बड़ी खबर ! मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित, कांग्रेस के विरोध और हंगामे के बीच बहुमत से मिली मंजूरी
मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक बहुमत से पारित। सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया, जबकि आरिफ मसूद का संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गया।
- सीएम डॉ. मोहन यादव ने यूसीसी को समानता और महिला सशक्तिकरण का कानून बताया
- विवाह पंजीयन अनिवार्य और बहुविवाह पर रोक जैसे प्रावधान शामिल
एसीएन टाइम्स @ भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को विपक्ष के जोरदार विरोध, नारेबाजी और तीखी बहस के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक बहुमत से पारित कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने सदन में "चंदा चोरों, गद्दी छोड़ो" के नारे लगाए। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधेयक का बचाव करते हुए विपक्ष पर तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। आरिफ मसूद का संशोधन प्रस्ताव खारिज होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधेयक को पारित घोषित कर दिया।
विधेयक पर चर्चा शुरू होते ही सदन का माहौल गर्म हो गया। कांग्रेस विधायक लगातार विरोध जताते रहे और नारेबाजी करते रहे। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपना विस्तृत वक्तव्य देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति की है तथा देशहित के मुद्दों पर जनता की अपेक्षाओं के विपरीत काम किया है।
उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार देने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कहा कि "आज के बाद मध्य प्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी।" उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि "कांग्रेसियों के दांत खाने के और हैं, दिखाने के और हैं। अब इनका पाखंड और दोहरा रोल नहीं चलेगा।"
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान का सम्मान करती है तो उसे इस विधेयक का खुलकर समर्थन करना चाहिए।
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93 प्रतिशत समर्थन का दावा, चौपाई सुनाकर साधा विपक्ष पर निशाना
डॉ. मोहन यादव ने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत नागरिकों ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया है। विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई "जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन्ह तैसी" का उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस की सोच नकारात्मक है, इसलिए उसे हर सकारात्मक कदम में भी खामी दिखाई देती है।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 1947 का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भोपाल को भारत के बजाय पाकिस्तान में मिलाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि उस सोच और मानसिकता पर भी सवाल उठने चाहिए।
मसूद का संशोधन प्रस्ताव गिरा, फिर पारित हुआ विधेयक
मुख्यमंत्री के वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को उनके संशोधन प्रस्ताव पर अपनी बात रखने का अवसर दिया। चर्चा के बाद सदन ने मसूद का संशोधन प्रस्ताव खारिज कर दिया।
संशोधन प्रस्ताव निरस्त होने के तुरंत बाद विपक्ष ने फिर हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को बहुमत से पारित घोषित कर दिया।
यूसीसी विधेयक के पारित होने के साथ ही मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो गया। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम भी इस दिशा में पहल कर चुके हैं।
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विधेयक में ये हैं प्रमुख प्रावधान
- प्रदेश में होने वाले सभी विवाहों का शासकीय पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) अनिवार्य होगा।
- निर्धारित समय में विवाह का पंजीयन नहीं कराने पर जुर्माने का प्रावधान रहेगा।
- पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। यानी बहुविवाह पर रोक लागू होगी।
- सरकार का दावा है कि यह कानून महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा देगा।
- साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नागरिकों के धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार पहले की तरह जारी रहेंगे।








