदी, उपाध्यक्ष प्रीति व्यास, सदस्य अखिलेश शर्मा, महिला मंडल अध्यक्ष रजनी व्यास, सचिव हंसा व्यास, कोकिला ओझा, संगीता व्यास, नीम व्यास, महेश ओझा, अजीत व्यास, जितेंद्र त्रिवेदी, प्रशांत व्यास, भूपेंद्र व्यास, अशोक दीक्षित, अनिल व्यास, धीरज व्यास, रौनक व्यास, सुधांशु व्यास, लोकेश व्यास सहित वरिष्ठजन, महिला मंडल एवं समाज के सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे।
प्रतिदिन होंगे स्वाध्याय, भागवत कथा और प्रवचन
अखंड ज्ञान आश्रम पहुंचने पर स्वामी श्री 1008 विशोकानंद भारती जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि दिव्य चातुर्मास महोत्सव के दौरान प्रतिदिन प्रातः 9 से 10 बजे तक कठोपनिषद पर स्वाध्याय तथा सायं 4 से 6 बजे तक श्रीमद्भागवत कथा एवं दिव्य प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत देवी महापुराण का विशेष आयोजन 17 सितंबर 2026 से प्रारंभ होगा। दिव्य चातुर्मास महोत्सव का आयोजन 31 जुलाई से 26 सितंबर 2026 तक अखंड ज्ञान आश्रम में किया जाएगा।
अखंड ज्ञान आश्रम के स्वामी देव स्वरूपानंद जी ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर चातुर्मास महोत्सव का आध्यात्मिक लाभ लेने का आग्रह किया।
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जानिए, कौन हैं स्वामी श्री 1008 विशोकानंद भारती जी महाराज
निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर एवं आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री 1008 विशोकानंद भारती जी महाराज राजस्थान के बीकानेर स्थित गुरु निर्वाण पीठ से जुड़े प्रमुख सनातन धर्माचार्य हैं। वे वैदिक सनातन परंपरा, पूज्य करपात्री जी महाराज एवं आदि शंकराचार्य की परंपरा में दीक्षित, शिक्षित एवं संस्कारित संत हैं तथा वर्णाश्रम धर्म के समर्थक माने जाते हैं।
स्वामी जी तीन विश्वविद्यालयों से तीन विषयों में आचार्य उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। वे राजस्थान प्रांत धर्माचार्य परिषद के अध्यक्ष, अखिल भारतीय गोस्वामी समाज के संरक्षक तथा विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य हैं। व्याकरण विषय में स्वर्ण पदक प्राप्त कर चुके स्वामी जी अपनी अनुशासित जीवनशैली, समय पालन और शास्त्रों पर गहन पकड़ के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
वे वेदांत, उपनिषद एवं पुराणों के गूढ़ विषयों पर सरल एवं मधुर शैली में प्रवचन देते हैं। शास्त्रार्थ एवं समीक्षा में उनकी विशेष रुचि रही है तथा उन्होंने पूज्य स्वामी वार पायिनी, शास्त्रार्थ महारथी माधवाचार्य, कालूराम शास्त्री एवं वामदेव जी के सानिध्य में अनेक शास्त्रार्थों में सहभागिता की है।
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14 वर्ष की आयु में परिव्राजक जीवन किया शुरू
महज 14 वर्ष की आयु में गुरुकुल प्रवेश के साथ उन्होंने परिव्राजक जीवन का आरंभ किया। उन्हें अनेक शंकराचार्यों, संतों एवं आनंदमयी मां जैसी महान विभूतियों का सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। वर्ष 1983 से वे कोलकाता में नियमित रूप से धर्मप्रचार कर रहे हैं और वहां तीन चातुर्मास संपन्न करा चुके हैं।
वर्तमान में रतलाम के अखंड ज्ञान आश्रम में उनके सानिध्य में चातुर्मास के दौरान स्वाध्याय, प्रवचन, कर्म, उपासना एवं ज्ञान पर आधारित नियमित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में देशभर में 62 धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं का संचालन हो रहा है। इनमें काशी का गोविंद मठ, अहमदाबाद का संन्यास आश्रम, हरिद्वार स्थित श्री यज्ञ मंदिर एवं सोमेश्वर धाम, बीकानेर का लगभग 200 वर्ष पुराना धूणीनाथ पंथ मठ, संस्कृत पाठशालाएं, महाविद्यालय तथा अनेक गौशालाएं प्रमुख हैं।
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