बड़ी खबर ! MP की इस IAS को मिली हाईकोर्ट की फटकार, कोर्ट ने कहा- ‘कलेक्टर को नहीं है कानून की जानकारी’
मप्र की उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने प्रदेश की एक कलेक्टर (IAS अफसर) फटकार लगाई है। न्यायालय ने कहा है- लगता है कलेक्टर को कानून की जानकारी नहीं है।
एसीएन टाइम्स @ इंदौर । प्रशासनिक अधिकारियों की स्वेच्छाचारित से न्यायपालिका खफा नजर आ रही है। हालिया मामला शाजापुर जिले (Shajapur district) की कलेक्टर ऋजु बाफना (collector Riju Bafna) से जुड़ा है। उन्हें हाईकोर्ट (High Court) ने फटकार (reprimanded) लगाई है। कोर्ट ने तो यहां तक कहा कि- कलेक्टर को कलेक्टर को नियमों की जानकारी नहीं, बिना सोचे-समझे आदेश पारित कर देती हैं।
शाजापुर कलेक्टर बाफना को फटकार मप्र हाईकोर्ट (MP High Court) की इंदौर खंडपीठ (Indore Bench) के न्यायाधीश जयकुमार पिल्लई ने लगाई है। मामला कलेक्ट्रेट के राजस्व विभाग में 30 वर्षों से कार्यरत सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी एवं नाजिर जयंत बघेरवाल से जुड़ा है। कलेक्टर ने उनकी दो वेतनवृद्धि रोकने के साथ ही उन्हें गुलाना अटैच करने का आदेश दिया था। कलेक्टर के इस आदेश को बघेरवाल ने एडवोकेट यश नागर के माध्यम से कलेक्टर और संभागायुक्त के आदेशों को चुनौती दी थी।
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स्थगित कर दिया आदेश
न्यायालय ने कलेक्टर बाफना के उक्त दंडात्मक आदेश को स्थगित कर दिया है। उन्होंने इस संबंध में 15 दिन में व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायालने अपनी टिप्पणी में कहा कि- कलेक्टर कुछ भी आदेश पारित कर देती हैं, जैसा कि आबकारी अधिकारी के मामले में भी किया गया था। कलेक्टर को कानून की जानकारी नहीं है। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि बिना किसी विस्तृत विभागीय जांच के एक कर्मचारी को इतनी बड़ी सजा कैसे दी जा सकती है? बता दें कि, 16 मार्च 2026 को भी आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के मामले में कलेक्टर को इसी तरह की कानूनी चूक के लिए न्यायालय से फटकार लग चुकी है।
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रिश्वत के आरोप कलेक्टर ने की थी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार दिसंबर 2024 में एक ठेकेदार ने बघेरवाल के खिलाफ रिश्वत लेने की शिकायत दर्ज कराई थी। यहां गौर करने वाली बात यह है कि बघेरवाल ने इससे पहले उस ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाने और वसूली की सिफारिश की थी। बावजूद, कलेक्टर बाफना ने बिना किसी विभागीय जांच के ही सिर्फ कारण बताओ नोटिस के आधार पर ही बघेरवाल को सजा सुना दी थी। उनकी दो संचायी वेतनवृद्धि रोक दी गई थी और तृतीय समयमान वेतनमान के लाभ से वंचित कर दिया गया था।




