सक्रियता और सवाल ? कुख्यात सटोरिया राकेश खन्नीवाल और साथी हिम्मत गुर्जर गिरफ्तार, 32 और 20 अपराध के बाद भी खुलेआम चला रहे थे सट्टा!
रतलाम में माणकचौक पुलिस ने 32 और 20 आपराधिक मामलों वाले दो आदतन सटोरियों को गिरफ्तार किया। ₹16,200 नकद और सट्टा पर्चियां जब्त। आरोपियों के लंबे आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद सक्रिय रहने से पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठे।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । पुलिस ने सट्टा लिखते हुए दो ऐसे आदतन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक के खिलाफ 32 और दूसरे के विरुद्ध 20 आपराधिक प्रकरण पहले से दर्ज हैं। इतने लंबे आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद दोनों का फिर से अवैध गतिविधियों में लिप्त मिलना पुलिस की पूर्व कार्रवाई और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
एसपी अमित कुमार (भा.पु.से.) के निर्देश पर जिलेभर में अवैध जुआ-सट्टा गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना प्रभारी निरीक्षक विक्रमसिंह चौहान के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। इसमें उप निरीक्षक शांतिलाल चौहान, प्रधान आरक्षक तखतलाल, राजसिंह, आरक्षक हेमंत, अविनाश मिश्रा तथा अशोक को शामिल किया। टीम को सूचना मिली थी कि क्षेत्र में सट्टा संचालित हो रहा है।
सूचना के आधार पर पुलिस ने दबिश देकर राकेश खन्नीवाल पिता रतनलाल राठौर (49) निवासी भाटों का वास, माण्डली एवं हिम्मत पिता कोदर गुर्जर (40) निवासी त्रिपोलिया गेट, वर्तमान पता महेश नगर, रतलाम को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों के कब्जे से ₹16,200 नकद, सट्टा अंक लिखी पर्चियां और पेन आरोपी राकेश के विरुद्ध 32 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं तो हिम्मत गुर्जर के खिलाफ 20 आपराधिक मामले।
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बार-बार अपराध, फिर भी नहीं लगा अंकुश
दोनों आरोपियों का लंबा आपराधिक इतिहास सामने आने के बाद पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि किसी आरोपी के विरुद्ध दर्जनों मामले पहले से दर्ज थे, तो उनके खिलाफ की गई पूर्व वैधानिक एवं प्रतिबंधात्मक कार्रवाई अपराध की पुनरावृत्ति रोकने में कितनी प्रभावी रही? यह मामला इस बहस को भी जन्म देता है कि आदतन अपराधियों पर समय रहते कठोर कानूनी प्रावधानों का प्रभावी उपयोग क्यों नहीं हो सका।
अब जिला बदर की तैयारी
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ सट्टा अधिनियम के तहत अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार आदतन अपराधी राकेश राठौर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 112 के तहत अतिरिक्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आवश्यक प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के तहत जिला बदर की कार्रवाई भी प्रस्तावित की जा सकती है।
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