GST 2.0 : छोटे ई-कॉमर्स कारोबारियों को मिलेगी देशव्यापी बाजार की चाबी, ITC नियमों और टैक्स नोटिस में भी बड़ी राहत की तैयारी
जीएसटी परिषद की आगामी बैठक में छोटे ऑनलाइन कारोबारियों को देश भर में गोदाम आधारित आसान रजिस्ट्रेशन, 10 हजार से कम के टैक्स नोटिस बंद करने और वैध खरीदारों के आईटीसी को सुरक्षित रखने जैसे बड़े सुधारों पर मुहर लग सकती है।
एसीएन टाइम्स @ नई दिल्ली । देश के सूक्ष्म और मध्यम कारोबारियों (MSMEs) के लिए ई-कॉमर्स के जरिए अखिल भारतीय स्तर पर कारोबार करना अब काफी आसान हो सकता है। प्रस्तावित 'जीएसटी 2.0' सुधारों के तहत वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद अपनी आगामी बैठक में कई बड़े व्यापार-हितैषी बदलावों को मंजूरी देने की तैयारी में है। इन प्रस्तावों का सीधा असर लगभग 9.5 लाख छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं पर पड़ेगा, जिन्हें अब दूसरे राज्यों में अलग से दफ्तर खोले बिना भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्पाद बेचने की सुविधा मिल सकेगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद व्यापारियों के लिए कर अनुपालन को सरल बनाने को लेकर प्रयास कर रही है। इसके लिए इस बुधवार को चर्चा संभावित है जिसमें महत्वपूर्ण प्रक्रियागत सुधारों पर बात होने का अनुमान है। सूत्रों की मानें तो इनमें छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को जीएसटी पंजीकरण के लिए मंच के गोदामों का उपयोग करने की अनुमति मिल सकती है। इसके अलावा वास्तविक खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की सुरक्षा के साथ ही कम मूल्य से जुड़े विवादों को सुलझाने का भी प्रयास रहेगा। यानी ये सुधार जीएसटी 2.0 के तहत पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया और सरल बनाना, माल की आवाजाही सुगम बनाना, करदाताओं तथा कर विभाग के बीच होने वाले विवादों को खत्म करने के उद्देश्य से प्रस्तावित है।
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1. गोदाम आधारित रजिस्ट्रेशन : 9.5 लाख विक्रेताओं को मिलेगा पैन-इंडिया बाजार
मौजूदा व्यवस्था में छोटे ऑनलाइन सेलर्स के लिए अलग-अलग राज्यों में जीएसटी पंजीकरण कराना एक जटिल प्रक्रिया है। नए प्रस्ताव के तहत यदि किसी विक्रेता का अपने गृह राज्य में आधार प्रमाणीकरण और भौतिक सत्यापन पूरा हो चुका है, तो वह अन्य राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के गोदाम (Fulfilment Center) को ही अपना 'पंजीकृत व्यावसायिक स्थल' घोषित कर सकेगा। इसके लिए संबंधित प्लेटफॉर्म की एनओसी (सहमति) पर्याप्त होगी और टैक्स अधिकारियों के अतिरिक्त दखल की जरूरत नहीं पड़ेगी।
2. असली खरीदार पर नहीं गिरेगी गाज, सुरक्षित रहेगा आईटीसी (ITC)
कारोबारियों की लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी चिंता इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर रही है। अक्सर ऐसा होता है कि वैध बिल और भुगतान के बावजूद यदि पिछले सप्लायर ने टैक्स जमा करने में कोई चूक की, तो टैक्स विभाग खरीदार का आईटीसी रोक लेता है। परिषद के एजेंडे में शामिल नए नियम के अनुसार, वैध चालान रखने वाले असली खरीदार के आईटीसी से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। वसूली की कार्रवाई सीधे चूककर्ता विक्रेता के खिलाफ ही की जाएगी।
3. 10,000 रुपए से कम के छोटे टैक्स नोटिस होंगे खत्म
कम मूल्य के केसों पर पूर्ण विराम : 10,000 रुपए तक की कर मांग वाले मामलों में अब नोटिस जारी नहीं किए जाएंगे। जीएसटी मुकदमों में ऐसे मामलों की हिस्सेदारी लगभग 20% है, जिनसे राजस्व कम और प्रशासनिक लागत अधिक आती है।
लंबित मामलों को राहत : यह छूट निर्धारण (Assessment) और अपील, दोनों स्तरों पर लंबित मामलों पर लागू करने की योजना है।
बड़ी मांग पर पहले संवाद : 10,000 रुपए से अधिक के मामलों में सीधे औपचारिक डिमांड नोटिस भेजने के बजाय पहले करदाता को सूचना देकर पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
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4. ट्रकों की बेवजह जांच पर लगाम, घटेगा लॉजिस्टिक खर्च
राज्यों की सीमाओं पर मालवाहक वाहनों को बार-बार रोके जाने से होने वाली देरी और माल ढुलाई लागत को कम करने के लिए इंटेलिजेंस-आधारित ट्रांजिट जांच प्रणाली लाई जा रही है। इसके तहत केवल गंभीर मामलों (जैसे पूरे दस्तावेज गायब होना या स्पष्ट कर चोरी) को छोड़कर, सामान्य तौर पर वाहनों की जांच उसी राज्य द्वारा की जा सकेगी जहां से माल रवाना हुआ है। किसी भी वाहन को रास्ते में रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी, जिससे लॉजिस्टिक समय में भारी बचत होगी।





