विश्व के पहले ‘सुख शक्ति धाम’ का रतलाम में लोकार्पण 4 जनवरी को, पद्म विभूषण नारायण मूर्ति होंगे मुख्य अतिथि
विश्व के पहले सुख शक्ति धाम का लोकार्पण रविवार को रतलाम में होने जा रहा है। समारोह वैश्विक स्तर की ख्यात हस्तियों की पस्थिति में होगा।
- फोर्स मोटर्स के चेयरमैन अभय फिरोदिया, कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप व टॉरेंट समूह के मानद चेयरमैन सुधीर मेहता विशेष अतिथि होंगे
- अध्यक्षता सुख शक्ति धाम व देश अपनाएं सहयोग फाउंडेशन के संस्थापक वल्लभ भंसाली करेंगे
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । आत्मनिरीक्षण, विवेक और संतुलित जीवन-दृष्टि को केंद्र में रखकर निर्मित विश्व के प्रथम ‘सुख शक्ति धाम’ का भव्य उद्घाटन एवं लोकार्पण 4 जनवरी को रतलाम में होगा। यह धाम किसी धर्म, पंथ या संप्रदाय से बंधा हुआ नहीं है, बल्कि मनुष्य को स्वयं से प्रश्न करने, स्वयं को सुधारने और आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से समाज में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करने की प्रेरणा देता है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर पद्म विभूषण इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति मुख्य अतिथि रहेंगे। फोर्स मोटर्स के चेयरमैन अभय फिरोदिया, टॉरेंट समूह के मानद चेयरमैन सुधीर मेहता, कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप विशेष अतिथि रहेंगे। सुख शक्ति धाम व देश अपनाएं सहयोग फाउंडेशन के संस्थापक वल्लभ भंसाली अध्यक्षता करेंगे।
सुख शक्ति धाम की मूल परिकल्पना इस विचार पर आधारित है कि समाज को बदलने से पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है। यहाँ यह संदेश दिया जाता है कि “हम सुधरेंगे, संसार अपने आप सुधरेगा।” शिकायत की संस्कृति के स्थान पर आत्म-जिम्मेदारी, विवेक और सजग नागरिकता को विकसित करना इस धाम का मूल उद्देश्य है। रतलाम के प्रबुद्ध वर्ग, शिक्षाविदों एवं अध्यात्म-प्रेमी नागरिकों को भी इस लोकार्पण समारोह में आमंत्रित किया गया है।
जानिए, समारोह के अतिथियों को
पद्म विभूषण नारायण मूर्ति

भारतीय आईटी उद्योग के वैश्विक पहचानकर्ता नारायण मूर्ति ने नैतिक कॉर्पोरेट संस्कृति, पारदर्शिता और मूल्य आधारित नेतृत्व को भारतीय उद्योग जगत में स्थापित किया। शिक्षा, शोध, सामाजिक उत्तरदायित्व और परोपकार के क्षेत्र में उनका योगदान व्यापक है। आत्म-अनुशासन, सादगी और विवेक आधारित जीवन-दृष्टि सुख शक्ति धाम के विचारों से स्वाभाविक रूप से जुड़ती है।
अभय फिरोदिया

भारतीय उद्योग क्षेत्र में दीर्घकालिक दृष्टि और सामाजिक दायित्व के लिए पहचाने जाने वाले अभय फिरोदिया ने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण से जुड़े अनेक समाज सेवा के प्रयासों को प्रोत्साहित किया है। उद्योग और मानवीय मूल्यों के संतुलन का उनका दृष्टिकोण सुख शक्ति धाम की आत्मा के अनुरूप है।
सुधीर मेहता

उद्योग, नवाचार और सामाजिक सरोकारों के बीच संतुलन बनाने वाले सुधीर मेहता ने स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनका मानना है कि स्थायी प्रगति का आधार आंतरिक अनुशासन और जिम्मेदार सोच होती है, जो सुख शक्ति धाम की अवधारणा से मेल खाती है।
वल्लभ भंसाली

विचार, विवेक और आत्म-जागरूकता को जीवन का केंद्र मानने वाले वल्लभ भंसाली सुख शक्ति धाम की वैचारिक प्रेरणा के प्रमुख स्तंभ एवं इस परिकल्पना के दृष्ट एवं निर्माता हैं। भौतिक उपलब्धियों के साथ-साथ सामाजिक चेतना, ध्यान, आत्मनिरीक्षण और नागरिक उत्तरदायित्व को जीवन में उतारने का उनका सतत प्रयास रहा है। वे यह प्रेरणा देते हैं कि परिवर्तन की शुरुआत शिकायत से नहीं, स्वयं से होनी चाहिए। सुख शक्ति धाम उनके इसी चिंतन का साकार रूप है जहाँ व्यक्ति को स्वयं से संवाद करने का अवसर मिलता है।
चेतन्य काश्यप

मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री हैं। सामाजिक सहभागिता और जनसेवा से जुड़े चेतन्य कश्यप का योगदान स्थानीय समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता के निर्माण में महत्वपूर्ण रहा है। उनकी उपस्थिति इस आयोजन को जनसरोकारों से जोड़ती है और सुख शक्ति धाम के सामाजिक आयाम को सशक्त करती है।
विश्व का अपनी तरह का पहला केंद्र
सुख शक्ति धाम भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी तरह का पहला ऐसा केंद्र है जहाँ व्यक्ति को यह समझने की प्रेरणा दी जाती है कि सुख बाहर नहीं, भीतर की स्पष्टता से जन्म लेता है। यह धाम वर्तमान जनमानस को और आने वाली पीढ़ियों के लिए आत्म-जिम्मेदारी, विवेक और संतुलित जीवन का संदेश देता है।

इन्होंने किया आह्वान
कार्यक्रम के संयोजक मंडल के मुकेश जैन, गुस्ताद अंकलेसरिया, मेघ कुमार लुनिया, जयंत जैन, संजय व्यास, गौरव त्रिपाठी, वैभव रांका, संजय चपरोट, अजीत छाबड़ा, डॉ. श्याम सुंदर पाटीदार, राजीव श्रीवास्तव, मोहित मूणत एवं विकास शैवाल की ओर से रतलाम के प्रबुद्ध वर्ग, युवाओं, शिक्षाविदों तथा उन सभी नागरिकों से, जिनके भीतर अध्यात्म, आत्मनिरीक्षण और जीवन को गहराई से समझने की जिज्ञासा है, इस ऐतिहासिक लोकार्पण समारोह में सहभागिता करने का आह्वान किया गया है। संयोजक मंडल का मानना है कि सुख शक्ति धाम केवल एक स्थल नहीं, बल्कि आत्म-जागरण और जिम्मेदार नागरिक चेतना की एक सतत प्रक्रिया है, जिससे जुड़कर व्यक्ति स्वयं से शुरुआत कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।
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