SAREE cost 49 thousand ! सुनकर यकीन नहीं हुआ न, यह देखना या खरीदना चाहती हैं तो आज ही पहुंच जाएं 'अपनी दुकान', 500 साल पुरानी ठप्पा छपाई वाली बेडशीट भी मिलेगी

SAREE cost 49 thousand : हस्तशिल्प प्रदर्शनी में पहली बार आई बेशकीमती साड़ी। 500 साल पुराना दाबू प्रिंट की साड़ी, बेडशीट और ड्रेस मटेरियल भी।

Oct 21, 2021 - 01:57
Dec 30, 2021 - 02:07
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SAREE cost 49 thousand ! सुनकर यकीन नहीं हुआ न, यह देखना या खरीदना चाहती हैं तो आज ही पहुंच जाएं 'अपनी दुकान', 500 साल पुरानी ठप्पा छपाई वाली बेडशीट भी मिलेगी
saree cost 49 thousand

रतलाम के रोटरी हॉल में आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी-2021 में दाबु और इंडिगो प्रिंट वाला ड्रेस मटेरियल

रतलाम @ एसीएन टाइम्स . अगर आप त्योहारी खरीददारी के लिए बाजार जाने वाली हैं तो एक बार 'अपनी दुकान' का चक्कर जरूर लगा लें। अरे! अपनी दुकान बोले तो रोटरी हाल में लग रही हस्तशिल्प प्रदर्शनी-2021, जहां कुछ यूनीक चीजें आपका इंतजार कर रही हैं। इनमें शामिल है 500 साल पुरानी ठप्पा छपाई वाली बेडशीट। आप यहां 49 हजार रुपए (SAREE cost 49 thousand) की कीमत वाली बेशकीमती साड़ी भी देख खरीद सकती हैं।

साड़ी की कीमत (SAREE cost 49 thousand) सुनकर यकीन नहीं हुआ न आपको ? हमें भी नहीं हुआ था जब तक कि हमने खुद अपनी आंखों से देख और हाथों से छू नहीं लिया था। साड़ी की यह कीमत इसको बनाने में लगे मटेरियल और मानव श्रम के कारण है। इसके निर्माता का दावा है कि यदि इस साड़ी को 50 साल तक भी सहेज कर रखा जाए तो इसका न तो रंग फीका पड़ेगा और न ही कीड़े इसे नुकसान पहुंचाएंगे। बनारस के परंपरागत बुनकरों द्वारा कटान शिल्क से तैयार पांच लेयर वाली इस साड़ी को पचमीना साड़ी भी कहते हैं। इसका वजन करीब 4 किलोग्राम है।

28 वर्षीय बुनकर मो. सूफियान ने बताया वे और उनके परिवार की कई पीढ़ियां बुनकर ही हैं। वे खुद 8 साल से बनारसी साड़ियां बना रहे हैं। एक पचमीना साड़ी तीन ट्रेंड कारीगर एक माह में तैयार कर पाते हैं। इसलिए इऩका महेनताना हजारों में होता है। सूफियान के अनुसार उनके यहां बनारसी साड़ियों की 1 हजार से लगाकर 49 हजार रुपए (SAREE cost 49 thousand) तक की रेंज की साड़ी हैं। एक दिन पूर्व ही एक ग्राहक ने 14 हजार रुपए वाली साड़ी खरीदी।

ठप्पा प्रिंट का विदेशों में भी है ठप्पा, आप भी देखेंगी तो खरीदे बिना नहीं रहेंगी

SAREE cost 49 thousand
तारापुर की 500 पुरानी कला दाबु प्रिंट वाली बेडशीट देखती युवतियां।

नीमच जिले के जावद तहसील के तारापुर की ठप्पा प्रिंट वाली बेडशीट भी आप हस्तशिल्प प्रदर्शनी 2021 से खरीद सकते हैं। यह ठप्पा प्रिंट लगभग 500 साल पुरानी है। इसकी मांग देश ही नहीं, विदेशों तक में है। यह स्वास्थ्य के साथ ही पर्यावरण के भी अनुकूल है। बेडशीट, स्टॉल, साड़ियां और ड्रेस मटेरियाल भी विभिन्न डिजाइनों में उपलब्ध हैं।

ऐसे होती है ठप्पा प्रिंट, मिट्टी और वनस्पति के रंगों का होता है उपयोग

तारापुर की खास ठप्पा छपाई करीब 500 साल पुरानी है। इस प्रकार की ठप्पा छपाई में मिट्टी और वनस्पति के रंगों का उपयोग किया जाता है। इससे तैयार की जाने वाली डाई की प्रिंट वाली साड़ियों, ड्रेस मटेरियल, बेडशीट की मांग मृगनयनी द्वारा महानगरों में संचालित शोरूम और प्रदर्शनियों में काफी मांग रहती है। रतलाम के रोटरी हॉल में आयोजित प्रदर्शनी में नील के पौधे से बने रंग से तैयार वस्त्रों की भी अच्छी रेंज है जिसे इंडिगो प्रिंट के रूप में जाना जाता है।

सिलाई की कीमत में खरीदें शुद्ध कॉटन वाली शर्ट और कुर्ते

प्रदर्शनी में शुद्ध काटन की शर्टे, कुर्ते और पजामे भी आकर्षण का केंद्र हैं। शर्टें और कुर्ते सिलाई की कीमत पर ही उपलब्ध हैं। हाफ शर्ट जहां महज 200 रुपए की है तो फुल शर्ट सिर्फ 250 रुपए में मिल जाएगी।

इसके अलावा देवास के लेदर के जूते और चप्पर जो शोरूम में मिलने वाले महंगे जूतों को दे रहे मात। मृगनयनी द्वारा आयोजित प्रदर्शनी के प्रभारी दिलीप सोनी ने बताया प्रदह 11 से रात 9 बजे तक किया जा सकता है।

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।